googlenews
Abhishap by rajvansh Best Hindi Novel | Grehlakshmi
Abhishap by rajvansh

निखिल ने सिगरेट सुलगाकर धुआं उड़ाया और मनु से पूछा- ‘कहो मनु कैसा लगा?’

‘वह क्या?’

‘हमारा यह रंग महल।’

‘बहुत अच्छा है।’ इतना कहकर मनु पलंग पर गिर पड़ी।

इस समय वह एक कोठी में थी और निखिल ने यह कोठी दो दिन पहले ही खरीदी थी। कोठी में आधुनिक फर्नीचर के अतिरिक्त सुख-सुविधा का प्रत्येक सामान मौजूद था। मनु तो यहां आकर अपने भाग्य पर इठलाए बिना न रही थी।

‘और।’ निखिल उसके निकट ही बैठ गया और बोला- ‘सबसे बड़ी बात तो यह है कि ये रंग महल तुम्हारा अपना है।’

मनु ने उसे एक झटके से अपने ऊपर खींच लिया और बोली- ‘सिर्फ मेरा?’

‘क्यों?’

‘मेरा मतलब है-क्या यह तुम्हारा नहीं?’

‘सॉरी! मुझे कहना चाहिए था कि यह महल हम दोनों का है।’

‘अच्छा निखिल!’ मनु को कुछ याद आया। निखिल की कमर के इर्द-गिर्द अपनी बांहें डालकर उसने कहा- ‘एक बात पूछूं?’

‘पूछो?’

‘आं! शहर में दो कोठियां, एक स्टूडियो और फिल्म कंपनी।’

‘और बैंक बैलेंस?’

‘चार करोड़।’

‘फिल्म कंपनी से कितनी आमदनी होती है।’

‘आमदनी अच्छी है। प्रतिमाह औसतन पांच लाख। लेकिन तुम यह सब क्यों पूछ रही हो?’

‘यूं ही-एक जिज्ञासा थी मन में।’

‘मन में सिर्फ जिज्ञासा ही थी अथवा कुछ और भी?’

‘कुछ और क्या?’

निखिल ने सिगरेट ऐश ट्रे में कुचल दी। मनु के होंठों को चूमकर वह बोला- ‘कोई उमंग कोई तरंग-भावनाओं का कोई तूफान?’

‘तूफान तो है-किन्तु साथी बुद्धू है।’

‘बुद्धू क्यों?’

‘जो हृदय की बात न जाने।’

‘वह तो हम बहुत पहले से जानते हैं साहब!’ इतना कहकर निखिल ने मनु को स्वयं से सटा लिया और उसके वक्ष पर हाथ फिराते हुए बोला- ‘हम तो बस-आपके मुंह से सुनना चाहते थे।’

‘नारी में यही एक दोष होता है। मन में समर्पण की भावना हो तो भी वह मुंह से नहीं कह पाती।’

इसके पश्चात् निखिल ने उसे कुछ कहने का अवसर नहीं दिया और उसके होंठों से अपने होंठ सटा दिए। दूसरे ही क्षण यह रंग महल दोनों की सांसों से महक उठा।

फिर जब तूफान शांत हुआ तो मनु निखिल से बोली- ‘निक्की! क्या आज की रात मैं यहां नहीं रह सकती?’

‘नहीं मनु! अभी तुम्हारा यहां रात भर रहना ठीक नहीं। कारण यह है कि अभी तुम्हारा तलाक नहीं हुआ है और तुम समाज तथा कानून की दृष्टि से अभी भी आनंद की पत्नी हो। ऐसी स्थिति में तुम्हारा यहां रात भर रहना ठीक नहीं।’

‘निक्की! वहां मेरा दम घुटता है। सो नहीं पाती। रात भर तुम्हारी याद आती है।’

‘मनु! मन में प्रेम का ज्वार उठता हो तो याद तो आती ही है। तुम अपने वकील से बात क्यों नहीं करतीं?’

‘बात तो की है।’

‘फिर…?’

‘वह कहता है-कोर्ट में दो-तीन तारीखें लगेंगी। तब निर्णय होगा। उफ-तब तो मेरी जान ही निकल जाएगी निक्की!’ मनु यह कहते निखिल के हृदय से लग गई।

निखिल उसके बालों से खेलते हुए बोला- ‘ऊंहु! ऐसा कुछ न होगा। और वैसे भी-दूरी सिर्फ रात की ही तो है। दिन में तो कोई दिक्कत नहीं। तुम यहां आती रहो।’

मनु उसके हृदय से लगी रही।

निक्की फिर बोला- ‘आनंद फिर मिला?’

