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महानगर | Mahanagar novel S Balwant | best novel in hindi | Grehlakhami
Mahanagar

कल तो कमाल हो गया। दलीप अभी तक मनप्रीत के शरीर की सुगंध महसूस कर रहा था।

आज सुबह से वह मनप्रीत के साथ कई बार फोन पर बात कर चुका था। बड़ी खूबसूरत लड़की है। पता ही नहीं लगा सारी रात कैसे गुजर गई। उसने एक मिनट भी सोने नहीं दिया और न ही बोर होने दिया। बातें करती रही। बहुत ही खूबसूरत बातें कभी वह किताबों की बातें छेड़ देती और कभी पेंटिग्स की। कभी किसी अच्छी फिल्म की तो कभी दुनिया में चल रहे डिजाइनों की। वह हर बात में चेतन थी। उसके मुंह से हर बात नपी तुली निकलती। दलीप आम तौर पर औरतों से जल्दी बोर हो जाता है।… पर मनप्रीत का कोई जवाब नहीं।… बिस्तर और बौद्धिकता, दोनों के लिए वह कमाल की साथी है।

मनप्रीत के साथ उसकी मुलाकात भी अजीबो-गरीब ढंग से हुई। उसने इस मुलाकात की कल्पना भी नहीं की थी और न ही उसने यह सोचा था कि कॉलेज के दिनों की दोस्त भावना उसे यूं अचानक मिल जाएगी।

आज सुबह अपने दफ्तर में बैठा वह इन ख्यालों में खोया हुआ था कि अचानक डॉक्टर ने दरवाजा खटखटाया।

दलीप ने उसे अंदर आने को कहा। बुजुर्ग डॉक्टर खुश था “मैं आपका आभारी हूं कि कल आप मेरे घर आए और मेरी बेटी भावना से मिले। मेरे लिए और भी खुशी की बात यह थी कि आप दोनों एक दूसरे को कॉलेज के दिनों से जानते हो।”

डॉक्टर की आंखें भीगी हुई थीं।

“बहुत जिद्दी लड़की है। हमेशा अपनी मरजी की करती है, पर अब उसे आप से मिलने के बाद मेरी बुढ़ापे की चिंता दूर हो गई है। मेरा क्या, क्या पता कब आंखें मूंद जाऊं?… अब मैं निश्चित हूं।” वह अजीब सुकून महसूस कर रहे थे।

दलीप ने बात आगे न बढ़ाई तो वह उठकर चला गया।

डॉक्टर के जाने के बाद वह फिर कल में खो गया।

कल वह डॉक्टर के घर की तरफ गया था। उसने सोचा कि डॉक्टर कई बार बुला चुका है। इधर से गुजर ही रहा हूं तो मिलता चलूं।

अभी वह अपनी जिंदगी अकेला ही गुजार रहा था। कल जब वह डॉक्टर के घर पहुंचा तो दरवाजा भावना ने खोला। डॉक्टर भी घर में ही था। इससे पहले कि वह उनका परिचय कराता वे स्वयं ही एक दूसरे को पहचान गए। डाक्टर बहुत खुश हुआ।

बाद में भावना दलीप को अंदर ले आई और बीयर ऑफर की। उसने एक गिलास पीना स्वीकार लिया। वे बीयर सिप करते हुए अपने कॉलेज से यहां तक की जिंदगी के सफर के बारे में बातें करते रहे।

भावना का वही खूबसूरत चेहरा और लंबे बाल थे। जब वह हंसती, तो उसके सफेद दांत उसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते। जब वह मुसकराती तो उसके गालों में डिंपल पड़ जाते। कॉलेज में दलीप उसे छेड़ा करता था। “तेरी सास तुझे बहुत प्यार करेगी” सारा कॉलेज उसकी खूबसूरती को निहारता। वह सब की चहेती थी। पर भावना हमेशा उड़ती रहती।

आगे तो दलीप भी बढ़ना चाहता था। पर भावना की तरह नहीं। भावना तो अपने मतलब के लिए कुछ भी कर सकती थी। कुछ भी दे-ले सकती थी। आखिर उन्होंने आपस में एक दूरी बना ली और दोनों अपने-अपने अलग रास्तों पर चल पड़े।

भावना फ्रिज में से एक और बीयर लेने गई तो दलीप कॉलेज के दिनों और भावना के साथ को याद करता हुआ खयालों में गुम हो गया।

