चलो आओ मिलकर दिवाली मनाएं-गृहलक्ष्मी की कविता: Diwali Poem
Chalo Aao Milkar Diwali Manae

Diwali Poem: मिट्टी के दीप खरीदें ,
देसी कपास की बत्ती बनाएं ,
कच्ची धनी का तेल डालकर,
मजदूर की झोपड़ी जगमगा आएं
चलो आओ मिलकर दिवाली मनाएं।।

रंगीली चमकीली कंडील ले आएं,
घर आंगन में इन्हें सजाएं,
अपने आलय की शोभा के साथ,
गरीबों का सदन भी रोशन कर आएं,
चलो आओ मिलकर दिवाली मनाएं।।

कुछ सूखे रंग ले आएं,
हटड़ी संग अल्पना रचाएं,
कर पुष्पों की साज सज्जा ,
श्रमिक नैनो की भी ज्योति बढ़ाएं,
चलो आओ मिलकर दिवाली मनाएं।।

छोटे-छोटे उपहार,चॉकलेट,टॉफी ,
कुछ कपड़े कुछ खिलौने एकत्र कर ,
बेबस समूह में बांट कर आएं,
असहाय लबों पर मुस्कान ले आएं,
चलो आओ मिलकर दिवाली मनाएं,
चलो आओ मिलकर दिवाली मनाएं।।

Also read : “ऐसी दीपावली जो सबके लिए हो”-गृहलक्ष्मी की कहानियां