‘नहीं।’

‘अपने भाई के पास ही होगा।?’

‘पापा बता रहे थे कि वह वहां भी नहीं रहता।’

‘फिर?’

‘मैं नहीं जानती वह कहां है। मेरा उससे कोई संबंध भी नहीं।’

‘कोई बात नहीं। एक दिन सब ठीक हो जाएगा। आओ अब चलें। मैं तुम्हें तुम्हारे घर छोड़कर स्टूडियो चला जाऊंगा।’

मनु ने कुछ न कहा और दोनों बाहर आकर गाड़ी में बैठ गए।

खबर का शीर्षक था- ‘नागरिक बैंक के लुटेरे इसी शहर में-पुलिस का विश्वास।’

बाहर बरामदे में बैठे राजाराम ने पूरी खबर पढ़ी और अखबार रखकर पास खड़े अखिल से बोले- ‘हां! तू क्या कह रहा था?’

‘मैं आपसे एस-के- एंटरप्राइजेज के विषय में बता रहा था। सिन्हा साहब मुझे काम देने को तैयार हो गए हैं।’

‘अच्छी बात है। कब जाना है?’

‘जब आप कहें।’

‘मूर्ख है तू! अरे-नौकरी मिल गई तो मुझसे क्या पूछना? कल से जाना शुरू कर दे।’

‘ठीक है पापा!’ अखिल बोला।

‘लेकिन एक बात का ध्यान रखना अखिल!’ राजाराम बोला- ‘सच्चाई ओर ईमानदारी बहुत बड़ी चीजें होती हैं। अपना काम करते वक्त इन दो बातों को कभी मत भूलना।’

‘आप चिंता न करें पापा!’ अखिल ने कहा।

राजाराम ने फिर से अखबार उठा लिया। तभी भारती आ गई और अपने पिता के हाथ से अखबार लेकर बोली- ‘पापा! आज मैं आपको एक बहुत अच्छी खबर सुनाती हूं। तू भी सुनेगा अखिल?’

‘दीदी! अच्छी है तो सुनने में क्या बुराई है।’

‘किन्तु उस खबर में है क्या?’ राजाराम ने पूछा।

भारती बैठ गई और बोली- ‘निखिल ने शादी कर ली है।’

यह सुनते ही राजाराम के हृदय को आघात-सा लगा जबकि अखिल के चेहरे पर कड़वाहट फैल गई। वह घृणा से बोला- ‘हमें क्या? जो व्यक्ति हमारे लिए मर चुका हो, वह कुछ भी करे।’

‘किन्तु तूने यह तो पूछा ही नहीं कि विवाह किससे किया है।’

‘किससे?’

‘गोपीनाथ कांट्रेक्टर की बेटी मनु से।’

‘क्या!’ राजाराम चौंककर बोला- ‘कहीं तू पागल तो नहीं हो गई? अभी चार महीने पहले ही तो मनु का विवाह हुआ है। याद आया-प्रोफेसर आनंद से।’

abhishap

‘पापा! मनु ने यह दूसरा विवाह किया है।’

‘दूसरा विवाह-तो फिर पहले विवाह का क्या हुआ?’

‘टूट गया।’ भारती बोली- ‘बल्कि यूं कहिए कि तुड़वा दिया गया।’

‘किसने किया ऐसा?’

‘आपके बेटे निखिल ने। निखिल ने गोपीनाथ का लाखों का ऋण चुकाया-उन्हें नई गाड़ी खरीद कर दी और उन्हें इस प्रकार प्रभावित किया कि वह केवल उसी के गीत गाने लगे।’

‘फिर?’ अखिल ने उत्सुकता से पूछा।

‘मनु ने आनंद से संबंध तोड़ लिए। यूं कहिए कि आनंद का प्रेम हार गया और निखिल की दौलत जीत गई। सबसे बुरा तो यह हुआ पापा! कि आनंद का जीवन बर्बाद हो गया।’

