fifty shades freed novel in Hindi
fifty shades freed novel in Hindi

fifty shades freed novel in Hindi: मैंने डरते हुए अपनी छाती पर उभर आए उन लाल निशानों को देखा। ये क्या! उसने जानबूझ कर चुंबन लेते हुए, मेरी त्वचा पर ये निशान बना दिए थे। मैं यू.ए. के एक जाने-माने व्यवसायी से ब्याही हूं और उसने मेरे शरीर पर ये निशान दिए हैं? मुझे पता क्यों नहीं चला कि वह मेरे साथ क्या कर रहा था? मैं खिसिया गई। दरअसल मैं जानती थी कि वे मि. सेक्स विशेषज्ञ मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे थे।

मेरे भीतर बैठी सयानी लड़की ने अपने गोल चश्मे से मेरी ओर झांका और भीतर बैठी लड़की आरामकुर्सी पर पसरी दिखाई दी। मैंने अपने-आप को देखा। कलाईयां हथकड़ियों के कारण सूज गई हैं। बेशक इन पर खरोंचे आई हैं। पैरों के टखनों पर लाल निशान साफ देखे जा सकते हैं। ये सब क्या है! ऐसा लगता है कि मेरे साथ कोई दुर्घटना हो कर हटी है। बेशक मेरा शरीर इन दिनों बहुत अलग दिखने लगा है। मैं इसे जिस रूप में जानती थी……अब ये वैसा नहीं रहा। मैं पहले से पतली और फिट हो गई हूं। बाल पहले से कहीं खूबसूत, हाथ व पैर मैनीक्योर, भवें तराशी हुईं और खूबसूरत आकार में दिख रही हैं। जिंदगी में पहली बार, मैं बहुत सुंदर रूप में सामने हूं। बस ये बेहूदे प्रेम चिन्हों का क्या करूं। कौन जाने ये प्रेम चुंबनों से बने निशान थे या…?

मैं इस वक्त इनके अलावा कुछ और सोचने के मूड में नहीं हूं। बहुत गुस्सा आया हुआ है। उसकी हिम्मत कैसे हुई। मेरे साथ ये क्यों किया? क्या वह कोई किशोर है? आज से पहले तो उसने कभी ऐसा नहीं किया। मैं कितनी गंदी दिख रही हूं। मैं जानती हूं कि उसने ये सब क्यों किया? मुझे अपने काबू में रखना चाहता है। इस बार तो इसने हद ही कर दी। मैं दनदनाते हुए बाथरूम से निकली और उसे देखे बिना ही अपनी पैंट और पूरी बाजू का टॉप पहनकर बाहर निकल आई। इस समय मुझे कुछ वक्त अकेले बिताना है ताकि अपने गुस्से को काबू में कर सकूं।

“एनेस्टेसिया! उसने पुकारा, क्या तुम ठीक हो?”

मैंने अनसुना कर दिया। “क्या मैं ठीक हूं? जी नहीं, मैं ठीक नहीं हूं।”

उसने मेरे साथ जो भी किया है। उसके बाद तो सवाल ही नहीं पैदा होता कि मैं बाकी बचे हनीमून में वे महंगी बिकनियां पहन सकूंगी। यह सोच कर तो पूरे बदन में आग लग गई। इसकी हिम्मत कैसे हुई? आया बड़ा……मैं भी इसे किसी टीनएजर की तरह पेश आ कर दिखा सकती हूं। मैंने उसके चेहरे पर आए भावों को अनदेखा किया और सीधा एक ब्रश उसकी सीध में दे मारा। उसने बाजू से अपना बचाव किया और मैं केबिन से बाहर निकल गई।

मुझे ठंडी हवा में थोड़ी राहत मिली। हमारी बोट बड़े ही प्यार से आगे बढ़ती जा रही है। एक गहरी सांस लेने के बाद मन शांत होने लगा। मुझे पता है कि वह पीछे आ गया है।

“तुम मुझसे नाराज हो?”

“जी नहीं! ”

“कितनी नाराज हो।”

“अगर एक से दस का पैमाना हो तो मैं पचास तक नाराज हूं।”

“इतना गुस्सा?”

“जी हां। तुम्हारी हरकत ही ऐसी है। तुमने अपनी बात सागर तट पर कह दी थी और मुझे समझ भी आ गया था…”

“हां, तुम आज के बाद अपना टॉप सबके सामने नहीं उतारोगी।”

“मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आया कि तुमने मेरे बदन पर ये निशान छोड़े हैं। ये एक हार्ड लिमिट है।”

“मैं भी पसंद नहीं करता कि तुम लोगों के बीच कपड़े उतारो। मेरे लिए यह एक कठोर सीमा है।” वह गरजा

“मुझे तो लगा था कि हमने इस बारे में पहले बात कर ली थी।”

“ये देखो।” मैंने उसके आगे अपना टॉप उघाड़ दिया। वह मुझे हैरानी से देखने लगा। उसने आज तक मुझे इतने गुस्से में नहीं देखा। क्या उसे दिखता नहीं कि उसने क्या कर दिया है? क्या उसे दिखता नहीं कि मैं कितनी भद्दी दिख रही हूं। मैं उस पर चिल्लाना चाहती हूं पर कुछ नहीं कह सकी। उसने अचानक ही अपने हाथ बचाव की मुद्रा में खड़े कर दिए।

“अच्छा। मैं समझ गया।”

वाह! बन गई बात।

“बढ़िया! ”

उसने अपने बालों में हाथ फिराया। माफ कर दो। मुझसे गुस्सा मत होना। पर अब मामला मेरे हाथ से बाहर है और वह भी इसे जानता है। वह आगे आया और मेरे कानों के पीछे बाल कर दिए।

