fifty shades freed novel in Hindi: “क्या तुम अभी?” मेरा दिल हिचकोले खाने लगा
इसने ये कपड़े क्यों पहने हैं? यह जींस तो वह तभी पहनता है जब…, वह चाहता क्या है? यह तो मुझसे नाराज था।
“हां! मैं जाना चाहता हूं।” वह अपने सुर में मिठास लाते हुए मेरे निकट आ गया। यह किस मूड में है। यह मुझसे नाराज है, गुस्सा है, खुश है या सेक्स के मूड में है। ओह! इसके बारे में पता लगाना तो बहुत मुश्किल है।
“मुझे तुम्हारी यह जींस पसंद है।” उसने खीसें निपोरीं पर उसकी ये मुस्कान आंखों तक नहीं आई। इसका मतलब है कि यह अब भी नाराज है। उसने मेरा ध्यान भटकाने के लिए इन्हें पहना है। वह मेरे आगे खड़ा है और मैं उसकी निगाहों की ताब नहीं ला पा रही। उसने मुझे घूर कर देखा और मैंने थूक गटक ली।
“मिसेज ग्रे! मैं समझता हूं कि आप भी कुछ कहना चाहती हैं।” उसने कहा और अपनी जेब से एक कागज निकाला। यह क्या है! ओह, यह तो मेरे ई-मेल की कॉपी थी।
“हां! मैं तुमसे बात करना चाहती हूं।” जब तक मैं अपनी बात कहते हुए पीछे हटी। उसने अपनी नाक मेरी नाक से सहलानी शुरू कर दी। मैं अचानक ही इस स्पर्श से अचकचा गई।
“मैं भी बात करना चाहता हूं।”
“क्रिस्टियन! मैं जानती हूं कि तुम मुझसे क्या बात करना चाहते हो।” मेरी बात सुन कर उसने अपनी आंखें ऐसे सिकोड़ी कि वे पल भर के लिए चमक उठीं।
क्या हम लड़ने जा रहे हैं। मैंने सावधानी के साथ एक कदम पीछे हटा लिया। मैं उसकी गंध, उसकी छुअन, उसकी नजर और हॉट जींस से दूर हो जाना चाहती हूं।
“तुम न्यूयार्क से उस रात क्यों आए? मुझे अभी जानना है।”
“तुम जानती हो कि मैंने ऐसा क्यों किया?” उसके सुर में चेतावनी थी।
“क्योंकि मैं केट के साथ गई थी।”
“क्योंकि तुम अपने वादे से मुकर गई। तुमने मुझे धोखा दिया। तुमने अपने-आप को अनावश्यक खतरे में डाला।”
“मैं वादे से मुकर गई। तो तुम इस बात को इस रूप में लेते हो।”
“हां।”
“ओह! क्रिस्टियन, मैं एक औरत हूं और औरतें अक्सर ऐसा करती ही हैं।”
उसने मुझे देख कर पलकें झपकाईं मानो उसे मेरी बात समझ ही न आ रही हो।
“काश, मैंने यह सोचा होता कि तुम अपना…।” मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मैं उससे क्या कहूं। मैं उससे कहना चाहती थी कि मैंने कभी यह वादा नहीं किया था कि उसकी हर बात मानूंगी। पर मुझे खुशी है कि वह सही-सलामत वापिस आ गया।
“तुमने अपना मन बदल लिया?”
