अंग्रेजों के चंगुल से भारत को मुक्ति दिलाने वालों की लंबी सूची में महाराष्ट्र के सातारा जिले के अपशिंगे गांव की अपनी एक खास पहचान है। सैनिकों के गांव से मशहूर इस गांव की पांचवीं पीढ़ी देश सेवा के काम में लगी हुई है। इस गांव के बच्चों से अगर पूछा जाए कि वह बड़ा होकर क्या बनना चाहेगा तो उसका उत्तर होगा कि मैं तो देश की सेना में जाना पसंद करूंगा। अपशिंगे गांव के हर घर में देशप्रेम की बातें होती रहती है। इस गांव में  इंजीनियर, डॉक्टर बनना किसी को रास नहीं आता। सैनिकों के इस गांव में प्रकाश निकम के परिवार का विशेष मान-सम्मान है। हो भी क्यों न, इस परिवार की पांचवीं पीढ़ी देश सेवा में लगी हुई है। निकम परिवार की पांचवीं पीढ़ी का कहना है कि देश सेवा करना हमारे परिवार का मुख्य ध्येय तो रहा है लेकिन फिर भी अभी देश प्रेम से हमारा मन नहीं भरा है। निकम परिवार की आज की पीढ़ी बड़े फक्र से कहती है कि हमें अपने  देश से बहुत प्यार है और कोई दुश्मन हमारे देश के अमन चैन पर प्रहार करता है तो हमारा खून खौल जाता है। अपशिंगे गांव को अब अपनी पहचान बताने की जरूरत नहीं रह गई है। सातारा क्या देश की राजधानी नई दिल्ली के साथ-साथ सेना मुख्यालय में भी इस बात की खबर है कि महाराष्ट्र का सैनिक गांव कहां है। देशप्रेम की अनेक गाथाओं के साक्षी बने इस गांव का असली नाम भले ही यहां आने वाले लोगों को पता न हो, लेकिन अगर कोई कहे कि मुझे सैनिकों के गांव जाना है तो फिर उसे कुछ और बताने की जरूरत ही नहीं पड़ती।  

इस गांव में देश की आजादी से पहले ही देश प्रेम की लहर व्याप्त थी। इस गांव में उस दिन जश्न जैसा माहौल रहता है, जब कोई युवक भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रस्थान करता है। गांव ने अब तक हजारों सैनिक दिए हैं, जिनमें से अधिकांश ने भारतीय सेना में उच्च पद भी विभूषित किए हैं। अकेले निकम परिवार ही नहीं, कई ऐसे और परिवार हैं, जहां के युवक देश की सुरक्षा के लिए कटिबद्ध हैं। 

इस परिवार के कृष्णदेव निकम ऐसे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने भारतीय सेना में प्रवेश किया। सन् 1945 में भारतीय सेना में प्रवेश करते समय कृष्णदेव निकम ने शायद ही कभी यह सोचा होगा कि उनके बाद की चार पीढ़ी भी भारतीय सेना में जाकर देश प्रेम की अलख जगाएगी। कृष्णदेव निकम के बाद उनके पुत्र प्रकाश निकम ने भारतीय सेना का दामन थामा और हवलदार पद पर पहुंचने के बाद सेवानिवृत्त हुए। प्रकाश निकम की तरह ही उनके भाई युवराज तथा मनोहर भी सेना में रहे। उसके बाद उनकी संतानें आशीष तथा अक्षय कुमार भी भारतीय सेना के सैनिक बने।  वर्तमान में निकम परिवार के अभिजीत, अनिकेत, गौरव भारतीय सेना में अपना जौहर दिखा रहे हैं। प्रकाश निकम के परनाना लक्ष्मण ज्योतिराम पवार, नाना हनुमान पवार, मामा सदाशिव पवार भी भारतीय सेना में रहे। इतना ही नहीं निकम परिवार के मातृ तथा पितृ दोनों पक्षों के कई रिश्तेदारों का भी भारतीय सेना से नाता रहा है। 

इनका पूरा खानदान देश सेवा से जुड़ा है, इस बात का प्रकाश निकम समेत उनके परिवार के अन्य सदस्यों को जबर्दस्त गौरव है। महाराष्ट्र पूर्व सैनिक तथा ऌपेंशनर्स संगठन के अध्यक्ष कैप्टन उदाजी निकम भी पांच पीढ़ी से देशसेवा में रत निकम परिवार से ही जुड़े हैं, उन्हें इस बात का बेहद आनंद है कि वे देशसेवा से जुड़े एक परिवार का हिस्सा हैं। उनका कहना है कि पूर्व तथा वर्तमान सैनिकों को खेती के लिए जमीन तथा रहने के लिए मकान नि:शुल्क देना चाहिए। देश के अधिकांश हिस्सों में रहने वाले पूर्व सैनिकों की क्या स्थिति है, इस पर लगातार ध्यान दिया जाना जरूरी है। जिस तरह से सातारा जिले का अपशिंगे गांव सैनिकों के गांव के नाम से पहचाना जा रहा है, वैसे ही देश के हर जिले का कम से कम एक गांव  सैनिकों के गांव के रूप में पहचाना जाए। 

आम नागरिक स्वयं के लिए जीता है और सैनिक देश के लिए। आज के दौर में बिरले परिवार ही ऐसे हैं, जो अपने बच्चों को सैनिक बनने की प्रेरणा देते हैं। बढ़ते आतंकवाद तथा पड़ोसी देश की घिनौनी साजिशों को नाकाम करने के लिए अपशिंगे गांव के युवकों जैसी सोच होनी चाहिए। देश की सुरक्षा करना हर किसी के वश की बात भले ही न हो, लेकिन अगर हर जिले का एक गांव भी सैनिकों का गांव बन जाए तो आतंकवाद और आतंकवादियों का खात्मा करने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। देश की सेवा में लगी अपशिंगे गांव की पांच पीढ़ियों ने जो मिसाल कायम की है, उसकी जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम ही होगी। 

स्वतंत्रता दिवस पर जब इस वर्ष हम सभी अपने तिरंगे को सलामी दें तो उस वक्त यह संकल्प लें कि हम हर घर में देश सेवा की आवाज बुलंद करेंगे।

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