“तुम कई बार कितनी किशोरों वाली हरकतें कर जाते हो।” मैंने उसे फटकारा।

“मैं जानता हूं। मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है।”

मुझे डॉ. के शब्द याद आ गए। उन्होंने कहा था कि वह अभी किशोर ही है। उसके जीवन में यह अवस्था आई ही नहीं है। वह उसे पार कर आया था। उसने अपनी सारी ऊर्जा काम में खपा दी थी और वह सारी अपेक्षाओं से परे है।

मेरा दिल पिघल सा गया।

“हम दोनों ही तो अभी बच्चे हैं।” मैंने बात संभाली। मैंने अपना हाथ उसकी छाती पर रख दिया। वह पीछे तो नहीं हटा पर हल्का सा चिहुंक गया।

वह हल्का सा शरमा कर बोला, “मैंने अभी-अभी देखा कि तुम्हें बहुत गुस्सा आता है और तुम्हारा निशाना भी जबदरस्त है। तुम तो हमेशा मुझे हैरानी में डाल देती हो।”

मैंने अपनी भौं उठाई, “मैंने रे के साथ निशानेबाजी का अभ्यास किया है। मैं बढ़िया निशानेबाज हूं। मि. ग्रे आपको यह बात याद रखनी चाहिए।”

“मिसेज ग्रे! मैं यह याद रखूंगा और कोशिश करूंगा कि आपके सामने कहीं से भी गन न आ जाए वरना…”

मैंने भी मजा लिया, “मेरे पास साधनों की कमी नहीं है।”

उसने मुझे बांहों में भर लिया और गर्दन पर नाक फिराई। ज्यों ही उसने मुझे छुआ तो उसके शरीर का तनाव घुलता दिखाई दिया।

“क्या माफी मिल गई?”

“क्या मुझे मिली?”

“जी हां”

“तुम्हें भी मिल गई।”

हम एक-दूसरे का हाथ थामे खड़े हो गए। मुझे अपना गुस्सा भूल गया था। उसमें से कितनी प्यारी गंध आती है। इससे दूर रहना कितना मुश्किल है।

“भूख लगी है?”

“हां, जान निकल रही है। पर मुझे तुम्हारे साथ खाने के लिए चलने से पहले कपड़े बदलने होंगे।”

“नहीं एना! यह हमारी बोट है। तुम जैसे जी चाहे कपड़े पहन सकती हो। हम डैक पर खाना खाएंगे।”

“हां, मुझे अच्छा लगेगा।”

उसने मुझे चूमा और हमारे बीच का लगाव पूरे जोर-शोर के साथ लौट आया। बैरे ने हमें क्रीम ब्रूली परोसा और जाने कहां ओझल हो गया। हम आपस में सट कर बैठे हैं और टांगें आपस में खिलवाड़ कर रही हैं।

“तुम हमेशा मेरी चोटी क्यों गूंथ देते हो?”

उसका हाथ चम्मच उठाते हुए थम-सा गया

“मुझे पसंद नहीं कि तुम्हारे बाल किसी चीज में आएं। या यह शायद मेरी आदत हो।”

ओह! उसे क्या याद आ गया। कई बार वह अपने बचपन की दुखदायी यादों में खो जाता है। मैं उसे यह सब याद नहीं दिलाना चाहती। मैंने आगे बढ़ कर उसके होठों पर अपनी अंगुली रख दी।

“नहीं, इससे कोई अंतर नहीं पड़ता। मैं जानना भी नहीं चाहती। बस यूं ही पूछ रही थी।” मैंने उसे राहत और लगाव से भरी गहरी मुस्कान दी। वह पहले तो कुछ चिंतित दिखा पर कुछ ही देर में सहज हो गया। मैं आगे को झुकी और उसके मुंह का कोना चूम लिया।

“मैं तुमसे बेहद प्यार करती हूं।” मैंने हौले से कहा और उसने ऐसी दिलफेंक मुस्कान दी कि मैं वहीं पिघल गई। “मैं तुम्हें हमेशा इसी तरह प्यार करती रहूंगी, क्रिस्टियन”

“मैं भी एना…….”

“मेरी बेअदबी के बावजूद?” मैंने ढ़िठाई दिखाई

“हां एनेस्टेसिया, तुम्हारी बेअदबी के बावजूद”

मैंने अपने मीठे व्यंजन में चम्मच मारा। क्या मैं इस इंसान को कभी जान सकूंगी। हम्म! ये क्रीम ब्रूली तो जबरदस्त बनी है।

जब हमारी मेज समेट दी गई तो मेरे पति ने हमारे जाम फिर से भर दिए। मैंने देखा कि हम अकेले थे। मैंने पूछा, “तुमने मुझे बाथरूम जाने से मना क्यों किया था?”

“क्या तुम सचमुच जानना चाहती हो?” उसके चेहरे पर कौतुक था।

“हां, जानना चाहती हूं।” मैंने अपनी वाइन का एक घूंट भरा।

“तुम्हारा ब्लैडर जितना भरा होगा। चरम सुख भी उतना ही ज्यादा हो जाएगा।”

ओह! इसने तो कुछ ज्यादा ही विस्तार से बता दिया।

वह हमेशा मुझे अपनी जानकारी से चारों खाने चित्त कर देता है। क्या मैं कभी सेक्स विशेषज्ञ की बराबरी कर सकूंगी। मैं लजा गई और बात बदलने का बहाना तलाशने लगी।

उसे ही मुझ पर दया आ गई

“तुम आज शाम क्या करना चाहोगी?”