“हां”
“और मुझे बताना भी ठीक नहीं समझा। तुमने यहां की सिक्योरिटी भी कम कर दी और रेयॉन खतरे में पड़ गया।”
“ओह नहीं! मैंने तो इस बारे में सोचा तक नहीं था।”
“मुझे फोन करना चाहिए था पर मैं तुम्हें चिता में नहीं डालना चाहती थी। अगर मैंने फोन किया होता तो तुम मना कर देते और मैं केट के साथ कुछ समय न बिता पाती। वैसे भी मेरे यहां न होने के कारण ही रेयान ने उसे अंदर आने दिया। ये बातें कितने उलझाव से भरी हैं”
क्रिस्टियन ने अपनी आंखें ऐसे भींच लीं मानो बहुत तकलीफ में है। इससे पहले कि मैं जान पाती। वह मुझे बांहों में भर कर भींच रहा था।
“ओह एना! मुझे खुल कर सांस भी नहीं आ रही थी। अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो…।”
“ऐसा कुछ नहीं हुआ।”
“पर ऐसा हो सकता था। क्या हो सकता था… यह सोच कर ही मैं हजारों मौतें मर चुका हूं। मुझे बहुत गुस्सा आया था। मैं तुमसे, अपने-आप से और बाकी सबसे नाराज था। याद नहीं आता कि जिंदगी में पहले कभी इतना गुस्सा आया होगा। हां, एक बार आया था..”
“कब?”
“जब लीला तुम्हारे घर में घुस गई थी।”
“ओह! मैं तो उस बात के बारे में सोचना भी नहीं चाहती।”
“आज सुबह तुम कितनी रुखाई से पेश आए।” मुझे याद आ गया कि सुबह बाथरूम में। वह मुझसे कैसे पेश आया था। उसने अचानक ही अपनी पकड़ ढीली कर दी।
“मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अपने गुस्से का क्या करूं। मुझे नहीं लगता कि मैं तुम्हें चोट पहुंचाना चाहता हूं पर आज सुबह तुम्हें सजा देना चाहता था। मुझे डर था कि मैं कहीं तुम्हें चोट न पहुंचा दूं।”
“तुम्हें इस बात की चिंता हो रही थी?” ओह! मन को सुकून आ गया। मुझे तो यह डर था कि अब वह मुझसे प्यार नहीं करता।
“मुझे अपने पर भरोसा नहीं है।”
“क्रिस्टियन! मैं जानती हूं कि तुम मुझे कभी चोट नहीं पहुंचा सकते। किसी भी तरह से नहीं…।”
“क्या तुम्हें ऐसा लगता है।”
“हां, मुझे पता है कि बस तुम धमकी दे रहे थे।”
“नहीं, मैं तुम्हें मारना चाहता था।”
“नहीं! तुम नहीं मारना चाहते थे। तुमने केवल ऐसा सोचा था।”
“मैं नहीं जानता कि सच क्या है।”
“जरा सोचो! जब मैं छोड़ कर चली गई थी तो तुम्हें कितना दुख हुआ था। मैं जानती हूं कि तुम मेरे लिए कितने दुखी हुए थे। जरा सोचो कि हनीमून के दौरान मेरे हाथ पर हथकड़ियों के निशान देख कर तुम्हें कैसा लगा था।”
वह मेरी बात गौर से सुन रह था। मैंने उसका आलिंगन करते हुए, शरीर की गठी मांसपेशियों को अपने हाथों से महसूस किया।
क्या उसे यह चिंता थी कि वह कहीं मुझे चोट न पहुंचा दे। उसे अपने पर इतना भरोसा नहीं है, जितना भरोसा, मैं उस पर करती हूं। मुझे तो लगा था कि हम आगे निकल आए हैं पर अभी ऐसा नहीं है। आमतौर पर वह कितना ताकतवर दिखता है पर अंदर से….मेरा फिफ्टी….मेरा फिफ्टी! उसने मुझे आंखों, होठों और गालों पर चूमना शुरू कर दिया और मैं इस समय उसके इन चुंबनों के सिवा कुछ नहीं चाहती।
“तुम मुझ पर इतना भरोसा करती हो?” उसने चूमते हुए कहा
“हां, इससे भी ज्यादा।”
ओह! मेरा पति अपनी अंधेरी गलियों से लौट आया है।
हम एक-दूसरे की बांहों में बंधे, कमरे के बीचों-बीच खड़े हैं।
“मेरे साथ बिस्तर पर चलो।”
“क्रिस्टियन! हमें बात करनी है।”
“बाद में होगी।”
“क्रिस्टियन प्लीज! मुझसे बात करो।”
उसने आह भरी, “किस बारे में?”
