समय के साथ साथ महिलाओं के शरीर में भी काफी अहम बदलाव होते है, जिसमें कई तरह की बीमारियों से जुड़े खतरे भी बने रहते हैं। बात कैंसर से जुड़े खतरे की हो तो खासकर 40 साल से 65 साल के बीच की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी सबसे ज्यादा होता है। इसके प्रति जागरूकता के लिए इसकी स्क्रीनिंग भी अब हमारे देश में उपलब्ध है। सबसे पहले तो जानते हैं क्या होता है ब्रेस्ट कैंसर।

ब्रेस्ट कैंसर

स्तन कैंसर एक प्रकार का कैंसर है, जो कोशिकाओं के अनियंत्रित होने के कारण होता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि आम तौर पर इसे ‘सी’ शब्द से परिभाषित किया जाता हैं, एक ऐसा शब्द जो सबके लिए चिंता का कारण है। महिलाओं के लिए स्तन कैंसर एक बड़ी समस्या है। स्तन कैंसर के मामले देर से पता लगने के कारण मृत्यु दर बढ़ रही है।

स्तन कैंसर के जोखिम कारक

महिलाओं में स्तन कैंसर के पहचाने जाने वाले कई जोखिम कारक हैं-

  • पारिवारिक इतिहास।
  • BRCA-1, BRCA-2 और PF3 जैसे जीनों में म्यूटेशन।
  • लंबे समय तक अंतर्जात एस्ट्रोजेन के संपर्क में रहना।
  • समय से पहले पहला मासिक धर्म।
  • देर से रजोनिवृत्ति।
  • गर्भनिरोधक गोली।
  • हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी।
  • जीवनशैली के अन्य जोखिम कारकों में शराब का उपयोग, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा और कम समय के लिए स्तनपान शामिल हैं।

क्या हैं लक्षण

  • स्तन में गांठ
  • पूरे स्तन या किसी हिस्से में सूजन
  • स्तन की त्वचा में परिवर्तन

इसमें शामिल है-

  • जलन/त्वचा का लाल होना
  • त्वचा का मोटा होना
  • स्तन ऊतक के डिंपलिंग
  • त्वचा की बनावट में बदलाव
  • निप्पल में बदलाव
  • बगल में गांठ

ब्रेस्ट कैंसर का उपचार

ब्रेस्ट कैंसर का इलाज करने के भी कई साधन हैं, जैसे कि दूसरे कैंसर केसों में प्रयोग होते हैं, जैसे- कीमोथेरेपी, रेडिएशन, सर्जरी आदि। परंतु अगर केस हाई रिस्क वाला है तो समय-समय पर लक्षणों की जांच की जानी चाहिए और इससे कैंसर की श्रेणी का जल्द से जल्द पता लगने और बेहतर रिकवरी होने की संभावना होती है।

ब्रेस्ट कैंसर से बचने की सावधानियां 

ब्रेस्ट कैंसर से बचना आसान है और पूरी तरह सुरक्षित भी है, परंतु आपको हर घड़ी इसके लिए जागरुक रहने की आवश्यकता है और अगर आप जागरुक हैं तो इस बीमारी से निपटना या इसे टालना संभव है।

  • नशीले पदार्थों का कम से कम सेवन करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। 
  • वजन को न बढ़ने दें और नित्य व्यायाम करें।
  • जब केस हाथ से निकलता हुआ दिखाई देता है, तो सर्जरी और ऑपरेशन ही जान बचाने का ज़रिया होता है और ऐसे में शरीर से स्तनों को अलग कर दिया जाता है।

मैमोग्राम स्क्रीनिंग कब करवाएं

अब बात करते हैं मैमोग्राम की। अगर आप अपनी ब्रेस्ट की सेहत अच्छी रखना चाहती हैं तो आपको नियमित अंतराल पर मैमोग्राम स्क्रीनिंग करवा लेनी चाहिए। मैमोग्राम एक प्रकार की दर्द रहित स्क्रीनिंग होती है और इससे अगर आपको ब्रेस्ट कैंसर होती है तो उसका पता चल जाता है।

मैमोग्राम के लाभ

मैमोग्राम स्क्रीनिंग का सबसे बड़ा लाभ है कि आपको शुरुआत में ही अपनी ब्रेस्ट कैंसर के बारे में पता चल जाता है, जिससे आप बहुत जल्दी इसे ठीक कर सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो आपकी कैंसर सेल्स मास्टरक्टोमी के बिना ही निकाली जा सकती है।

आपकी उम्र, रिस्क और फैमिली हिस्ट्री के आधार पर आपका स्क्रीनिंग का समय दूसरी महिलाओं से अलग हो सकता है, इसलिए मैमोग्राम टेस्ट करवाने से पहले इन सभी फैक्टर्स को जरूर ध्यान में रखें और अपने डॉक्टर से भी यह सब बातें बता कर उनकी राय ले सकती हैं।

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