“क्रिस्टियन! तुम जो भी कहो।”

शायद आज वह कोई और थ्योरी आजमाना चाहेगा।

“मैं जानता हूं कि हमें शाम को क्या करना है। तुम मेरे साथ आओ।” उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया।

वह मुझे मेन सैलून में ले गया। उसका आईपॉड स्पीकर के साथ लगा था। उसने एक धुन लगाई और मेरी ओर हाथ बढ़ा दिया। “मेरे साथ डांस करोेगी।”

“अगर तुम चाहो।”

“मिसेज ग्रे! मैं चाहता हूं।”

अजीब सी धुन थी। कुछ जानी-पहचानी लगी पर मैं पहचान नहीं पाई कोई लैटिन धुन लग रही थी। हम एक साथ नाचने लगे और वह मुझे आगे खींच ले गया।

उसने मुझे अचानक नीचे झुकाया और मेरे मुंह से चीख निकलते ही वापिस खींच लिया। उसकी आंखें मस्ती से नाच रही हैं। फिर उसने मुझे बांहों में उठा कर चक्कर कटवा दिया।

“तुम कितना अच्छा नाचते हो। कभी-कभी तो लगने लगता है कि मुझे भी नाचना आ गया।” मैंने कहा

उसने मुझे दबे होठों की एक मुस्कान दी पर मुंह से कुछ नहीं कहा। मैं सोचने लगी कि कहीं वह मिसेज रॉबिन्सन के बारे में तो नहीं सोच रहा। जिसने उसे नाचना सिखाया था।…और शारीरिक संबंध बनाना भी…! उसने अपने जन्मदिन के बाद से उसके बारे में बात नहीं की है। और जहां तक मुझे पता है। उनका वह नाता टूट गया है पर यह तो मानना ही होगा कि वह बहुत अच्छा सिखाती थी।

उसने मुझे फिर से एक गोता दिलाया और होठों पर मीठा सा चुंबन जड़ दिया।

“मैं तुम्हें दिलोजान से चाहती हूं।” मैंने हौले से कहा

“मैं भी तुम पर फिदा हूं।” उसके शब्दों की चाशनी कानों में रस घोलती चली गई।

गाना खत्म हुआ और मैं नाचते-नाचते बेदम हो गई।

“मेरे साथ बिस्तर पर चलो।” उसने हौले से कहा

मैं जानती हूं कि हमारे बीच सब कुछ सहज है या नहीं। शायद वह इसी पैमाने से इसे मापना जानता है और मुझे इसी बात को मानकर चलना होगा।

जब मैं जगी तो सूरज की किरणें केबिन के भीतर झांक रही थीं। वह कहीं नहीं दिखा। मैंने अंगड़ाई ली और मुस्कुराईं। गुस्से से भरा क्रिस्टियन और अपनी फैैंटैसी के नशे में खोया क्रिस्टियन, मुझे इन दोनों रूपों के साथ ही जीना होगा।

मैं उठ कर बाथरूम की ओर चली। वहां देखा तो वह कमर में तौलिया बांधे शेव कर रहा था। इतना तो मैं जान ही गई हूं कि उसे अपना बाथरूम अंदर से बंद करने की आदत नहीं है। होती भी कैसे, अकेले ही रहता आया है।

“मिसेज ग्रे! गुडमार्निंग….”

“गुडमार्निंग जान! ” मैं उसके पास जा पहुंचीं वह शेव करने लगा और मैं जाने-अनजाने उसकी मुद्राएं ही दोहराने लगी। उसके आधे चेहरे पर अब भी झाग लगी है।

“मजा आ रहा है?” उसने पूछा

“ओह क्रिस्टियन! मैं तो तुम्हें इस तरह घंटों देख सकती हूं यह तो मेरा मनपसंद शगल है।” मैंने हौले से कहा और उसने झाग लगे चेहरे से ही मुझे चूम लिया।

“क्या मैं तुम्हारे साथ फिर से वैसा कर सकता हूं।”

“नहीं, नहीं मैं वैक्स कर लूंगी।” मुझे याद है कि जब हम लंदन में थे तो मैंने एक दिन अपनी जांघों के अंदरूनी हिस्से के बाल शेव कर लिए थे। बेशक यह मैंने उसके स्तर पर आने के लिए तो नहीं किया था..


“ये तुमने किया क्या है?” वह हैरानी से बोला। उसके चेहरे पर हैरानी और कौतुक के मिले-जुले भाव थे। वह ब्राउन होटल के पलंग पर उठ बैठा और साथ वाला लैंप जला दिया। फिर वह खुले मुंह से मुझे देखता ही रह गया। आधी रात का समय था और मुझे अपने चेहरे की लाली छिपाने के लिए चादर से मुंह ढांपना पड़ा। मैंने अपनी पोशाक हाथ में थामकर कहा, “मैंने शेव किया था।”

“वह तो मैं भी देख सकता हूं, पर क्यों।” उसने हैरानी से पूछा

मुझे इतनी शर्म क्यों आ रही है?

“हे।” उसने मेरी आंखों से हाथ हटा दिए। फिर अपने होठों को दांतों से काटने लगा कि उसे हंसी न आए और बोला, “अब बताओ कि ऐसा क्यों किया?” उसे यह बात इतनी मजाकिया क्यों लग रही थी?

“मुझ पर हंसना बंद करो।”

“मैं हंस नहीं रहा। सॉरी! मैं तो बहुत खुश हूं।”

“ओह।”

“ये तो बताओ कि क्यों खुश हो?”

“पहले तुम बताओ कि ये क्यों किया?”

