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चलो आओ मिलकर दिवाली मनाएं-गृहलक्ष्मी की कविता

Diwali Poem: मिट्टी के दीप खरीदें ,देसी कपास की बत्ती बनाएं ,कच्ची धनी का तेल डालकर,मजदूर की झोपड़ी जगमगा आएंचलो आओ मिलकर दिवाली मनाएं।। रंगीली चमकीली कंडील ले आएं,घर आंगन में इन्हें सजाएं,अपने आलय की शोभा के साथ,गरीबों का सदन भी रोशन कर आएं,चलो आओ मिलकर दिवाली मनाएं।। कुछ सूखे रंग ले आएं,हटड़ी संग अल्पना […]

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