जिंदगी का सफर तय करते हुए एक दिन ऐसा आया कि दलीप की मुलाकात डॉक्टर से हो गई। डॉक्टर अभी-अभी रिटायर हुआ था। वह विज्ञान में पी.एचडी. और पर्यावरण विशेषज्ञ था। पारस्परिक परिचय के बाद काम के बारे में बातचीत हुई तो दलीप ने उसे अपनी कंपनी में काम करने की ऑफर दी। डॉक्टर को अच्छा लगा।

अब वे दोनों आपस में बातें करते। उनके बीच कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए लंबे विचार-विमर्श होते और इन सारी गतिविधियों में दलीप की सेक्रेटरी निशा हमेशा साथ होती। डॉक्टर को लगता कि दलीप और मिस निशा के “कुछ गहरे” संबंध हैं।

एक दिन डॉक्टर ने मजाक में ही दलीप से कहा “सर यू नीड फोन वाइब्ज। वन फॉर यूअर होम। वन फॉर यूअर ऑफिस, वन फॉर यूअर कंपनी एंड एनेदर फॉर यूअर टेवन”! दलीप हंस पड़ा।

डॉक्टर ने फिर कहा “नो सर आई मीन इट। यूअर टाइम इज़ वैरी प्रीशियस। यू ऑलवेज गाइड अस। एंड यू सिंपली थिंक एंड प्लैन”।

और एक दिन डाक्टर ने कह ही दिया “बाई द वे सर, हाई डौंट यू मीट माई डॉटर।

वह समझ नहीं पाया कि डॉक्टर के मन में क्या था। “वह क्या करती है?”

एडवरटाइजिंग कंपनी की कंसलटेंट है। कुछ समय पहले उसने अपने पति से तलाक ले लिया था। एक बेटा है, स्कूल में पढ़ता है और वहीं हॉस्टल में रहता है। मैं बुजुर्ग हो गया हूं। पता नहीं किस दिन आंखें मुंद जाएं। उसे कई बार समझाया है मुनासिब साथी देखकर सैटल हो जाए। आप किसी दिन घर आना। …मैं आपको उससे मिलवा दूंगा। शी इस ए वैरी नाइस वूमेन।”

दलीप खयालों में डूबा हुआ था कि भावना बीयर ले आई। “कहां पहुंच गए हुजूर?” भावना ने बीयर का मग आगे किया।

दोनों ने चीअर्स करके बीयर पीनी शुरू कर दी।

दलीप बता रहा था कि कॉलेज से निकलने के बाद उसने एक कंपनी बना ली। उसकी कंपनी रिसर्च का काम करती है। देश के बड़े-बड़े वैज्ञानिक उस कंपनी के लिए काम करते हैं। बड़ी-बड़ी कम्पनियां और सरकारें उसे प्रॉजेक्ट देती हैं और वह उन पर रिसर्च कराकर उनकी कार्य योजना उन्हें देती है।

भावना बता रही थी कि वह जिस एडवरटाइजिंग एजेंसी में कंसलटेंट का काम कर रही है वह बड़ी-बड़ी कंपनियों के लिए फैशन तथा अन्य शो करती है। अच्छी से अच्छी कंपनी उसकी कलाईन्ट है। बड़े-बड़े नेता उसके करीब हैं। एक से एक खूबसूरत मॉडल के साथ उसका कांटेक्ट है। और वह इन कंपनियों के हित में फैसले कराने लिए अफसरों तथा राजनीतिज्ञों की जरूरतों का प्रबंध भी करवाती है।

भावना ने सिगरेट सुलगाई और लंबे लंबे कश लेने लगी। वह उस सोफे पर बैठी दलीप का हाथ अपने हाथ में पकड़कर दबाती रही और बातें करती रही।

“बिल्कुल नहीं बदला। मैं तेरे पास बैठी हूं। तेरा दिल नहीं करता कि मुझे खा जाए?” उसने मन ही मन कहा।

फिर अचानक दलीप ने भावना को आलिंगन में ले लिया। भावना ने कोई एतराज नहीं किया। कुछ देर बाद दोनों बिस्तर में थे और उनके शरीर एक दूसरे में खो गए और फिर वे वहीं सो गए।