मैंने एक गहरी सांस ली। “इस सुबह जब तुम मीटिंग के लिए गए तो नहाते समय मुझे तुम्हारे सारे नियम याद आ गए। जिनमें से यह भी एक था।”

उसने हैरानी से पलकें झपकाईं।

“और मैं मन ही मन उन पर निशान लगा कर देख रही थी कि मैं कितने नियमों पर खरी उतरी। फिर मुझे ब्यूटी सैलून याद आया और मैंने सोचा कि क्यों न मैं ये काम कर दूं। हालांकि इतनी हिम्मत नहीं हुई कि मैं वैक्स करवा लेती इसलिए मैंने शेव ही कर लिया।”

इस बार उसकी आंखों से हंसी की बजाए स्नेह झर रहा था।

“ओह एना।” उसने आगे झुक कर मुझे चूम लिया।

“मुझे लगता है कि मिसेज ग्रे! हमें आपके काम का निरीक्षण करना चाहिए।” “क्या, नहीं?” मैंने खुद को ढका

“अरे नहीं। एना।” उसने मेरे दोनों हाथ कस कर जकड़ लिए ताकि मैं उनका इस्तेमाल न कर सकूं। फिर उसके होंठ बदन के अलग-अलग हिस्सों को छूते हुए सीधे वहीं जा पहुंचे और मैंने खुद को उसके सहारे छोड़ दिया।

“अरे ये क्या?” उसे किसी जगह कुछ बाल दिखे और उसके दिमाग को नई बात सूझ गई। मैं अभी आया। वह बिस्तर से लपका।

ओह! वह करना क्या चाहता है?

जब वह लौटा तो उसके पास पानी का गिलास, मग, मेरा रेजर, उसका शेविंग ब्रश, साबुन और एक तौलिया था। उसने सारा सामान कोने में रखा और हाथों में तौलिया थामे मुझे ताकने लगा।

“अरे नहीं। मैं झट से आगे बढ़ी और उसे रोकना चाहा।

“नहीं, नहीं, नहीं। मैं चिहुंकी”

“मिसेज ग्रे। मेरी बात मानो”

“क्रिस्टियन! तुम इस हिस्से को शेव नहीं करने जा रहे।”

“मैं ऐसा ही करने जा रहा हूं।”

“तुम नहीं कर सकते।”

“क्यों नहीं कर सकता?”

“ये सब बड़ा अजीब लगता है।”

“इसमें अजीब क्या है?”

“एना! तुम्हारे बदन के इस हिस्से को मैं तुमसे कहीं बेहतर जानता हूं।”

मैं उसे हैरानी से देखती रही। उसने झूठ तो नहीं कहा था।

“ये गलत नहीं है। ये हॉट है और मुझे पता है कि ये तुम्हें बहुत अच्छा लगेगा।”

हॉट? सचमुच?? मैं अपनी हैरानी को दबा नहीं सकी।

“मैं तुम्हारी शेव करना चाहता हूं। तुम अब कुछ नहीं कहोगी।” उसने हौले से कहा

“ओह! ये क्या है।” मैं पीठ के बल लेट गई और चेहरे को हाथों से ढांप लिया ताकि मुझे कुछ दिखाई न दे।

“अगर तुम्हें इससे खुशी मिलती है तो… क्रिस्टियन तुम भी अजीब रसिक हो।”

मैंने हौले से कहा और ऊपर की तरफ उठी। उसने मेरे नीचे तौलिया लगा दिया और जांघों के अंदरूनी हिस्से पर एक चुंबन दिया।

“ओह बेबी! तुम कितनी प्यारी हो।”

मैंने शेविंग के ब्रश के पानी में डूबने का स्वर सुना और फिर उसने मेरी टांगों को परेकर दिया। वह बीच में बैठ गया।

“तुम्हें इस समय बांधना ही ठीक रहता।”

“नहीं, मैं वादा करती हूं कि बिल्कुल नहीं हिलूंगी।”

“बढ़िया”

उसने चमड़ी पर क्रीम से भरा ब्रश लगाया तो पूरे शरीर में सिरहन सी दौड़ गई। ये तोगर्म है। वह गर्म पानी लाया होगा। मैं हल्का सा चिहुंकी तो वह बोला

“लगता है कि बांधना ही होगा”

“नहीं, नहीं! अब ऐसा नहीं होगा”

“क्या तुमने पहले कभी ऐसा किया है।”

“नहीं, पहली बार कर रहा हूं।”

“ओह! तो यह भी एक फर्स्ट रहा।”

“हां, मेरे लिए भी पहली बार है।” उसने बड़ी ही कोमलता से मेरी त्वचा पर रेजर चला दिया और इसके बाद बड़े ही ध्यान से अपने काम में जुट गया। बीच में एक बार आवाज सुनाई दी। “हिलो मत।” मैं समझ गई कि कितनी एकाग्रता से काम कर रहा था और काम के बीच में बाधा उसे पसंद नहीं थी।

“ये लो हो भी गया।”

ये क्या! इतनी जल्दी?

