खुद पर विश्वास करो - स्वामी विवेकानंद की कहानी
खुद पर विश्वास करो - स्वामी विवेकानंद

स्वामी जी किसी भी सुनी हुई बात पर विश्वास नहीं करते थे। वे सदैव अच्छी तरह निरीक्षण के बाद समीक्षा करते या स्वयं उपस्थित हो तार्किक रूप से सवाल करते। एक बार उन्होंने अपने गुरू की भी परीक्षा ली। उन्होंने सुना था कि उनके गुरूदेव रामकृष्ण परमहंस जी रूपया-पैसा छूते भी नहीं थे।

भला विवेकानंद इस बात को कैसे सच मान लेते। उन्होंने परीक्षा के लिहाज़ से गुरू के आसन के नीचे चोरी से चांदी का सिक्का रख दिया। गुरू जी को आसन पर बैठते ही अजीब सा लगा। उन्होंने आसन हिलाया तो सिक्का नीचे आ गिरा। यह देखकर स्वामी विवेकानंद बिना कुछ कहे कक्ष से निकल गए। वे जान गए थे कि गुरू की कथनी और करनी में अंतर नहीं था ।

खुद पर विश्वास करो - स्वामी विवेकानंद की कहानी
खुद पर विश्वास करो – स्वामी विवेकानंद

स्वामी जी चाहते थे कि जिस व्यक्ति के दिशा निर्देश पर हम अपने जीवन की दिशा बदलने जा रहे हों, वह व्यक्ति इस योग्य है भी या नहीं? इसके बाद अपने लिए पवित्र लक्ष्य चुनना चाहिए और लक्ष्य चुनने के बाद तो कदम पीछे हटाने का प्रश्न ही नहीं पैदा होता। वे कहते थे कि हमें दृढ़ संकल्प के साथ कठोर साधना करनी चाहिए ।

वे अपने जीवन की एक घटना बताते थे कि किस प्रकार उनका सामना काशी के बंदरों से हुआ। वे दुष्ट बंदर उनकी जान के पीछे पड़ गए और तरह-तरह से सताने लगे। जब उनसे छुटकारा पाना मुश्किल होने लगा तो एक अजनबी इंसान ने आ कर उन्हें समझाया कि बंदरों से बच कर भागने की बजाए उनका सामना करना चाहिए। जैसे ही वे पलट कर खड़े हुए, सभी बंदर भाग खड़े हुए। उन्हें सबक मिल गया कि जो भी चुनौती सामने आये, उसका सामने खड़े हो कर करना चाहिए। यदि जीवन में बल ही नहीं रहा तो कुछ नहीं । मन में असीमित बल होना चाहिए ताकि साधक कह सके, सके, “मैं चुल्लु से समुद्र पी जाऊँगा। मेरी इच्छा मात्र से पर्वत चूर-चूर हो जाएँगे । “

खुद पर विश्वास करो - स्वामी विवेकानंद की कहानी
खुद पर विश्वास करो – स्वामी विवेकानंद

दूसरे लोगों द्वारा बनाई जा रही बातों या चुगली के बारे में उनके विचार साफ थे। वे कहते, “जिसका जी चाहे, जो चाहे कहे लेकिन अपने-आप में मस्त रहो। लोग कहते हैं कि इस पर विश्वास करो। उस पर विश्वास करो। मैं कहता हूं कि पहले खुद पर विश्वास करो। सारी शक्ति तुममें समाई है। इसे धारण करो ।

विश्वास से कहो कि हम सब कुछ कर सकते हैं। ‘नहीं-नहीं’, कहने से सांप का विष भी असर नहीं करता। पीछे की ओर देखने की आवश्यकता नहीं । आगे बढ़ो। अनंत शक्ति, अनंत उत्साह, अनंत धैर्य व अनंत साहस के साथ ही महान कार्य संपन्न होता है…..

कभी निराश मत हो; मार्ग बड़ा कठिन है – छुरे की धार पर चलने के समान दुर्गम है परंतु तुम निराश मत हो । जागो और अपने परम आदर्श को प्राप्त कर लो।”

खुद पर विश्वास करो - स्वामी विवेकानंद की कहानी
खुद पर विश्वास करो – स्वामी विवेकानंद