जब उठे तो शाम हो चुकी थी। भावना को एक पार्टी में जाना था। यह एडल्ट पार्टी थी। उसने दलीप से भी वहां साथ चलने को कहा। उसकी गाड़ी में हमेशा एक पार्टी सूट रहता था। उसने वह सूट मंगवाया और दोनों तैयार होकर पार्टी में पहुंच गए। पार्टी के होस्ट मिस्टर और मिसिज इंतजार कर रहे थे।

भावना ने उन्हें दलीप से इंट्रोड्यूस करवाया और वे बड़े तपाक से मिले।

धीरे-धीरे पार्टी में लोग आने शुरू हो गए थे। एडल्ट पार्टी होने के कारण जोड़े ही बुलाए गए थे। जिस किसी का बॉय फ्रेंड या गर्ल फ्रेंड नहीं है तो उनके लिए पार्टी में आने की मनाही नहीं थी। पर वह होना चाहिए इस फैमली क्लब का मेंबर या फिर कोई विशेष मेहमान।

सबसे पहले वनीता और फारूख दलीप के पास आए। जो भी आया भावना उसे दलीप से इंट्रोड्यूस कराती। सारे लोग बड़े खुले और प्रेम भाव रखने वाले थे।

थोड़ी ही देर में बीस-पच्चीस लोगों के साथ माहौल गर्म हो गया। कोई किसी कार्नर में किसी की औरत के साथ जुड़ गया और कोई किसी के मर्द के साथ मजाक चलता रहा।

दलीप और भावना एक तरफ बैठे बातें करते रहे। दलीप को लगा भावना बहुत बदल गई है। कॉलेज के जमाने में वह किसी की भी बातों में आकर उसके साथ चल पड़ती थी। मगर अब उसमें पूरा आत्मविश्वास है। वह हर चीज की नाप-तोल जान गई है। खाने पीने पहनने के हर मामले में वह सजग है।

“दलीप मैंने जिंदगी में हर रंग देखा है। मैंने पीले, नीले, लाल और काले सारे माहौल देखे हैं और इन रंगों के आदमी भी देखे हैं। अब कुछ देखने को नहीं रह गया। आगे लोग मेरा इस्तेमाल कर जाते थे। अब मैं उनका इस्तेमाल करती हूं, …बस यही मेरी जिंदगी है।”

वह बातों-बातों में भावुक हो उठी।

इस पार्टी में मिस मनप्रीत भी आई हुई थी। खूबसूरत जिस्म, कमाल अदा, लंबे घने बाल और चमकती आंखें। वह भावना के लिए मॉडलिंग करती थी। वह सब लोगों से मिलीं और हंसती-हंसती दलीप और भावना के पास आ गई।

अब वे तीनों बातें कर रहे थे।

दलीप और भावना ने मनप्रीत को बताया कि वह कॉलेज के दोस्त हैं बल्कि एक दूसरे के लिए वे दोस्त से भी ज्यादा थे और अब भी हैं।

पार्टी चलती रही और वे बातें करते रहे।

अचानक मिसिज़ सुनीता ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए कहा “दोस्तो हमारी राय है कि हम आज की रात का फैसला अभी कर लें और एक ड्रा निकालें। जितने मर्द यहां हैं वे अपनी-अपनी गाड़ी की चाबी यहां इस मटके में डाल दें। सब औरतें और लड़कियां जो इस परेड में हिस्सा लेना चाहें इस मटके में से बारी-बारी चाबी निकालें। जिसकी चाबी जिसके हाथ आए वह मर्द आज की रात उसके साथ जाएगा। क्या सब को मंजूर है?” मिसिज सुनीता ने अन्तिम शब्द जरा जोर देकर कहे।

सबकी तरफ से खुशी का इजहार हुआ।

मर्दों ने अपनी-अपनी चाबियां मटके में डाल दीं। मनप्रीत ने दलीप से भी उसकी चाबी छीन कर मटके में डाल दी।

शायद दलीप भावना के सामने किसी और के साथ ऐसा रिश्ता बनाना नहीं चाहता था। मगर मनप्रीत की जबरदस्ती के आगे उसकी एक न चली।

