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चंद्रमा हो तुम मेरे जीवन के—गृहलक्ष्मी की कविता

Karva Chauth Poem: तुम ताको, करवा चौथ चंद्रमैं पूर्णचंद्र  तुम्हें  तकता हूँतुम मेरी उम्र की दुआ करोमैं अमर प्रेम की करता  हूँ झुमकों को तकते, नयन मेरेबाहों का बना मेरे, कण्ठहारप्रेयसि!   सिंदूरी  होठों   सेलिख दूं माथे पर अमर प्यार तुम देखो अटारी पर जाकरश्यामल आकाश से घिरा चाँदमैं  मेघ  वर्ण  की  छाया  बनकरूँ […]

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मां हो कर ही मां को जाना-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: त्याग, समर्पण, जिम्मेदारी,              सबको अब पहचाना है !माँ होती है क्या ? मैंने ये ,                                   माँ ही है आधार सृष्टि का,                सार है वेद ऋचाओं का […]

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नदी-गृहलक्ष्मी की ​कविता

Hindi Poem: नहीं है ख्वाहिश की दरिया से जा मिलूँ अभी, लोगों की प्यास बुझे कुछ और बहुँ मैं अभी। फेंक दे तू उत्कंठा और वेदना इस बहाव में, रुको मत बस बढ़े चलो क्या रखा है ठहराव में। विसर्जित कर दो सारी गंदगी मुझे नहीं है मलाल, फ़ेंक दो द्वेष विकार और करो तुम […]

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यह दर्द कहां मैं छुपाऊं-गृहलक्ष्मी की कविता

गृहलक्ष्मी की कविता-चाहूं जो रोना खुलकर मैं,तो कभी रो न पाऊंतुम ही बताओ, मैं हृदय में उठता दर्द कहां छुपाऊं बेहिसाब दर्द दिया माना तूने,यूं बहुत दूर मुझसे जाकरमैं सोचूं भी जो तुझसे दूर होना,तो कभी हो न पाऊं तुम हो गए हो शामिल,मेरे वजूद में कुछ इस तरह सेकि चाहूं भी तुम्हें गर भुलाना,तो […]

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चाचा चौधरी बने नमामि गंगे कार्यक्रम के शुभंकर, बताएंगे गंगा नदी की स्वच्छता के उपाय

युवाओं को प्रेरित करने के लिए इस बार कार्टून करेकटर चाचा चौधरी को चुना गया है। जी हां केंन्द्र सरकार के अथक प्रयासों के मद्देनज़र सन् 2015 में आरंभ हुए नमामि गंगे प्रोजेक्ट के लिए डायमंड बुक्स के मशहूर किरदार चाचा चौधरी को शुभंकर या मेसकोट बनाया गया है। 2.26 करोड़ की अनुमानित लागत के […]

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‘गर साथ तुम्हारा मिल जाता’ – गृहलक्ष्मी कविता

रुई के फाहे से गिरते हिम के टुकड़े, मेरे मन को करते विह्वल आंखो से बहते निर्झर, बन के पानी ये पिघल-पिघल बिसरी यादों की कुछ कड़ियां, जो लिपटी हुई मेरे कल से वापस उनको फिर मैं पाता, गर साथ तुम्हारा मिल जाता उगते सूरज की स्वर्ण किरण सी, यादें  तेरी मन में छा जातीं […]

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सपनों वाले नभ अनंत पथ कैसे दूंगी…

जन्म तुम्हें तो देकर लाडो, जीवन फ़िर से मैं जी लूँगीभेदभाव के तीक्ष्ण ज़हर को, तुझसे पहले मैं पी लूँगी पर उन्मुक्त दिशा विचरण को सौम्य चतुष्पद कैसे दूँगी पंख लगाकर सपनों वाले नभ अनंत पथ कैसे दूँगी ll तप्त हवा की विषम आँच पर मन नारी का दरक रहा है शून्य भावना चुप समाज […]

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नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब

बहुत सी नारियों का मानना है कि अगर सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष अनाड़ी जी को बनाया जाए, तो आज की नई पीढ़ी को भटकने से रोका जा सकता है। इस पर आप क्या कहते हैं? – गीता ढाका, गुरुग्राम (हरियाणा)   माफ करना गीता, सैंसर बोर्ड है एक फजीता। हम क्यों अपनी मिट्टी कुटवाएंगे, निमाता-निर्देशकों से […]

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जब तुम बड़ी हो जाओगी…

  प्यारी बेटी, जब तुम बड़ी हो जाओगी, दुनिया जो आज है वो कल भी रहेगी। तुम्हारा दृष्टिकोण परिपक्व होकर, हर चलन को तुम बेहतर समझ पाओगी।। सफलता की जानोगी कई सारी परिभाषाएं, सीखोगी जीवन के कई सारे मूल्य। सारे सुझावों को समझने के बाद, परिभाषा से मुक्त सफलता पाओगी।। राहें बहुत मिलेंगी चलने के […]

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मां की याद

आज यूही बैठे बैठे आंखे भर आई हैं, कहीं से मां की याद दिल को छूने चली आई हैं। वो आंचल से उसका मुंह पोछना और भाग कर गोदी मे उठाना, रसोई से आती खुशबु आज फिर मुंह मी पानी ले आई है। बसा लिया है अपना एक नया संसार,  बन गई हूं मैं खुद […]

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