वह आराम से बैठ कर अपने काम को देखने लगा।

“खुश हो?” मैंने हौले से पूछा

“हां?” उसने कहा और…


“पर उस दिन मजा बड़ा आया था।” उसकी आंखों में शरारत नाच रही थी

तुम्हें ही आया होगा। मैंने मुंह फुलाया। पर वह सही कह रहा था। वह सब बहुत कामोत्तेजक था। मैं तो सोच भी नहीं सकती थी कि केवल उस जगह के बाल हटा देने से ही इतना अंतर आ सकता है।

“हे! जो पति अपनी पत्नियों से प्यार करते हैं। वे अक्सर ऐसा करते हैं।” क्रिस्टियन ने मेरी चिबुक थाम कर कहा और मेरे चेहरे के भाव पढ़ने लगा।

“हम्म…बदला चुकाने का वक्त हो गया”

“बैठो! ” मैंने धीरे से कहा

वह कुछ समझे बिना, ताकने लगा। मैंने उसे वहां रखे स्टूल पर बिठा दिया। वह हैरानी से देखता रहा और मैंने रेजर उसके हाथ से ले लिया।

“एना! उसने मेरी मंशा भांप कर मुझे चेतावनी देनी चाही। मैंने आगे झुककर उसे चूम लिया।

“सिर पीछे ।” मैंने धीरे से कहा

वह हिचका

“मि. ग्रे! अदले का बदला! ”

वह मुझे बड़ी ही हैरानी और अविश्वास से देखता रहा।

“तुम जानती हो कि तुम क्या कर रही हो।” उसने धीरे से कहा और मैंने अपनी गर्दन हिला दी। मैं गंभीर दिखने की कोशिश कर रही थी। उसने आंखें बंद कर गर्दन हिलाई और फिर मेरे आगे हथियार डाल दिए।

हाय! वह मुझे अपनी शेव करने दे रहा है। मुझसे कोई कट लग गया तो? मैंने उसके माथे पर आए बाल थाम लिए ताकि उसे स्थिर रख सकूं। उसने कस कर आंखें बंद कीं और होंठ खोल कर सांस लेने लगा। मैंने हौले से रेजर को उसकी गर्दन से चिबुक तक ले जाते हुए रास्ता सा बना दिया। क्रिस्टियन ने सांस छोड़ी।

“क्या तुम्हें लगा कि मैं तुम्हें चोट पहुंचाने जा रही थी।”

“एना! मैं कभी नहीं जानता कि तुम क्या करने जा रही हो पर ये तो तय है कि तुम कभी जान कर मुझे चोट नहीं पहुंचाओगी।”

मैंने उसकी गर्दन पर एक बार फिर से रेजर चलाया और उसने आंखें खोल कर मेरी कमर के आसपास बांहों का घेरा डाल दिया।।

उसने गर्दन घुमा दी ताकि मैं गाल का बाकी हिस्सा भी शेव कर सकूं।

“देखा! सारा काम हो गया और कोई कट भी नहीं आया।” उसने मेरी नाइट ड्रेस को इतना ऊंचा किया कि मैं उसकी गोद में आ गई। मैंने अपने हाथ उसके बाजुओं के ऊपरी हिस्से पर टिका दिए। उसका बदन वाकई गठीला है।

“क्या मैं आज तुम्हें कहीं ले जा सकता हूं?”

“सनबाथ के लिए नहीं?” मैंने भौं नचाई।

“नहीं, कहीं और जाना है।”

“ये थोड़ी दूर है पर जाने वाली जगह है। यह पहाड़ी पर बसा छोटा सा गांव है। सेंट पॉल डि वेंस! वहां कुछ गैलरियां हैं। मैंने सोचा कि हम अपने नए घर के लिए कुछ चित्र और मूर्तियां ले सकते हैं।” “हैं! पर मैं तो कला के बारे में कुछ नहीं जानती। मैं आर्ट कैसे खरीद सकती हूं?”

“क्या ?” उसने कहा

“क्रिस्टियन! मैं तो कला के बारे कुछ नहीं जानती।”

“मैं भी कौन सा निवेश करने जा रहा हूं। बस जो अच्छा लगेगा। खरीद लेंगे।”

मैंने अपनी गर्दन हिलाई। कला निवेश के लिए भी खरीदी जाती है। मेरे लिए ये सब कितना नया है।

“देखो! इसके अलावा ये एक पुराना मध्ययुगीन शहर है इसलिए भी तुम्हें पसंद आएगा।”

अच्छा। वहां की वास्तुकला…तभी मुझे एस्पेन में उसकी दोस्त जिआ की याद आ गई। हमारी हर मुलाकात में वह क्रिस्टियन को किस तरह घेरे हुए थी।

“क्या हुआ?” क्रिस्टियन ने पूछा

मैं उसे कैसे बताती कि मैं क्या सोच रही थी। मैं नहीं चाहती कि मैं उसके सामने किसी ईर्ष्यालु बीबी की तरह पेश आऊं।

“तुम अब कल वाली बात से नाराज तो नहीं हो न?” उसने मेरी छातियों के बीच अंगुली फिराई।

“नहीं, मुझे भूख लगी है।” मैंने जानबूझ कर ऐसा कहा क्योंकि मैं जानती थी कि इस तरह आराम से उसका ध्यान बंटाया जा सकता है।

“पहले क्यों नहीं कहा?” उसने मुझे गोद से उतारा और खड़ा हो गया।

सेंट पॉल डि वेंस एक छोटा सा पहाड़ी गांव है। मैंने आज तक ऐसी प्राकृतिक सुंदरता नहीं देखी। मैं अपने पति की बांहों में बांहें डाले भीड़ के बीच डोल रही हूं और मेरे लिए ये दुनिया की सबसे सुरक्षित और आरामदेह जगह है। टेलर और उसका साथी हमारे पीछे हैं। यहां देखने के लिए कितना कुछ है। छोटे गलियारे और गलियां। पत्थरों की नक्काशी से सजे फव्वारे, प्राचीन व आधुनिक मूर्तियां, नन्ही दुकानें व शोरूम।

