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करवा चौथ-गृहलक्ष्मी की कविता

Karva Chauth Poem: चांद से मांगू आज मैं अक्षय सुहाग,लेकर पूजा की थाल सखी अपने हाथ।।करवा छलनी सिंदूर चूड़ी मेहंदी बिंदियाऔर धूप अगरबत्ती दिया और प्रसाद।।से पूजा करूं चांद मैं तेरासदा सलामत रहे सुहाग मेरा।।मैं ना मांगू आज कोई और वर ,मेरे पिया की जिंदगी है मुझे सबसे प्यारा ,उनकी खुशियां दे दो ऐ चांदफैला […]

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ये जीवन है-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: सिन्हा साहब का प्रमोशन हुआ था, घर में एक बड़ी पार्टी रखी गई थी। खाने-पीने का शानदार इंतजाम किया गया था। शाकाहारी से लेकर मांसाहारी तक… हर तरह के पकवान मेज पर लगे हुए थे।ऐसी पार्टियों में शराब पीना आम बात है…शराब पानी की तरह बह रही थी। घड़ी ने एक बजा दिए […]

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हैप्पी वैलेंटाइंस डे-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Love Story: सुजीत ने होटल रूम में एंट्री करते ही सोफे पर अपना सारा सामान रखा और बैग खोलने लगा। जैसे ही उसने बैग खोला उसकी नजर बैग में रखी एक ऑरेंज कलर के पाउच पर पड़ी । उस पाऊच को देखकर सुजीत सोचने लगा ।अरे इसमें क्या है..?? इसे तो मैंने नहीं रखा […]

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प्यार भरा चुम्बन—गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Love Story: यह बात उन दिनों की है जब मैं अपने मामा जी की शादी में ननिहाल गई हुई थी।वहां पर मेरी मुलाकात मामा जी के साले सुनील से हुई। सुनील बड़ा ही मजाकिया क़िस्म का इंसान था और हर समय हंसी मजाक में ही लगा रहता था। कोई चाहे कितना भी परेशान क्यों […]

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मां जगत जननी-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: मां जगत जननी इस बार तुम,कन्याओं की रक्षा करना।घूम रहे हैं पापी जहां-तहां,आकर इनका भक्षण करना। छोटे-छोटे फूल ये बच्चे,कैसे ये लड़ पाएंगे।मानव रूप में घूमें भेड़िए,मासूम किस विधि बच पाएंगे। आकर मां तुम ओ चामुंडा,सभी नर पिशाचों का वध करो।कोमल कोमल पंखों वाली ये चिड़ियां,इनकी उड़ान सुनिश्चित करो। तेरा ही रूप है […]

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मैं हिंदी की शिक्षिका हूं-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Diwas Poem: हिंदी है मधुर बोली हिन्दुस्तान कीमैं अपना मान बढ़ाती हूंहा मैं हिंदी पढ़ती हूंगर्व मुझे है अपनी हिंदी परमैं अपना स्वाभिमान बताती हूंनहीं सिखाती गणित का फार्मूलाना हीं मैं विज्ञान पढ़ाती हूंमैं तो दोहा और कविताओं सेपरिचय करवाती हूंनहीं जानती हूं हिस्ट्री और सिभिक्सना ही मैं अंग्रेजी बताती हूंमैं तो हिंदी की […]

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कृष्ण जन्म कथा

Krishna Katha: पाही माम्-पाही माम् सृष्टी सारी पुकारतीकब आओगे जगत के पालनहारी गुहारती मेघ गरजें,बिजुरी चमकेमूसलाधार वर्षा बरसें सायं-सीयं पवन चलेकंस का अत्याचार चरम पर पहूँचें रात कारी-घनघोर मतवालीकारागा़र के द्वार पर पहरा देत प्रहरी वासुदेव व्याकुल…. दर्द से कराहती माँ”देवकी,असुर के अंत और जगत के कल्याण की घड़ी फिर आई। देव गण आकाश से […]

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