गदौड़ भरी इस जीवनशैली में आज हम कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त हो चुके हैं। इसकी वजह यह भी है कि जब हमें कोई बीमारी हो जाती है, तभी हम अपना $ख्याल रखना शुरू करते हैं, जबकि हमें कोई बीमारी ना हो और हम स्वस्थ रहें, इसके लिए हमें पहले से ही जागरूक होना होगा। खासकर महिलाओं को अपनी हेल्थ को लेकर ज्यादा जागरूक होने की आवश्यकता है। उन्हें बस दूसरों का $ख्याल होता है, लेकिन जब खुद की हेल्थ की बात आती है तो महिलाएं अक्सर लापरवाही करती हैं, जोकि आगे चलकर खतरनाक साबित हो सकता है, इसलिए बेहद जरूरी है कि हम समय-समय पर स्वास्थ्य की नियमित जांच करवाती रहें, जिससे आने वाले खतरे का पता चल सके।

स्क्रीनिंग टेस्ट का लाभ

स्क्रीनिंग टेस्ट का लाभ यह है कि इससे सही अर्थों में आपकी जान बच सकती है। जी हां, जब किसी बीमारी का पता शुरू में ही चल जाता है तो इससे निपट सकते हैं, क्योंकि बीमारी के फैलने और अनियंत्रित होने से पहले उसे संभाला जा सकेगा। आखिरकार इसका लाभ यह होगा कि स्वास्थ्य की आपकी स्थिति बेहतर होगी और आप एक ऑर्गेनिक जीवनशैली की ओर बढ़ेंगी। क्लिनिक एप्प के सीईओ सतकाम दिव्या इस बारे में बताती हैं कि एक महिला को कौन-कौन से स्क्रीनिंग टेस्ट करवाते रहना चाहिए।

1. कोलेस्ट्रॉल की जांच

इस स्क्रीनिंग परीक्षण से आपको हृदय आधारित बीमारी या हार्ट स्ट्रोक का पता लगाने में सहायता मिलेगी। कॉलेस्ट्रॉल की माप महत्वपूर्ण है और भिन्न आयुवर्ग के लिए यह अलग है। उदाहरण के लिए, अगर आप 24 साल की हैं या उससे ज्यादा तो आपको अपने कॉलेस्ट्रॉल की जांच पांच साल में एक बार करा लेनी चाहिए। कॉलेस्ट्रॉल का स्तर प्रति डेसीलिटर 200 मिली. ग्राम से कम होना चहिए। जब यह 200 से 239 एमजी/डेसीलीटर के बीच होता है तो हम इसे ज्यादा कहते हैं। कॉलेस्ट्रॉल टेस्ट के बाद अगर दुर्भाग्य से हृदय की बीमारी होने का पता चले तो आपको अपने डॉक्टर के साथ मिलकर खून की नियमित जांच की व्यवस्था करनी चाहिए और नियमित जांच करानी चाहिए।

2. सर्वाइकल कैंसर

यूएसपीएसटीएफ ने कहा है कि अगर आप 21 से 65 साल से बीच की महिला हैं तो आपको हर तीन साल पर पैप स्मीयर जरूर कराना चाहिए। इस स्क्रीनिंग टेस्ट में आपके चिकित्सक आपके योनिद्वार को चौड़ा करने के लिए वीक्षण का उपयोग करते हैं। बाद में एक छोटे ब्रश की सहायता से ग्रीवा से सेल्स लिए जाते हैं और उसे परीक्षण के लिए भेजा जाता है। सेल्स में होने वाले बदलावों के आधार पर डॉक्टर किसी महिला में सर्वाइकल कैंसर होने के लक्षण मालूम करते हैं। इस तरह, अगर आप 30 साल या उससे ऊपर की हैं तो यह जांच पांच साल में एक बार करा सकती हैं।

3. ब्लड प्रेशर

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन का कहना है कि अगर आपका ब्लड प्रेशर या बीपी 120/80 मिलीमीटर्स ऑफ मरकरी या एचजी से कम है तो आपको 20 साल की उम्र से हर दो साल में कम से कम एक बार इसकी जांच करानी चाहिए। यह एक जानी हुई बात है कि मोटी महिलाओं को हाइपरटेंशन होने की आशंका ज्यादा रहती है और यह ब्लड प्रेशर का मुख्य कारण है, इसलिए यूनाइटेड स्टेट्स प्रीवेंटिव सर्विसेज टास्क फोर्स या यूएसपीएसटीएफ ने ब्लडप्रेशर की जांच हर साल कराने की सलाह दी है।

