Posted inस्वामी विवेकानंद की कहानी

त्रुटि हो तो सुधार लो – स्वामी विवेकानंद की कहानी

खेतड़ी में एक ऐसी घटना घटी, जिसने स्वामी जी के जीवन को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई। वे आजीवन उस घटना को याद करते रहे। वे अक्सर अपने भाषणों में भी इस घटना का वर्णन करते थे। जब वे खेतड़ी पहुंचे तो वहां के राजा ने प्रणाम किया और मानस्वरूप पच्चीस रूपए भेंट […]

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प्राणीमात्र की सहायता ही ईश्वर पूजा – स्वामी विवेकानंद की कहानी

स्वामी जी के मन में पूरे एक वर्ष से विश्व धर्म सभा में जाने की योजना चल रही थी। उसके लिए धन का प्रबंध होना भी आवश्यक था। उन्होंने इस काम की शुरुआत दक्षिण भारत से की। उन्होंने अपने व्याख्यानों का विषय रखा ‘मेरी पाश्चात्य यात्रा का उद्देश्य । दक्षिण भारत के शहरों के अलावा […]

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लक्ष्य के लिए संकलप – स्वामी विवेकानंद की कहानी

स्वामी जी जब सितंबर 1893 में, विश्व धर्म सम्मेलन में अपना भाषण सुनाने गए तो उनका भाषण अंत में रखा गया। उन्हें वहां सहयोग देने के लिए कोई भी नहीं था। लेकिन उस कठिन समय का भी बखूबी सदुपयोग किया। बड़े प्रभावशाली तरीके से अपनी बात कही और दर्शकों का दिल जीत लिया। उस दिन […]

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खुद पर विश्वास करो – स्वामी विवेकानंद की कहानी

स्वामी जी किसी भी सुनी हुई बात पर विश्वास नहीं करते थे। वे सदैव अच्छी तरह निरीक्षण के बाद समीक्षा करते या स्वयं उपस्थित हो तार्किक रूप से सवाल करते। एक बार उन्होंने अपने गुरू की भी परीक्षा ली। उन्होंने सुना था कि उनके गुरूदेव रामकृष्ण परमहंस जी रूपया-पैसा छूते भी नहीं थे। भला विवेकानंद […]

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लक्ष्य के प्रति हो समर्पण – स्वामी विवेकानंद की कहानी

स्वामी जी जीवन में लक्ष्य को बहुत मान देते थे। वे कहते थे कि लक्ष्य से हीन मनुष्य जीवन में कभी कुछ नहीं कर पाता। यदि हमने इस धरती पर जन्म लिया है तो निश्चित रूप से हमारा कोई न कोई लक्ष्य भी होगा। बस उसे पहचानने या जानने के लिए कोशिश करनी होगी। स्वामी […]

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हठधर्मिता से हानि – स्वामी विवेकानंद की कहानी

स्वामी विवेकानंद धर्म की कट्टरता के खिलाफ थे। वे चाहते थे कि मनुष्य पूरी धरती को अपने प्रेम व करुणा के बल पर जीते। इस पृथ्वी को हिंसा के बल पर अपना नहीं बनाया जा सकता। धर्म का मुख्य उद्देश्य यही है कि यह मनुष्य के जीवन का कल्याण करे। यदि कोई धर्म ऐसा नहीं […]

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कोई भी कार्य असंभव नहीं – स्वामी विवेकानंद की कहानी

वे कहते थे कि ईश्वर की बनाई सभी रचनाओं में से मनुष्य ही सबसे श्रेष्ठ है । यदि वह चाहे तो कार्य के नियोजन व समय की पाबंदी जैसे गुणों को जीवन में उतार कर कुछ भी पा सकता है। कोई भी काम करने से पहले उसके लिए योजना बनानी चाहिए । फिर परिश्रम और […]

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सकारात्मक सोच – स्वामी विवेकानंद की कहानी

स्वामी जी जानते थे कि जब भी कोई अच्छा काम शुरू किया जाए तो पहले लोग उसका मज़ाक उड़ाते हैं । फिर वे उसका विरोध करते हैं और आखिर में उस काम के लिए अपनी मंजूरी दे देते हैं । जब वे सितंबर 1893 में वेदांत के सिद्धांत को पूरी दुनिया में फैलाने के लिए […]

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आध्यात्मिक उन्नति – स्वामी विवेकानंद की कहानी

स्वामीजी चाहते थे कि भारतवासी अपने कर्तव्य पालन के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर भी अग्रसर हों। उन्हें उचित प्रकार से कर्म करने के अलावा आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी प्रयत्नशील होना चाहिए। उन्होंने धर्म को दार्शनिक, पौराणिक व कर्मकांड भागों में बांटा। उनका मानना था कि दार्शनिक भाव में ही धर्म का सार […]

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कर्म में छिपी है सफलता – स्वामी विवेकानंद की कहानी

स्वामीजी कहते थे कि कर्म में ही सफलता का मंत्र छिपा होता है। गीता में भी कृष्ण ने अर्जुन को कर्म करते रहने की ही प्रेरणा दी है। प्रत्येक कर्म के अपने गुण व दोष होते हैं, इसके बावजूद हमें कर्म करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। शास्त्र कहते हैं कि हमें सदैव कर्म करते […]

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