‘वह क्यों कर?’ राजाराम ने पूछा।

‘पापा! हृदय पर लगी चोट मनुष्य को पागल कर देती है। आनंद के साथ भी ऐसा ही हुआ है। मैं तो स्टूडेंट थी उनकी-आज मिल गए। फुटपाथ पर भिखारियों की भांति बैठे थे। शेव बढ़ी हुई-कपड़े गंदे-नशे में भी थे। मैंने उन्हें उनके होटल पहुंचाया। बहुत दुखी थे बेचारे।’

अखिल ने यह सुनकर घृणा से दांत पीस लिए। वह राजाराम से बोला- ‘पापा! मुझे तो आश्चर्य है कि ये कमीना अभी तक जिंदा क्यों है? ऐसे लोग जो दूसरों के घरों में आग लगाते हैं, जो देश और समाज के दुश्मन हैं-ईश्वर उन्हें धरती पर रहने क्यों देता है? उठता क्यों नहीं संसार से? क्यों नहीं मिलती उन्हें उनके गुनाहों की सजा?’

‘सजा जरूर मिलती है बेटे! जरूर मिलती है। उस विधाता के घर में देर तो हो सकती है, किन्तु अंधेर कभी नहीं होता। मुझे पूरा विश्वास है कि निखिल को एक दिन उसके अपराधों की सजा जरूर मिलेगी।’

भारती बोली- ‘पापा! उसने तो एक साथ दो-दो घरों में आग लगाई है। गोपीनाथ के घर में भी और आनंद के घर में भी।’

‘खैर! तू इस विषय में अधिक मत सोच। वह जैसा करेगा-वैसा उसे भरना ही पड़ेगा।’

भारती अंदर चली गई।

अखिल भी कमरे में आ गया। शिल्पा उस समय बिस्तर की चादर ठीक कर रही थी। अखिल को यों गुस्से में देखकर उसने पूछा- ‘क्या हुआ, किसी से झगड़ा कर बैठे?’

‘शिल्पा!’ अखिल बैठकर बोला- ‘मेरा दिल चाहता है कि उस कमीने का खून कर डालूं।’

‘किसका खून?’ शिल्पा ने चौंककर पूछा।

‘हमारे वंश में सिर्फ एक ही शैतान पैदा हुआ है।’

‘निखिल की बात कर रहे हो?’

‘हां।’

‘अब क्या कर दिया उसने?’

‘उसने प्रोफेसर आनंद का जीवन बर्बाद कर दिया।’

‘प्रोफेसर आनंद।’ शिल्पा चौंककर बोली- ‘उन्हें तो मैं जानती हूं। अभी चार महीने पहले उनका विवाह हुआ है।’

‘विवाह हुआ था।’

‘मतलब?’

‘निखिल ने तुड़वा दिया।’

‘मैं समझी नहीं।’

‘आनंद ने कांट्रक्टर गोपीनाथ की बेटी मनु से विवाह किया था। किन्तु निखिल ने गोपीनाथ और मनु को अपनी दौलत का लालच देकर यह संबंध विच्छेद करा दिया और स्वयं मनु से विवाह कर लिया।’

‘ऊंहु! मनु से उसने विवाह न किया होगा।’

‘और?’

‘उसे अपनी रखैल बनाया होगा। निखिल की और भी कई रखैल हैं-कई बाजारू लड़कियों से संबंध हैं उसके। किन्तु उसके संबंध स्थाई नहीं होते। वह किसी भी लड़की को केवल चार दिन अपने पास रखता है और फिर ठोकर मार देता है।’

‘तो क्या?’

abhishap

‘यही होगा मनु के साथ भी। निखिल साहब कुछ दिनों तक उसे अपने पास रखेंगे और फिर भगा देंगे। मैंने तो वहां बहुत-सी लड़कियां देखी हैं-सबके साथ यही होता है।’

‘फिल्म कौन-सी बन रही है आजकल।’

‘ईश्वर जाने।’ शिल्पा बोली- ‘मैंने अक्सर सुना तो है कि शूटिंग हो रही है, किन्तु शूटिंग कहां होती थी-यह मैं नहीं जानती। यह भी हो सकता है कि वह फिल्म की आड़ में कोई गैर कानूनी काम कर रहा हो। मैं आपके लिए चाय लेकर आती हूं।’

इतना कहकर शिल्पा बाहर चली गई और अखिल घृणा से दांत पीसता रहा।

अभिशाप-भाग-21 दिनांक 11 Mar. 2022 समय 04:00 बजे साम प्रकाशित होगा

Leave a comment