4. मैमोग्राम

मैमोग्राम स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए किया जाता है। इस स्क्रीनिंग टेस्ट में महिला के स्तन को दो प्लेट के बीच दबाकर देखा जाता है। इस प्रक्रिया में एक्स-रे छवि तैयार हो जाएगी और बाद में चिकित्सक इसे देखकर स्तन कैंसर का पता लगाते हैं। स्तन कैंसर का जोखिम आपकी उम्र के साथ बढ़ता जाता है। पूर्व में अगर आपने मैमोग्राम कराया है और सकारात्मक नतीजे आए हैं तो यह एक खतरा है। डाक्टर्स का मानना है कि जब कोई महिला 45 साल की आयु तक पहुंचती है तो उस अपना वार्षिक मैमोग्राम कराना चाहिए। अगर आपके परिवार में किसी को यह बीमारी पहले से है तो बेहतर होगा कि आप स्क्रीनिंग और जल्दी करा लें।

5. डायबिटीज

डायबिटीज एक आम बीमारी है, जो दुनिया भर में हर सात में से एक महिला को होती है। महिलाओं को चाहिए कि अपने ब्लड शुगर की जांच हर तीन महीने में एक बार जरूर कराएं। डायबिटीज की सघनता के कई चरण होते हैं। इसके तहत प्री डायबिटिक की रीडिंग अगर 126 एमजी/डीएल से ज्यादा है तो डायबिटीज के पहले चरण का मामला हो सकता है। इसका मतलब हुआ कि डायबिटीज की शुरुआत होने वाली है। अगर आपके परिवार में किसी को डायबिटीज है तो इसे वंशानुगत कहते हैं। ऐसे मामलों में आपको स्क्रीनिंग की शुरुआत नियमित आधार पर काफी पहले करनी होगी। 

6. ऑस्टियोपोरोसिस

यह बहुत जल्दी नहीं होता है, लेकिन 65 साल की उम्र की हरेक महिला को चाहिए कि ऑस्टियोपोरोसिस का पता लगाने के लिए बोन डेनसिटी टेस्ट करा लें। हड्डी टूटने का हल्का या गंभीर मामला हो या फिर शरीर का वजन कम हो तो थोड़ा ज्यादा सतर्क रहना चाहिए और तुरंत जांच करानी चाहिए। ऑस्टियोपोरोसिस के लिए सबसे लोकप्रिय स्कैन डेक्सा स्कैन होता है, जो कम डोज वाली एक्स-रे प्रणाली से किया जाता है और इससे शरीर की सभी हड्डियों की आवश्यक तस्वीर लेने में सहायता मिलती है। स्क्रीनिंग की आवर्तता अलग होती है और यह शरीर की बोन डेनसिटी तथा कई अन्य जोखिम पहलुओं पर आधारित होती है। 

7. त्वचा कैंसर

इस तरह की स्क्रीनिंग किसी अन्य तरह की जांच जैसा नहीं है। महिलाओं को अपनी त्वचा में परिवर्तन को खुद समझना सीखना चाहिए। अगर किसी असामान्यता का पता चले तो उन्हें किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए और अन्य टेस्ट कराने चाहिए। त्वचा कैंसर के कुछ ही संकेत ऐसे होते हैं, जो भविष्य में परेशान करें। उदाहरण के लिए तिल का बढ़ना, आकार बदलना, अनियमित रैशेज आदि आपकी त्वचा के लिए खतरा हो सकते हैं और यह आगे चलकर त्वचा के कैंसर का कारण बन सकते हैं। 

8. दांतों की जांच

दांतों को स्वस्थ बनाए रखना आसान नहीं है। डॉक्टर हर किसी से कहते हैं कि दो साल में एक बार अपने दांतों की जांच कराइए। दांतों की दूसरी समस्या का पता लगाने के लिए कई बार दांतों के भी एक्स-रे की आवश्यकता होती है।  

इस प्रकार से कुछ आवश्यक टेस्ट हैं, जो प्रत्येक महिला को नियमित आधार पर करने चाहिए। सभी स्वास्थ्य जांच करवाने का एक सही समय और उम्र होती है, इसलिए आप अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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