भावना देख रही थी।

पहले तो दलीप कुछ झेंपा पर भावना ने इस पर अपनी खुशी ही जाहिर नहीं की बल्कि उसे बताया कि “आजकल उनके सर्कल में यह सब आम बातें हैं। यह एक क्लोज ग्रुप है। इस तरह औरत मर्द एक दूसरे के साथ इधर उधर बेकार मुंह मारने से बच जाते हैं। ऐसा इस ग्रुप का मानना है। वैसे इस परेड में जो चाहे वह शामिल हो सकता है। जो न चाहे कोई जबरदस्ती नहीं।”

भावना इस परेड में शामिल नहीं हुई।

अब वह खामोश बैठी सिगरेट के कश पर कश लगाती जा रही थी।

जब सब लड़कियों तथा औरतों ने चाबियां निकालीं तो मनप्रीत के हाथ दलीप की ही चाबी आई। मनप्रीत खुशी से खिल गई। वह दलीप के साथ आज की रात गुजारेगी?… वाह! …उसे अच्छा लगा। नया आदमी। नया तजुर्बा और वह भी सिंगल और अमीर?…..

दलीप को पता लगा कि इस तरह की पार्टियों का सिलसिला काफी समय से चल रहा है। कोई मर्द किसी औरत के साथ चला जाता और कोई औरत किसी मर्द के साथ। किसी को एतराज न होता। वह ग्रुप सोचता था कि इसके साथ-साथ जिंदगी में खालीपन नहीं आता और एड्स जैसी बीमारियों से भी बचाव रहता है।

भावना खामोश यह सब देखती सिगरेट पर सिगरेट फूंकती गई।

मनप्रीत ने दलीप को डांस के लिए आमंत्रित किया। वह एक दूसरे के साथ चिपक कर डांस करने लगे। मनप्रीत कभी कभी उसे चूम लेती। पर वह झेंप जाता और भावना की तरफ चोर आंख से देखता।

भावना सिगरेट पर सिगरेट फूंकती रही।

भावना शायद अंदर से तिलमिला रही थी। दलीप को खुद आजादी देने के बावजूद वह यह सब सहन नहीं कर पा रही थी।

दरअसल उसने कभी किसी को “अपना मर्द” समझा ही नहीं था। पर आज अचानक उसे अजीब महसूस हो रहा था। वे बहुत दिनों बाद मिले थे। भावना ने महसूस किया कि आज की अचानक मुलाकात में वे बहुत करीब हो गए थे? भावना उदास होने लगी।

वह इतना तो समझती थी कि दलीप मुकम्मल तौर पर कभी उसका नहीं रहा। पर आज की मुलाकात ने उस कुछ अलग सा एहसास दिया था। वह दलीप को ही इसी पल अपना मर्द समझने लगी थी। वह अपने आपको अधूरा सा महसूस करने लगी।

उसने सोचा कि वह दलीप को मनप्रीत के साथ नहीं जाने देगी। उसको रोकेगी और कहेगी कि यह “मेरा मर्द” है। पर उसने देखा कि मनप्रीत दलीप की बांहों में मग्न है।

वे दोनों एक दूसरे के बदन की तपन महसूस करते हुए अपनी दुनिया में मग्न थे।

भावना यह सब सह नहीं पा रही थी।

उसका मन हुआ कि वह मनप्रीत से कहे कि तुम जैसी मामूली लड़की को यहां पहुंचाने वाली सिर्फ मैं हूं!.. और आज तुम मेरे ही मर्द को मुझसे छीन रही हो? मुझे ही लूट रही हो?

पर वह ऐसा कुछ न कर सकी। वह मनप्रीत से कुछ भी नहीं कह सकी। बस उठी और घर चली गई। धीरे धीरे पार्टी के सब सदस्य चले गए।

मनप्रीत और दलीप भी। और उनकी सारी रात पता नहीं कैसे बीत गई।

आज सारा दिन दलीप को मनप्रीत के साथ बिताए वक्त की याद आती रही। उसके शरीर और मन में एक ऐसी गुदगुदाहट होती रही जो उसने पहली बार महसूस की थी। वह सुबह से कई बार मनप्रीत के साथ फोन पर बात कर चुका था।

उसने आज शाम को फिर मिलने का वायदा भी किया था।

और इसी सब में उसका सारा दिन कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। नियत किए समय पर उसके पास पहुंचने के लिए दलीप अपनी केबिन से बाहर निकला तो देखा कि डॉक्टर अपनी कुर्सी पर “शांत” बैठा था।

उसकी आंखें हमेशा के लिए मुंद चुकी थीं।

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