“मैं तुम्हारी सुरक्षा चाहता हूं।”
“मैं कोई बच्ची नहीं हूं।”
“मिसेज ग्रे! मैं जानता हूं।” उसने मेरे नितंबों को अपने हाथों से थाम लिया।
“क्रिस्टियन! मैं बात करना चाहती हूं।”
“तुम क्या जानना चाहती हो।”
“मुझे बहुत कुछ जानना है।”
वह मुझे काउच पर ले गया। “बैठो! ”
उसने मुझे हुक्म दिया। मैंने माना और बैठ गई। अब उसने अपना सिर दोनों हाथों में थाम लिया है।
“बोलो, क्या कहना चाहती हो।”
“तुमने परिवार को अतिरिक्त सुरक्षा क्यों दी?”
“उन्हें हाइड से खतरा था।”
“तुम्हें कैसे पता चला?”
“उसके कंप्यूटर से पता चला। उसमें मेरे और मेरे परिवार के बारे में सूचना थी। कैरिक के बारे में भी थी।”
“उनके बारे में क्यों?”
“अभी नहीं जानता।”
“क्रिस्टियन! तुम्हें समझना मुश्किल है।”
“क्यों?”
“जब पहले ये बात पता चली थी तो तब सुरक्षा नहीं बढ़ाई पर अचानक ये सब क्यों?”
“मैं नहीं जानता कि वह इंसान क्या कर सकता है। उसके हमले से बचाव के लिए ऐसा किया गया। हो सकता है कि वह मेरे घर को आग लगा देता या…मेरे परिवार में सभी लोग सार्वजनिक सुर्खियों में रहते हैं।”
“तुम क्या कह रहे थे। घर को आग लगा देता या…”
“तुम्हें भूख लगी होगी?”
“क्या?” उसने कहा और मेरे पेट में गुड़गुड़ होने लगी।
“क्या आज कुछ खाया?”
मैं लज्जित हो गई।
“मुझे पता था कि तुमने नहीं खाया होगा।”
“तुम जानती हो कि तुम ऐसा करती हो तो मुझे कैसा लगता है। चलो। मैं तुम्हें खिलाता हूं।” इस बार उसके सुर का नशा मुझसे छिप नहीं सका।
“मुझे खिलाओ।” मैंने भी उसी सुर में जवाब दिया।
ये सब क्या है। क्या मैं सब कुछ भुला कर वही करना चाहती हूं। जो वह करना चाह रहा था।
“बैठो।” उसने कहा।
“मिसेज जोंस कहां हैं?”
“मैंने उन्हें और टेलर को आज रात की छुट्टी दी है।”
ओह
“क्यों?”
उसने मुझे हैरानी से देखा, “क्योंकि मैं ऐसा कर सकता हूं।”
“तो तुम खाना पकाने जा रहे हो।”
“मिसेज ग्रे! भरोसा करना सीखिए।”
उसने मेरी आंखें बंद करवा दीं।
“क्या तुम मेरी आंखों पर पट्टी बांधने जा रहे हो।”
“जी हां”
ओह मेरा कलेजा उछल कर बाहर आने को हो गया।
“क्या अभी ये सब कर रहे हो?”
