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बेटियां क्यों पराई होती हैं—गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: बेटा हो बेटी हो दोनों में अंश तुम्हारे हैंफिर भला बिटिया क्यों  पराई होती हैनौ माह गर्भ में बेटा-बेटी दोनों रहते हैंअंतर नहीं समझो यह बेटी नहीं पराई है घर में जब भी बच्चे किलकारी गूंजतीनीरस जीवन में खुशियों की वर्षा होतीममता से परिपूर्ण वात्सल्य तरंग उठतीउस चरम आनंद की अनुभूति बेटी देती माँ-पापा दादा-दादी की बिटिया दुलारीअपने मीठी बोली से बेटी सबको हर्षातीसुख दुःख में साथ निभाती […]

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पिया का घर-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: छोड़ बाबुल का घर, जब मैं पिया के घर आई,नये लोगों के बीच थोड़ा सहमी और संकुचाई;जैसा सुना था मैंने, उससे हटकर सबको पाई,ससुराल वालों ने मुझसे ऐसी प्रीति निभाई। जीवनसाथी के रूप में एक सच्चा साथी पाई,खुशियों पर मेरी जिसने, अपनी खुशियां लुटाई;स्नेह मिला इतना, कि कभी लगा नहीं मैं पराई,छोड़ बाबुल का घर, जब मैं पिया […]

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नव वर्ष तेरा स्वागत हो—गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: नव वर्ष तेरा स्वागत हो…खुशियां ही खुशियां सबके जीवन में हो बस यही मेरी चाहत हो,नव वर्ष तुम्हारा स्वागत हो।फूल, कलियां ,नदी, झरना, पर्वत पंछी झूम झूम यही गावत हो,नव वर्ष तुम्हारा स्वागत हो।नया साल नई पहल कठिन जीवन हो सरल सबके दिलों में राहत हो,नव वर्ष तुम्हारा स्वागत हो।नव उमंग से भरी […]

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उम्र, इच्छा और पैसे की कहानी-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: जब छोटे थे, जेब में सिक्के भी नहीं थे,पर सपनों के झोले में बादल भरे कहीं थे। सोचा था, बड़े होकर सब पा लेंगे,पैसे भी होंगे, ठाट से जी लेंगे। जवानी आई — उमंगों की थी बरसात,जेब में तूफ़ान नहीं, बस खाली हालात। जॉब मिली तो तनख्वाह ने मज़ाक किया,मन बोला “शाबाश”, जेब […]

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त्यौहारों पर मां याद आती है-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: हर बेटी के भीतरएक अनसुनी धड़कन होती है —माँ की।जो समय के हर पड़ाव परधीरे से याद दिलाती है कि“तू अकेली नहीं, मैं तेरे भीतर हूँ।” माँ बहुत याद आती है —क्योंकि जीवन के हर रंग, हर विधि,उसी से तो सीखी थी।खाना बनाना, तुलसी को जल चढ़ाना,दीपक का रुख किस दिशा में हो —सब उसकी ही सिखाई हुई लकीरें हैं,जो आज […]

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पिता को खोने के बाद बेटे का हाल—गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: जिन बेटों ने पिता को खोया, वे समय से पहले बड़े हो गए—मानो बचपन की किताब का आख़िरी पन्नाअचानक किसी ने फाड़ दिया हो। वे खेलों की जगहजिम्मेदारियों के पथरीले आँगन में उतरे,जहाँ हँसी के स्वर दबकरसिर्फ़ माँ की थकी हुई साँसें गूँजती थीं। कम उम्र के कंधों परभारी बोझ उतर आया—रोटी, शिक्षा, और घर […]

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चंद्रमा हो तुम मेरे जीवन के—गृहलक्ष्मी की कविता

Karva Chauth Poem: तुम ताको, करवा चौथ चंद्रमैं पूर्णचंद्र  तुम्हें  तकता हूँतुम मेरी उम्र की दुआ करोमैं अमर प्रेम की करता  हूँ झुमकों को तकते, नयन मेरेबाहों का बना मेरे, कण्ठहारप्रेयसि!   सिंदूरी  होठों   सेलिख दूं माथे पर अमर प्यार तुम देखो अटारी पर जाकरश्यामल आकाश से घिरा चाँदमैं  मेघ  वर्ण  की  छाया  बनकरूँ […]

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हे पुरुषों-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: तुम समाज के सबसे सशक्त स्तंभ हो,तुममें शक्ति है—पूरा परिवार उठाने की,अकेले ही उसे सँवारने की। फिर भी, न उड़ाओ व्यंग्य,न गढ़ो ठिठोलियाँ अपरिपक्व,महिलाओं पर, जिनकी आत्मा भीतुम्हारी दुनिया का हिस्सा है। समझो—तुम समाज की हर महिला के संरक्षक हो,यदि कोई अकेली है,तो वह तुम्हारी जिम्मेदारी है।कोई बहाना नहीं, कोई मौका नहीं। तुम […]

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ऑनलाइन शॉपिंग-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: ऑनलाइन शॉपिंग ने,जीना किया आसान।बैठे-बैठे खरीद ले,जग का सभी सामान।। सुनो, ई-खरीदारी का,किस्सा इक मज़ेदार।लगे यदि रिलेटेबल तो,तुरन्त बताओ यार।। कार्ट में कपड़े भर लिए,देख के सस्ते दाम।बीस सूट करके पसंद,दिल को मिला आराम।। डिस्काउंट ऑफर बहुत,लूट हो जैसे आज।कपड़े खरीद मनमाफ़िक,हो गया खुद पे नाज़।। इंतज़ार की घड़ी खत्म,कपड़ों का मिला स्टॉक।रंग-बिरंगे सूट […]

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पंजाब डूबता नहीं उठता है—गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: कल सारी रात नींद नहीं आई,बारिश की वह बूंदें,जो संगीत सी लगती थी,उन्होंने एक दहशत सी फैलाई।मेरा पंजाब सहम रहा है,तिनके की तरह बिखर रही है,किसी की सारी उम्र की कमाई।पर सलाम हैमेरे पंजाब के हौसले को,जिसने इस बेदर्द मौसम में भी,अपनी हिम्मत न भुलाई।हर इंसान कर रहा है कोशिश,इस बाढ़ से उबरने की,न जाने […]

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