रिलेशन में साइलेंट किलर की तरह काम करती हैं ये चीजें, जानिए इनके बारे में: Silent Relationship Killer
Silent Relationship Killer

Silent Relationship Killer: हम सभी यह जानते हैं कि हाई ब्लड प्रेशर को “साइलेंट किलर“ के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह धीरे-धीरे उन महत्वपूर्ण अंगों पर हमला करता है और उन्हें नष्ट कर देता है जो जीवित रहने के लिए ज़रूरी हैं। अगर कोई व्यक्ति संकेतों और लक्षणों पर ध्यान नहीं देता है, तो उसका पूरा बायोलॉजिकल सिस्टम प्रभावित होगा और साथ ही रोज़मर्रा की ज़िंदगी के काम भी प्रभावित होंगे। 

ठीक इसी तरह, रिश्ते में भी कई चीजें बतौर साइलेंट किलर काम करती है। अमूमन लोग इनके बारे में जानते नहीं है या फिर इसे समझते नहीं है। जिसकी वजह से समय के साथ उनका रिश्ता धीरे-धीरे प्रभावित होना शुरू हो जाता है। एक समय के बाद उनके रिश्ते की परेशानी इस हद तक बढ़ जाती है कि वे चाहकर भी अपने रिश्ते में वह खुशी, प्यार व सम्मान प्राप्त नहीं कर पाते हैं। यहां तक कि मानसिक रूप से भी वे बेहद परेशान रहते हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ साइलेंट किलर के बारे में बता रहे हैं, जो आपके रिश्ते को बहुत अधिक प्रभावित कर सकते हैं-

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किसी भी रिलेशन में कम्युनिकेशन काफी महत्व रखता है। यह दोनों पार्टनर को एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से जोड़कर रखता है। लेकिन जब पार्टनर आपस में एक-दूसरे से खुलकर बातचीत करना बंद कर देते हैं, तो वे खुद को अलग-थलग महसूस करने लगते हैं। इतना ही नहीं, अपने पार्टनर के साथ होते हुए भी उन्हें अकेलेपन का अहसास होता है। जिससे समय के साथ गलतफ़हमियां बढ़ना व उम्मीदें पूरी नहीं होती है। इससे उन दोनों के बीच भावनात्मक दूरी पैदा होती है और इस तरह से छोटी-छोटी बातें भी बहुत बड़ी बनने लगती है। जिससे उनका रिश्ता खराब ही होता चला जाता है।

भारतीय परिवेश में यह देखा जाता है कि जब कपल्स शादी के बंधन में बंध जाते हैं तो वे अपने पार्टनर को ग्रांटेड लेने लगते हैं। उन्हें कहीं ना कहीं ऐसा लगता है कि अब उनका पार्टनर उन्हें कहीं पर भी छोड़कर नहीं जाएगा। हालांकि, उनकी यही सोच रिश्ते के लिए साइलेंट किलर बन जाती है। दरअसल, जब आप अपने पार्टनर को ग्रांटेड लेने लगते हैं तो उसके लिए किसी भी तरह से प्रयास नहीं करते हैं। उन्हें लगता है कि आवश्यक प्रयास किए बिना चीजें हमेशा एक जैसी रहेंगी। जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। जब पार्टनर व उसकी खुशी के लिए आपके प्रयास कम हो जाते हैं तो ऐसे में सामने वाला व्यक्ति खुद को उपेक्षित महसूस कर सकता है। कहीं ना कहीं उनके बीच का आपसी प्रेम व आकर्षण कम होने लगता है।

emotional intimacy
Not focusing on emotional intimacy

किसी भी रिश्ते में सिर्फ फिजिकल इंटीमेसी ही मायने नहीं रखती है, बल्कि आपको इमोशनल इंटीमेसी पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए। जबकि अधिकतर कपल्स इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते हैं। यहां तक कि उन्हें इस बारे में पता तक भी नहीं होता है। इमोशनल इंटीमेसी में एक-दूसरे के साथ ओपन कम्युनिकेशन शामिल है। रिश्ते के इस पहलू की उपेक्षा करने का मतलब है अपनी आंतरिक दुनिया, जैसे कि आपके डर, सपने और इच्छाएं साझा न करना। जिन कपल्स के बीच इमोशनल इंटीमेसी नहीं होती है, वे अपने रिश्ते में उस गहराई व आत्मीय प्रेम को अनुभव नहीं करते हैं। पार्टनर को ऐसा लगने लग सकता है कि वे गहराई से जुड़े होने के बजाय समानांतर जीवन जी रहे हैं।

कई बार ऐसा होता है कि कपल्स के बीच कुछ बातों या स्थितियों के कारण मनमुटाव होता है। लेकिन वे किसी भी तरह की बहस या संघर्षों से बचने के लिए उन पर बात करना ठीक नहीं समझते हैं। जिसकी वजह से वे मुद्दे अनसुलझे ही रह जाते हैं और इससे दोनों पार्टनर के मन में समय के साथ तनाव या नाराज़गी की भावना बढ़ने लगती है। इन्हीं, अनसुलझे मुद्दों के कारण अक्सर बहस, विश्वास की कमी और यहां तक कि भावनात्मक रूप से डिस्कनेक्शन भी हो सकता है। ऐसे में उस रिश्ते में प्रेम का स्थान तनाव व ताने ले लेते हैं। जिससे जब भी कपल आपस में सामान्य तौर पर बात करते हैं, तब भी वे एक-दूसरे को केवल दुख ही पहुंचाते हैं। ऐसे में उनका रिश्ता समय के साथ नासूर बनता चला जाता है। इसलिए, कभी भी वर्तमान में होने वाली लड़ाई से डरकर अपने बीच की गलतफहमियों या मुद्दों को अनसुलझा ना रहने दें।

यह एक ऐसा साइलेंट किलर है, जो अधिकतर रिश्तों को पूरी तरह से खत्म कर देता है। कुछ कपल्स तो एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं। वहीं कुछ कपल्स किसी ना किसी मजबूरी के चलते एक-दूसरे के साथ एक छत के नीचे तो रहते हैं, लेकिन वास्तव में उनका रिश्ता  खत्म हो चुका होता है। यह देखने में आता है कि जब कपल्स के बीच नाराजगी बढ़ती है तो एक-दूसरे पर व्यंग्य, आलोचना, या अपमानजनक तरीके से बातचीत करते हैं। यह साफतौर पर साथी के प्रति सम्मान की कमी दर्शाता है। ऐसा करने से दोनों के बीच विश्वास खत्म हो जाता है। इतना ही नहीं, इससे माहौल भी बहुत ज्यादा टॉक्सिक बन जाता है और व्यक्ति के लिए खुलकर सांस लेना भी बहुत अधिक मुश्किल हो जाता है।

मैं मिताली जैन, स्वतंत्र लेखिका हूं और मुझे 16 वर्षों से लेखन में सक्रिय हूं। मुझे डिजिटल मीडिया में 9 साल से अधिक का एक्सपीरियंस है। मैं हेल्थ,फिटनेस, ब्यूटी स्किन केयर, किचन, लाइफस्टाइल आदि विषयों पर लिखती हूं। मेरे लेख कई प्रतिष्ठित...