“बोलना बंद करो। पहले मैं तुम्हें कुछ खिलाना चाहता हूं।”
“क्या हम पहले बात कर लें।”
“मिसेज ग्रे! इतनी अधीरता क्यों। पहले खाना जरूरी है।”
अच्छा! चलो यही सही। मैंने अपने-आप को उसके हवाले छोड़ दिया और आवाजों से अंदाजा लगाने लगी कि वह कमरे में घूम रहा है। उसने टोस्टर ऑन किया।
चारों ओर मसालों की खुशबू फैल गई।
“एनेस्टेसिया! सलीके से पेश आओ। अपनी जगह से हिलना भी मत! ”
“अपने होंठ भी मत काटो। मेरे चेहरे पर न चाहते हुए भी मुस्कान आ गई।
इसके बाद मैंने आवाज सुनी कि वह गिलासों में वाइन भर रहा था। फिर उसने कोई संगीत चालू कर दिया। जिसमें से गिटार की धुन, पूरे कमरे में तैरने लगी।
“पहले कुछ पी लो। अपना सिर पीछे करो।” उसने कहा
उसके होंठ मेरे होठों से आ मिले। ओह। ठंडी वाइन मेरे गले से नीचे उतरती चली गई। ये उसने कौन सा अंदाज खोज निकाला है।
अचानक ही मुझे वह समय याद आ गया जब मैं उसके साथ वैंकूवर में थी और उसने तब भी यही अदा दिखाई। खैर! वक्त भी कितनी तेजी से बदलता है।
“हम्म!” मैंने तारीफ की।
“तुम्हें अच्छी लगी।” उसने बहुत ही मादक सुर में कहा
“तो और पी सकती हो।”
इसके बाद उसके होठों से मेरे लिए एक और घूंट आ गया।
“और?”
“हां मि. ग्रे! आपके साथ मुझे हमेशा और चाहिए होता है।”
“क्या आप फ्लर्ट कर रही हैं?”
“हां।”
अचानक उसने एक और सिप दिया तो उसकी शादी की अंगूठी गिलास से टकरा कर खनकी। इस बार उसने मुझे अपनी गोद में खींच लिया। एक और चुंबन और ठंडी वाइन मेरे गले से भीतर थी।
“भूख लगी है?”
“मि. ग्रे! मैं बता चुकी हूं।”
तभी माइक्रोवेव का स्वर सुनाई दिया और मुझे लहसुन, पुदीने, रोजमैरी और लैंब की गंध आई।
ओह!
“तुम ठीक तो हो”
“हां।” वह एक ही पल में मेरे साथ था।
“मेरी अंगुली जल गई। शायद तुम इसे बेहतर तरीके से चूस सकती हो।”
मैंने उसकी अंगुली को मुंह में लिया और हौले-हौले चूसने लगी। उसने अचानक सांस लेना बंद कर दिया। फिर उसने गहरी सांस ली और उसके इस सुर ने मेरे भीतर तक अपना जादू दिखा दिया। वह हमेशा की तरह बहुत ही स्वादिष्ट है और मैं समझ सकती हूं कि यह उसका खेल है। वह अपनी बीबी के साथ खेल रहा है मेरा यह पति बहुत ही उलझन से भरा है पर यह मुझे यूं ही पसंद है। आनंदी! खिलंदड़ा।
मैंने उसे अपने पास खींचना चाहा तो उसने मना कर दिया। अभी वह इस खेल को इसी तरह जारी रखना चाहता है। फिर मैंने उसके कहने पर मुंह खोला तो इस बार लजीज मांस से भरा चम्मच मुंह में आ गया। वाह! क्या स्वाद था। आवाज से पता चला कि वह भी खा रहा था। इसी तरह उसने मुझे भरपेट खिलाया और वाइन भी पिलाई।
“और खाना चाहोगी?”
“नहीं! पेट भर गया।”
“ओह! अब मेरी बारी है।” उसने यह कहते हुए मुझे इस तरह बांहों में भरा कि मैं खिलखिला उठी।
“क्या मैं पट्टी खोल सकती हूं।”
“अभी नहीं।”
“प्लेरूम?”
“चलें क्या! हमारा वह चैलेंज?”