पहली गैलरी में क्रिस्टियन हमारे आगे सजी कामोत्तेजक तस्वीरों के सामने खड़ा हो गया। किसी नग्न युवती के चित्र लिए गए थे। फ्लोरेंस डेल ने उन्हें बहुत खूबसूरती से पेश किया था।

“नहीं मैं ऐसा कुछ नहीं चाहती।” उन्हें देखते ही मुझे उसकी अलमारी में रखे वे चित्र याद आ गए। पता नहीं उसने हटाए या नहीं।

“मैं भी नहीं लेना चाहता।” मैं सोचने लगी कि क्या वह मेरी भी वैसी तस्वीरें लेना चाहेगा।

इसके बाद एक और पेंटर के चित्र आए जिसमें बहुत ही सुंदर रूप से फल और सब्जियां चित्रित थे। मैंने तीन मिर्च वाली पेंटिंग की ओर संकेत किया। “इसे देख कर मुझे वह दिन याद आ रहा है। जब तुमने मेरे अपार्टमेंट में शिमला मिर्च काटी थी।”

“हां, काम आसान नहीं था। वैसे भी तुम मेरा ध्यान बंटा रही थीं।” उसने कौतुक से कहा। “वैसे तुम इन्हें कहां लगाना चाहोगी?”

“किचन”

“हम्म बढ़िया। मिसेज ग्रे”

मैंने दाम पढ़े। पांच हजार यूरो। जीसस!

“ये तो बहुत महंगे हैं। मैंने कहा

“तो। एना तुम्हें इसका आदी होना होगा।” वह मुझे डेस्क पर ले गया। जहां बैठी महिला क्रिस्टियन को आंखों ही आंखों में पीने लगी। मैं आंखें नचाना चाहती थी पर फिर से चित्र देखने लगी। पांच हजार यूरो! हद हो गई!!!!

हमने कॉफी ली और ली सेंट पॉल के आरामदायक वातावरण में सुस्ताने लगे। आसपास का माहौल बड़ा प्यारा है। होटल के अंदर से ही बाहर लगी अंगूर की बेलें और सूरज मुखी के फूल देखे जा सकते हैं। ये फ्रेंच फार्महाउस वाकई बहुत प्यारे हैं। मैं तो जैसे इस सुंदरता में खो ही गई थी। अचानक क्रिस्टियन की बात से मेरी तंद्रा भंग हुई।

“तुमने पूछा था कि मैं बार-बार तुम्हारी चोटी क्यों गूंथ देता हूं।”

उसके सुर में अपराधबोध की गंध थी। मैं एकदम चौकन्नी हो गई।

“हां। ओह शिट! ”

“वह कमीनी औरत मुझे अपने बालों के साथ खेलने देती थी। शायद यह कोई सपना है या मेरी याद, मैं नहीं जानता।”

“ओह! उसे जन्म देने वाली मां”

उसने मुझे ऐसी नजरों से देखा, जिनसे कोई भी अनुमान लगा पाना कठिन था। मेरा कलेजा उछल कर मुंह को आ गया। जब वह ऐसी बातें कहे तो मैं क्या कह सकती हूं।

“जब तुम मेरे बालों से खेलते हो तो मुझे अच्छा लगता है।” मैंने हिचकते हुए कहा

उसने मुझे हैरानी से देखा। “क्या सचमुच?”

“हां। ये सच है। क्रिस्टियन! मुझे तो लगता है कि तुम अपनी मां को चाहते हो।” उसकी आंखें विस्फारित हुईं और वह चुपचाप मुझे ताकता रहा।

हाय! कहीं मैं ज्यादा तो नहीं बोल गई। फिफ्टी! ऐसे चुप मत रहो। कुछ तो बोलो।

वह कहीं खोया था। मैंने अपना हाथ उसके हाथ पर रखा तो वह उसे भी घूरकर देखने लगा।

“कुछ तो बोलो।” मैंने हौले से कहा क्योंकि मैं जानती थी कि ऐसी चुप्पी को झेल पाना मेरे बस के बाहर था।

उसने गहरी सांस भरते हुए, अपना सिर हिलाया।

“चलो, चलते हैं।” उसने मेरा हाथ थामा और खड़ा हो गया। क्या मैं अपनी हद लांघ गई हूं। मुझे अंदाजा नहीं हो पा रहा। मेरा दिल डूब गया। समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहूं। मैंने तय किया कि इन हालात में चुप रहना ही ठीक होगा।

उसने एक संकरी-सी गली में मेरा हाथ थाम कर कहा

“कहां जाना चाहोगी?”

वह बोला। इसका मतलब है कि मुझसे नाराज नहीं है। शुक्र है! मेरी तो जान में जान आ गई।

“तुम जानती हो कि मैं इन बातों को दोहराना नहीं चाहता। वह सब अब खत्म हो गया।”

नहीं क्रिस्टियन, अभी सब खत्म नहीं हुआ है। यह सोच मुझे उदास कर गई। पहली बार मुझे लगा कि वह सब कभी खत्म होगा भी या सारी जिंदगी साए की तरह हमसे चिपका रहेगा? वह तो हमेशा फिफ्टी शेड्स रहेगा। मेरा फिफ्टी शेड्स! क्या मैं उसे बदलना चाहती हूं? नहीं, बस मैं इतना चाहती हूं कि वह मेरे प्यार को महसूस करे। मैंने ज़रा-सा झांक कर उसकी खूबसूरती का एक घूंट भरा…वह मेरा है। ऐसा नहीं कि मैं उसके चेहरे या बदन की सुंदरता की दीवानी हूं। इस संपूर्णता के पीछे…उसकी बिखरी व नाजुक सी आत्मा मुझे पुकारती है।

