मां जगत जननी-गृहलक्ष्मी की कविता: Hindi Poem
Maa Jagat Janni

Hindi Poem: मां जगत जननी इस बार तुम,
कन्याओं की रक्षा करना।
घूम रहे हैं पापी जहां-तहां,
आकर इनका भक्षण करना।

छोटे-छोटे फूल ये बच्चे,
कैसे ये लड़ पाएंगे।
मानव रूप में घूमें भेड़िए,
मासूम किस विधि बच पाएंगे।

आकर मां तुम ओ चामुंडा,
सभी नर पिशाचों का वध करो।
कोमल कोमल पंखों वाली ये चिड़ियां,
इनकी उड़ान सुनिश्चित करो।

तेरा ही रूप है मां इन कन्याओं में,
फिर क्यूं इन पर होता अत्याचार।
बेटी बेटी करते हैं सभी पर,
नहीं कोई इनका  खेवनहार।

हर पापी, हर नीच, दुष्ट की,
जीवन लीला खत्म करो।
जैसे-जैसे कष्ट दिए इन्होंने बच्चियों को,
मां ऐसे ही इनका वध करो।

कलयुग समय आया बड़ा भारी,
छोटी कन्या भी नहीं बची बेचारी।
फरसा त्रिशूल सभी अस्त्र-शस्त्र संग,
दुष्टों का दमन करो मां काली।

खूब ये तड़पे खूब ये फड़कें,
मृत्यु नहीं हो इनकी आसान।
तड़पा तड़पा कर मां इन्हे मारना,
मां जगतजननी बस इतना लो संज्ञान।