पता नहीं क्यों, उसके इस प्रस्ताव को ठुकरा नहीं सकी और जाने के लिए हामी दे दी।
उसने मुझे उसे कमरे में ले जा कर पट्टी खोल दी। फिर उसने मेरे जूड़े के पिन खोले और खुले बालों को पीछे की ओर इस तरह खींचा कि मेरी गर्दन उसकी ओर झुक गई।
“मेरे पास एक प्लान है।”
“हां, मैं अंदाजा लगा सकती हूं।”
“ओह मिसेज ग्रे! मेरे पास हमेशा प्लान होता है।” उसने बाल हटाते हुए, गर्दन पर चुंबनों की बौछार कर दी।
“पहले हमें तुम्हें कपड़ों से आजाद करना है।” उसका सुर मेरी देह में गूंज रहा है। उसने मेरे लिए जो भी प्लान किया है, मैं उसे पूरा करना चाहती हूं। मैं उसके साथ उसी तरह जुड़ाव चाहती हूं, जैसा उसे पसंद है। उसने मेरा मुंह अपनी ओर घुमा लिया। उसके टी-शर्ट के बटन खुले हैं और मैं खुद को उसकी छाती के बालों में अंगुली फिराने से रोक नहीं सकी। उसने गहरी सांस ली और हमारी आंखें मिलीं।
“तुम ऐसा ही कर सकते हो”
“हां एनेस्टेसिया! मैं ऐसा ही करना चाहता हूं।”
फिर वह मुझे इस तरह चूमने लगा मानो उसकी सारी जिंदगी इसी चुंबन पर टिकी हो।
ओह!
वह चूमते हुए, मुझे पीछे की ओर ले जाने लगा और मुझे अपने पीछे लकड़ी की टेक महसूस हुई।
उसकी देह मेरे शरीर से लिपटी है।
“चलो पहले इन कपड़ों से छुटकारा पाएं।”
उसके हाथ बड़े ही लगाव से मेरी पोशाक उतार रहे हैं। अब मैं अपने सैंडिल और अंतर्वस्त्रों में हूं। उसने पलकें झपकाईं और मैं जानती हूं कि वह आगे की कारवाई के लिए मुझसे इजाजत मांग रहा है।
वह मेरे साथ क्या करने वाला है
तभी उसने चमड़े की हथकड़ियों से मेरे हाथ बांध दिए और पट्टी ले आया।
“लगता है कि तुमने बहुत कुछ देख लिया है।” उसने आंखों पर पट्टी बांध दी और इस तरह मेरी अन्य इंद्रियां और भी तेजी से काम करने लगीं। उसकी महकती सांसों का स्वर, मेरी अपनी उत्तेजित प्रतिक्रिया, कनपटियों में बहता लहू। यह सब बहुत तेज़ी से महसूस किया जा सकता है क्योंकि आंखों पर पट्टी बंधी है। उसकी नाक मेरे नाक को छू रहा है।
“मैं तुम्हें दीवाना बनाने जा रहा हूं।” उसके हाथों ने मेरे अंतर्वस्त्र भी उतार दिए। मैं और दीवानी… वाऊ!
फिर वह आगे बढ़ा और मुझे हाथ लगाए बिना ही चूम लिया।
कुछ खिलौने और संगीत। मैंने सोचा।
“मिसेज ग्रे! तुम ऐसे बहुत सुंदर दिख रही हो। मैं तुम्हें इसी रूप में देखना चाहता हूं।” मेरे पेट की मांसपेशियां ऐंठने लगीं।
तभी उसने एक दराज खोला। बट दराज? मुझे कुछ नहीं पता। तभी कमरे में संगीत गूंज उठा। यह संगीत बड़ा ही विरक्त कर देने वाला और उदासी से भरा है। मैं बेचैन हो गई और उसने अपनी छुअन से मुझे आश्वासन दिया। भला इसमें परेशान होने वाली क्या बात है। मैंने खुद को समझाया।
उसने मेरे गालों से होते हुए गर्दन व छाती पर हाथ फिराया और उसके होंठ लगातार नीचे तक चुंबनों की बरसात करते चले गए। उसका एक हाथ वक्ष से खेल रहा है और दूसरे वक्ष को अपने मुंह में भर रखा है। कितना ही अनूठा एहसास है। मानो उसने मेरे पूरे शरीर पर कब्जा कर लिया हो।
ओह! वह रुकता क्यों नहीं? उसने धीरे-धीरे उनकी गहनता बढ़ा दी है। यह एहसास मेरी टांगों के बीच तक जा रहा है। मैंने सिकुड़ना चाहा पर मैं हिल नहीं सकती इसलिए यह सब और भी गहन लग रहा है।
क्रिस्टियन! मैंने विनती की।
“मैं जानता हूं।”
“तुम भी मुझे यही एहसास दिलाती हो।”
“क्या?” वह यह कहने के बाद अपनी उस मीठी यंत्रणा के साथ जारी रहा।
“प्लीज!”