उसने मुझे अपनी वही मदहोश कर देने वाली मीठी और सेक्सी सी मुस्कान के साथ अपनी बांह के घेरे में लिया और वहां चल दिया, जहां हमारी बड़ी-सी मर्सीडीज खड़ी थी। मैंने अपना हाथ उसके शॉर्टस की पिछली जेब में डाल दिया। चलो जान बची, ये नाराज तो नहीं है। पर सच्ची, ऐसा कौन-सा चार साल का बच्चा होगा जो अपनी मां को नहीं चाहता, भले ही वह कितनी भी बुरी क्यों न हो। मैंने आह भरी और उसे कसकर अपने से सटा लिया। मैं जानती हूं कि हमारा सुरक्षा दल पीछे ही है और अचानक ही मन में आया कि उन लोगों ने कुछ खाया या नहीं?

क्रिस्टियन एक छोटी सी दुकान के आगे ठिठक गया। जहां बहुत ही आलीशान आभूषण बिक रहे थे। उसने मेरा हाथ थाम कर कलाई पर बने निशान पर अपना अंगूठा फिराया।

“ये सूजा नहीं है।” मैंने उसे तसल्ली दी। वह मुड़ा जिससे मेरा हाथ उसकी जेब से बाहर आ गया। उसने दूसरी कलाई को भी देखा। उसने मुझ लंदन में सुबह नाश्ते के दौरान जो प्लेटिनम ओमेगा भेंट में दी थी। वह उस हाथ पर बंधी है। उस पर अंकित शब्द पढ़ कर मैं तो दीवानी हो जाती हूं।

एनेस्टेसिया, तुम ही मेरे लिए सब कुछ हो

मेरा प्यार, मेरी जिंदगी हो

क्रिस्टियन

अपनी सारी फिफ्टीनेस के बावजूद, मेरा पति इतना रोमानी भी हो सकता है। मैंने अपनी कलाई पर धुंधले पड़ गए निशानों को देखा। उसने अपनी अंगुलियों से मेरी चिबुक उठा कर, आंखों में झांका।

“इनमें दर्द नहीं है।” मैंने अपनी बात दोहराई। उसने मेरी कलाई पर माफी मांगने की मुद्रा में चुंबन जड़ दिया।

“आओ।” वह मुझे दुकान में ले गया।

“ये लो।” उसने मेरे सामने प्लेटीनम का ब्रेसलेट रख दिया। जो उसने हाल में लिया था। बहुत ही सुंदर कारीगरी के साथ हीरों से बने फूल और दिल मन मोह रहे थे। उसने उसे झट से मेरी कलाई में पहना दिया। वह इतना चौड़ा था कि उससे सारे निशान छिप गए। यह तीस हजार यूरो का है। हालांकि उनकी आपसी बात समझ नहीं आ रही थी पर इतना तो तय था कि मैंने कभी इतना महंगा उपहार नहीं लिया था।

“वाह, बहुत खूब!

“मुझे इसकी जरूरत नहीं है।

“पर मुझे तो है।

“क्यों?” उसे यह सब करने की क्या जरूरत है? क्या उसे अपराधबोध हो रहा है? किसलिए? उन निशानों के लिए? उसकी मां के नाम पर? मुझ पर भरोसा न होने पर? ओह फिफ्टी!

“नहीं, क्रिस्टियन, तुम्हें इसकी आवश्यकता नहीं है। तुम पहले ही मुझे बहुत कुछ दे चुके हो। एक जादुई हनीमून, लंदन, पेरिस, कोट डिएज्योर……और तुम। मैं कितनी किस्मत वाली हूं।” मैंने हौले से कहा और उसकी आंखें मुलायम हो उठीं।

“नहीं एनेस्टेसिया! मैं बहुत किस्मत वाला हूं।”

“थैंक्स! ” मैं पंजों के बल उचकी और उसके गले में बांहें घाल चूम लिया……मुझे उपहार देने के लिए नहीं, मेरा बनने के लिए!

कार में बैठने के बाद वह पहले तो बाहर देखता रहा और फिर दोपहर की धूप का आनंद लेने लगा। कार में गेस्टन और टेलर भी हैं। मेरा पति जाने किस उधेड़बुन में था। मैंने उसका हाथ थामकर दबा दिया। उसने मेरा हाथ छोड़ने से पहले मुझे ताका और फिर घुटना दबा दिया। मैंने एक नीले रंग के टॉप के साथ सफेद स्कर्ट पहन रखी है। उसका हाथ पल भर के लिए थमा और पता नहीं क्यों,मुझे लगा कि वह अपना हाथ ऊपर की ओर लाएगा। मैं इस बारे में सोचकर ही परेशान हो गई क्योंकि हम कार में अकेले नहीं थे। उसने अचानक ही मेरा टखना पकड़ा और पैर को गोद में धर लिया।

“मुझे दूसरा पैर भी दो।” मैंने घबराहट से गेस्टन और टेलर को देखा। वे दोनों बिल्कुल आगे गर्दन तान कर बैठे थे। क्रिस्टियन ने हमारी सीट के आगे पतला सा पर्दा तान दिया। एक बटन दबाते ही हमें एकांत मिल गया और वाह! वहां तो काफी जगह थी। मैंने बड़े ही आराम से अपने दोनों पांव उसकी गोद में धर दिए। मैं तुम्हारे टखने देखना चाहता हूं। वह उन निशानों को ले कर बहुत परेशान है। ओह! मुझे तो लगा था कि बात खत्म हो गई होगी। अब तो निशान नहीं रहे और अगर हैं भी तो वे सैंडिल में छिपे हुए हैं। उसने अचानक ही अंगूठे से गुदगदी की और मुझे हंसी आने लगी। फिर उसने सैंडिल उतारकर उन लाल निशानों पर अपना हाथ फिराया।

“दर्द नहीं होता।” मैंने हौले से कहा। उसने मुझे देखा और उसके चेहरे पर दर्द की हल्की रेखाएं दिखीं। वह फिर से बाहर देखने लगा।

“आखिर बात क्या है। तुम चाहते क्या हो?”