उसने अपने गले से एक आदिम सुर निकाला और मुझे तड़पता हुआ छोड़ कर उठ गया। आज उसने पहले से तय कर रखा था कि उसने क्या करना है। कुछ ही देर में उसकी अंगुलियां मेरे गुप्तांगों से खेलने लगीं। मैं भी उस खेल का हिस्सा बनना चाहती थी पर उसने ऐसा करने नहीं दिया।
“एनेस्टेसिया! मैं देख सकता हूं कि तुम तो तैयार हो।”
वह लगातार अपना दांव दोहराता रहा। वह मेरे शरीर के एक ही अंग को छू रहा है और मानो सारे दिन का तनाव उसी एक अंग पर आ टिका है।
ओह! ये सब कितना विचित्र है! ये विरक्त कर देने वाला संगीत! उसका यह बर्ताव! मैं अब चरम सुख तक आना चाहती हूं। ज्यों ही मैंने आगे हो कर उसे चूमना चाहा तो उसने रोक दिया।
एक अजीब सी आवाज सुनाई दी।
“यह क्या है?”
“यह एक छड़ है जो वाइब्रेशन यानी कंपन पैदा करती है।”
उसने उसे मेरी छाती के पास रखा और ऐसा लगा मानो कोई बड़ी सी गेंद देह को रगड़ रही हो। वह शरीर पर रेंगने लगी और मेरी वासना भड़क उठी।
ओह! उसका एक हाथ अब भी वहीं है। …मैं पहुंच रही हूं ….उस मुहाने पर पहुंचने ही वाली हूं…। मैंने अपना सिर झुका कर एक सिसकारी भरी कि उसका हाथ वहीं थम गया। सारी संवेदनाएं वहीं मर गईं।
“नहीं, क्रिस्टियन!” मैंने आग्रह किया। बेबी हिलो मत। उसने मेरी बात की परवाह नहीं की और आगे बढ़ कर चूम लिया।
वह फिर से अपनी वही यंत्रणा देने लगा। वह वाइब्रेटर और उसका हाथ! वह अब भी कपड़ों में है। उसकी जींस मेरी देह से रगड़ खा रही है। उसकी देह के उभार को महसूस कर सकती हूं। वह मेरे पास हो कर भी दूर है। उसने फिर से मुझे उस मोड़ पर ले जा कर अकेला छोड़ दिया और मैं तरसती रह गई।
उसने कंधा चूमा और वह प्रक्रिया फिर से दोहराने लगा।
“क्रिस्टियन!” मैंने जोर से पुकारा।
“देखा! मुझे भी ऐसा ही महसूस होता है, जब तुम वादा करती हो और उसे तोड़ देती हो…।”
इसके बाद भी उसने मुझे चरम सुख की सीमा के पास ले जा कर रोक दिया। वह जानबूझ कर मुझे उसके पार जाने नहीं दे रहा। ऐसा कई बार हो चुका है। हर बार नए सिरे से शुरूआत की जा रही है। जो मेरे लिए किसी सजा से कम नहीं है।
“प्लीज! मेरी नसें अपने लिए आजादी चाहती हैं।”
उसने वाइब्रेशन को बंद किया और चूम कर बोला, “मैंने आज से पहले तुम से ज्यादा झक्की औरत नहीं देखी।”
नहीं! नहीं!
“क्रिस्टियन! मैंने कभी वादा नहीं किया था कि तुम्हारी हर बात मानूंगी।”
उसने पट्टी खोली और मुझे अपने से सटा कर वासना को भड़काने लगा। अभी मैं उस रास्ते पर बढ़ी ही थी कि उसने फिर से दूरी साध ली। मेरा पूरा शरीर तरस रहा है। मैं उसे अभी और यहीं चाहती हूं पर वह ऐसा होने नहीं दे रहा। मैं बेबस हूं पर इतना तो तय है कि वह जान कर ऐसा कर रहा है। वह मुझे सजा देना चाहता है। मेरी आंखों में आंसू छलछला आए। पता नहीं, वह कितनी देर तक ऐसा करता रहेगा।
क्या मैं यह खेल खेल सकती हूं। नहीं! कभी नहीं!
वह इसी तरह करता रहेगा। उसके हाथ फिर से मेरी देह पर रेंगने लगे। और पिछले दिनों का भय और तनाव आंखों के रास्ते बहने लगा।
यह सब तो वही है। वही है। पीड़ादायी लाल कमरा!
“नहीं! नहीं। ओ गॉड नहीं!” वह चिहुंक उठा।
वह झट से आगे आया और मेरे बंधन खोल दिए। मैं अपना सिर हाथों में रख कर रोने लगी।
“नहीं, नहीं…एना। प्लीज रोना बंद करो।”
वह मुझे पलंग पर ले गया, गोद में खींच लिया और मैं जोर-जोर से सुबकियां भरने लगी… मेरा शरीर और दिमाग दोनों ही मेरा साथ नहीं दे रहे। मेरी भावनाएं बाहर आने के लिए उमड़ रही हैं। वह मेरे पास आया और साटिन की चादर शरीर पर लपेट दी। देह को उसका ठंडा सा स्पर्श बिल्कुल नहीं भाया। वह मुझे बांहों में भर कर, किसी बच्चे की तरह आगे-पीछे झुलाने लगा।
“सॉरी! सॉरी! माफ कर दो मुझे।” उसने मुझे चूमते हुए हौले से कहा
पिछले कुछ दिनों में तेजी से बीती घटनाओं ने मुझे हिला कर रख दिया था। फिर वह दूर चला गया और मुझे उसका अपने से दूर जाना बिल्कुल पसंद नहीं है। जब मैंने चादर के कोने से नाक पोंछा तो मुझे पता चला कि वह विरक्त सा कर देने वाला संगीत अब भी कमरे में गूंज रहा था।
“भगवान के लिए इसे बंद कर दो।” मैंने खीझ कर कहा।
“तुम्हें पसंद नहीं आया।” उसने झट से उसे बंद कर दिया।
“अब ठीक लग रहा है? सॉरी!”
“तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?”
उसने उदासी से अपनी गर्दन हिलाते हुए आंखें मूंद लीं।
“मैं उन पलों में बहक गया था।”
मैंने त्यौरी चढ़ाई तो उसने आह भरी, “एना अक्सर हम चरम सुख तक… । मैं गलत कर रहा था”
मेरे आंसू अभी सूखे नहीं थे। दोबारा उमड़ आए और वह बहुत ही प्यार से मेरे गाल चूमने लगा। मैं इस आदमी का क्या करूं? एक पल में बेगाना हो जाता है और एक ही पल में ऐसे पेश आता है मानो पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा मुझे ही चाहता है। मैं उसकी आंखों में देख रही हूं। क्या मुझे इससे पार करने के लिए यह सीखना होगा कि मैं हमेशा इसके वश में कैसे रहूं। मैं यह नहीं कर सकती।
“मैंने कभी तुम्हारा दिल नहीं तोड़ा…।”
“मेरी बात भी तो नहीं मानी। तुमने अपना मन बदल लिया। मुझे बताया नहीं कि तुम कहां हो, एना। में वहां न्यूयार्क में था। मैं कुछ नहीं कर सकता था। अगर सिएटल में होता तो तुम्हें घर ले आता।”
“तो तुम मुझे चरम सुख के छोर से बार-बार लौटा कर सजा दे रहे थे?”