“मैं तुम्हारे पैरों पर ये निशान तो कभी नहीं देखना चाहता था।”

“तुम्हें इन्हें देखकर कैसा लग रहा है?”

“बहुत बेचैनी हो रही है।”

“ओह नहीं।” मैंने अपनी सीट बेल्ट खोली और उसके पास खिसक गई। अगर गाड़ी में गेस्टन और टेलर न होते तो बेशक मैं उसकी गोद में जा बैठती।

मैंने पास जाकर उसके दोनों हाथ थाम लिए।

“मुझे अपनी त्वचा पर वे निशान पसंद नहीं आए थे। इसके सिवा कुछ भी ऐसा नहीं…..। मुझे हथकड़ी भी पसंद आईं। ये सब जबदरस्त था। तुम कभी भी इसे दोहरा सकते हो।” मैंने हौले से कहा

“क्या तुम्हें सचमुच ये सब कमाल लगा?” भीतर बैठी लड़की दमक उठी।

“हां! ” मैंने खीसें निपोरीं। फिर मैंने देखा कि उसके चेहरे व शरीर के हावभाव बदलने लगे। सांसें उथली होने लगीं।

“मिसेज ग्रे! तुम्हें अपनी सीट बेल्ट लगा लेनी चाहिए।” उसने मेरे टखनों पर एक बार फिर से हाथ फिराया। ओह! वह चाहता क्या है। मैं आगे बढ़ूं या पीछे हट जाऊं। एक तो इसे समझना भी कुछ ज्यादा ही मुश्किल है। अचानक ही उसने जेब से ब्लैकबैरी निकाला। साथ ही घड़ी पर नजर टिकी थी। माथे की रेखाएं गहरा गईं।

“बार्नी”

ओह! ये काम फिर आड़े आ गया। मैंने पांव हटाने चाहे तो उसने फिर से मेरे टखने जकड़ लिए।

“सर्वर रूम में?” उसने हैरानी से कहा। क्या इससे आग बुझाने का तंत्र चालू हुआ था?

“आग! ” मैंने झटके से पैर हटा लिए। इस बार तो उसने भी नहीं रोका। मैं पीछे खिसकी और सीट बेल्ट लगाकर बैठ गई। फिर मैं बेचैनी से तीस हजार यूरो के ब्रेसलेट से खेलने लगी। क्रिस्टियन ने हमारी गोपनीयता के लिए लगा पर्दा भी हटा दिया।

“किसी को चोट तो नहीं आई? कोई नुकसान…? अच्छा……कब?” उसने फिर से घड़ी देखी और बालों में हाथ फिराया।

“नहीं, अग्नि विभाग या पुलिस भी नहीं? अभी तक नहीं?”

“आग? उसके ऑफिस में?” मैंने उसे देखा और दिमाग चलाने लगी। टेलर भी पीछे घूम गया ताकि आराम से बात सुन सके।

“अच्छा? बढ़िया, ठीक है। मुझे नुकसान की सारी रिपोर्ट विस्तार से चाहिए। साफ-सफाई कर्मचारियों सहित, पिछले पांच दिन में वहां कौन-कौन आया। यह ब्यौरा भी देना। एंड्रिया से कहो कि मुझे फोन करे… लगता है कि आरसन अब भी शांत नहीं हुआ । नुकसान की रिपोर्ट? कुछ समझ नहीं आ रहा।”

“मुझे दो घंटे में मेल करो। सारी जानकारी चाहिए। फोन करने के लिए थैंक्स! ” फिर उसने झट से फोन में एक दूसरा नंबर मिलाया।

“वेल्क……अच्छा…कब? उसने फिर से घड़ी देखी। एक घंटा…ऑफिस डाटा स्टोर में टवेंटी फोर सैवन……अच्छा।” उसने फोन बंद कर दिया।

“फिलिप! मुझे एक घंटे में ऑनबोर्ड होना है।”

“जी, हुजूर”

“ओह! ये तो गेस्टन नहीं फिलिप निकला। कार आगे की ओर बढ़ी।

“किसी को चोट तो नहीं आई?”

“नहीं, कोई खास नुकसान नहीं।” उसने मेरा हाथ दबा कर तसल्ली दी। इस बारे में चिंता मत करो। “मेरी टीम सब संभाल लेगी।” और यहां ये सीईओ कितने आराम से है मानो कुछ हुआ ही न हो।

“आग कहां लगी?”

“सर्वर रूम में।”

“ग्रे हाउस?”

“हां”

उसके तीखे जवाब सुन कर लगा कि वह इस बारे में बात नहीं करना चाहता।

“नुकसान ज्यादा क्यों नहीं हुआ?”

“आग बुझाने का यंत्र चालू हो गया था”

“बेशक”

“एना, प्लीज! चिंता मत करो।”

“मैं चिंता नहीं कर रही।” मैंने झूठ बोला

“हम कह नहीं सकते कि वह आरसन ही था।” मेरा कलेजा तेजी से धड़क रहा है। पहले चार्ली टैंगो और फिर ये?

इसके बाद क्या होने वाला है?