उसने थूक निगला और आंखें बंद कर लीं। उसे जवाब देने की जरूरत नहीं थी क्योंकि मैं जानती थी कि यही उसकी असली मंशा थी।
“तुम्हें यह सब करना रोकना होगा।”
यह सुन कर उसके माथे पर बल आ गए।
“तुम्हें अपने बारे में बेहूदा सोचना रोकना होगा।”
“तुम्हें याद रखना होगा कि तुमने अपनी सेक्स गुलाम से शादी नहीं की।”
“मैं जानता हूं। मैं जानता हूं।”
“तो मेरे साथ वैसे पेश आना बंद करो। मुझे माफ कर दो कि मैंने तुम्हें फोन नहीं किया। आगे से ऐसा नहीं होगा। मैं जानती हूं कि तुम्हें मेरी चिंता हो रही थी।”
ये उपन्यास ‘फिफ्टी शेड्स फ्रीड’ किताब से ली गई है, इसकी और उपन्यास पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – fifty shades freed (फिफ्टी शेड्स फ्रीड)
उसने हौले से मेरे होंठ चूम लिए।
“जब तुम रोती हो तो होंठ और भी मुलायम हो जाते हैं।” उसने हौले से कहा।
“मैंने कभी तुमसे वादा नहीं किया था कि तुम्हारी हर बात मानूंगी।”
“मैं जानता हूं।”
“तुम्हें अपनी आदतें बदलनी होंगी। तुम मुझसे किसी गुलाम की तरह पेश नहीं आ सकते।”
मैंने उसकी छाती पर हाथ रख लिया और दोनों कुछ देर चुपचाप लेटे रहे। उसने मेरे बालों की चोटी खोल दी। माना उसे मेरी परवाह थी पर यह तो हद थी कि वह मुझे कुछ बताना भी नहीं चाहता था। मेरे अंदर फिर से उबाल आ गया।
“तुम मेरी सुरक्षा चाहते हो पर तुम्हें तो गन तक चलाना नहीं आता। अगर एलीना वाले मामले में, मैं कमजोर होती तो…। तुम्हारी मॉम भी जानती हैं कि एलीना वाली घटना में…।”
“क्या मॉम जानती हैं?”
“हां, मैंने उनसे बात की थी पर वे उतना ही जानती हैं, जितना उन्हें जानना चाहिए।” मैंने उसे तसल्ली दी।
“तो तुम मुझे जैक के बारे में कुछ बताओगे।”
उसने कुछ पल के लिए मुझे देखा और बताया कि चार्ली टैंगो वाली घटना में जैक का ही हाथ था।
मेरा दिमाग चकरा गया। यह काम उसने किया था।
“आज गैराज में एक कार्गो वैन मिली है। उस दिन हमें जो पड़ोसी लड़का मिला था। जैक उसका सामान डिलीवर करने के बहाने से ही कल हमारे घर में घुसा था।”
“और उस वैन में क्या था”
“मुझे बताओ, उसमें क्या मिला?”
“उसमें बेहोशी की दवा और मेरे नाम एक नोट लिखा मिला।”
उसके नाम नोट?
“क्या लिखा था उसमें?”
पता नहीं, वह बताना नहीं चाहता था या उसे पता नहीं था।
“हाइड कल रात तुम्हारा अपहरण करने आया था।”
ये क्या! इसने अभी-अभी क्या कहा?
“ओह! तभी उसकी जेब से गन और मुंह पर चिपकाने वाली टेप निकली थी।” मेरी तो रूह ही कांप गई। क्या जैक शुरू से ही ऐसा था? वह इतनी नीच हरकत भी कर सकता है।
“पर वह ऐसा क्यों चाहता था।”
“पता नहीं। पुलिस पता लगा रही है पर हमें लगता है कि डैट्रॉयट से कोई संबंध है।”
“क्यों! ऐसा क्यों है।” मैं नहीं समझी।
“एना! मेरा जन्म भी वहीं हुआ था।” क्रिस्टियन के चेहरे पर बहुत ही बेचैन कर देने वाले भाव थे।
