धरोहरों के देश भारत में कई प्राचीन और ऐतिहासिक इमारतें और मंदिर हैं, जिन्हें देखने के लिए हर साल लाखों देसी और विदेशी पर्यटक आते हैं। पिछले कुछ सालों में भारत में कई ऊंची मूर्तियों का भी निर्माण किया गया है। ये मूर्तियां हमारे देश के आराध्य देवों और महान व्यक्तियों के सम्मान में बनाई गई हैं। ये सिर्फ पर्यटन स्थल ही नहीं हैं बल्कि देश का गौरव भी हैं। इन समर हॉलीडे में अगर आप भी कुछ ऐसा देखना चाहते हैं, जिसे देखकर आपका सीना भी गर्व से चौड़ा हो जाए तो चले आइए इन मूर्तियों को देखने-  

1. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी

मूर्ति की ऊंचाई- 597 फीट

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देश की शान है। गुजरात के केवड़िया में नर्मदा नदी के तट पर बनी भारतीय राजनेता और स्वतंत्रता सेनानी सरदार वल्लभभाई पटेल की यह मूर्ति दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। सरदार सरोवर बांध के सामने स्थित द्वीप पर इस प्रतिमा का निर्माण किया गया है। हजारों पर्यटक रोज इस मूर्ति को देखने आते हैं। मूर्ति के अंदर 153 मीटर की ऊंचाई पर एक गैलरी भी है। जहां से पर्यटकों को सरदार सरोवर बांध और सतपुड़ा व विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं का शानदार नजारा देखने को मिलेगा। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी वडोदरा से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित है। वहीं अहमदाबाद से इसकी दूरी करीब 200 किलोमीटर है। नेशनल हाईवे 11 और 63 इससे सीधे जुड़े हैं। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास आप कई अन्य स्थल भी देख सकते हैं। यहां 17 किलोमीटर लंबी फूलों की घाटी आपका मन मोह लेगी। पर्यटकों के ठहरने के लिए टेंट सिटी भी बनाई गई है।  

2. देखें भगवान शिव का ‘विश्वास स्वरूपम्’

मूर्ति की ऊंचाई- 369 फीट

राजस्थान के राजसमंद जिले के नाथद्वारा में दुनिया की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा विराजमान है। इसे नाम दिया गया है ‘विश्वास स्वरूपम्’ यानी ‘स्टैच्यू ऑफ बिलिफ’। करीब दस साल में बनकर तैयार हुई इस प्रतिमा को देखना किसी आश्चर्य से कम नहीं है। यह दुनिया की टॉप 5 ऊंची प्रतिमाओं में से एक है। यह सिर्फ प्रतिमा नहीं अपने आप में पूरा शिव संसार है। प्रतिमा के ऊपर तक पहुंचने के लिए लिफ्ट और सीढ़ियां हैं। इसमें बड़े हॉल भी हैं। इस प्रतिमा का निर्माण 3000 टन स्टील और लोहे से किया गया है। इसमें 2.5 लाख क्यूबिक टन कंक्रीट और रेत का उपयोग हुआ है। प्रतिमा के चारों और खूबसूरत गार्डन विकसित किया गया है। इसी के साथ यहां एक जलाशय है, जहां शाम को म्यूजिकल फाउंटेन शो होता है। यहां फूड कोर्ट के साथ ही बच्चों के लिए पार्क भी है।

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3. स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी

हैदराबाद के मुचिंतल में बनी स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी वैष्णव संत रामानुजाचार्य की प्रतिमा है।
स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी

मूर्ति की ऊंचाई- 216 फीट

हैदराबाद के मुचिंतल में बनी समानता की मूर्ति यानी स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी 11 वीं शताब्दी के वैष्णव संत रामानुजाचार्य की प्रतिमा है। 216 फीट ऊंची इस मूर्ति का निर्माण कार्य साल 2014 में शुरू हुआ था। यह मूर्ति साल 2022 में बनकर तैयार हुई। 1000 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस प्रतिमा को देखने के लिए हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। संत रामानुजाचार्य ने समाज को समानता का संदेश दिया, इसी कारण इस प्रतिमा को स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी नाम दिया गया है। सोने सी चमकती इस प्रतिमा को देखकर आपका दिल खुश हो जाएगा।

4. रोमांच से भर देगी यह सफेद हनुमान प्रतिमा

मूर्ति की ऊंचाई- 135 फीट

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के पास परिताला में स्थित परिताल अंजनेय मंदिर अपने आप में अनोखा है। यहां स्थापित भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची हनुमान मूर्तियों में से एक है। इस प्रतिमा की ऊंचाई 135 फीट है। यह भारत की चौथी सबसे ऊंची प्रतिमा है। प्रतिमा के नीचे ही मंदिर स्थित है। बेहद आकर्षक इस प्रतिमा को देखने के लिए हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। मंदिर परिसर में खूबसूरत गार्डन है, जहां आप अपना समय बिता सकते हैं। इस प्रतिमा का उद्घाटन साल 2003 में किया गया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में भगवान हनुमान की सबसे ऊंची प्रतिमा भी आंध्र प्रदेश में ही स्थित है। वामधारा नदी के तट पर श्रीकाकुलम जिले में बनी इस प्रतिमा की ऊंचाई 171 फीट है।  

5. लहरों के बीच अडिग तिरुवल्लुवर की मूर्ति 

प्रसिद्ध संत और तमिल कवि तिरुवल्लुवर को समर्पित मूर्ति तमिलनाडु के कन्याकुमारी में स्थित है।
लहरों के बीच अडिग तिरुवल्लुवर की मूर्ति 

मूर्ति की ऊंचाई-133 फीट

समुद्रों की लहरों के बीच अडिग खड़ी तिरुवल्लुवर की 133 फीट ऊंची प्रतिमा के दर्शन करना बेहद रोमांचक है। प्रसिद्ध संत और तमिल कवि तिरुवल्लुवर को समर्पित यह मूर्ति तमिलनाडु के कन्याकुमारी में स्थित है। विशाल चट्टान पर बनी इस प्रतिमा का निर्माण कार्य साल 1990 में शुरू किया गया। इसका उद्घाटन जनवरी, 2003 में किया गया था। इस प्रतिमा को देखने का सफर भी आपको रोमांचक लगेगा। स्टीमर की मदद से आप यहां तक पहुंचेंगे। इस दौरान समुद्र की सैर का एक्सपीरियंस मजेदार लगता है।  

6. सोने की चमकती तथागत त्साली प्रतिमा

मूर्ति की ऊंचाई- 128 फीट

दक्षिण सिक्किम जिले में रवंगला के पास स्थित तथागत त्साली की मूर्ति बेहद आकर्षक है। हरियाली के बीच भगवान गौतम बुद्ध की ध्यान मुद्रा की इस प्रतिमा को बेहद खूबसूरती से बनाया गया है। इसमें किया गया गोल्डन वर्क देखने में बेहद आकर्षक लगता है। प्रतिमा के ऊपर तक जाने के लिए सीढ़ियां हैं। वहीं आसपास करीब तीन एकड़ में गार्डन बनाया गया है, जिसे बुद्ध पार्क कहा जाता है। इस मूर्ति का निर्माण कार्य साल 2006 में शुरू होकर साल 2013 में पूर्ण हुआ।  

7. मन को शांति देगी ध्यान बुद्ध प्रतिमा  

मूर्ति की ऊंचाई- 125 फीट

आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के अमरावती गांव में स्थित ध्यान बुद्ध प्रतिमा लोगों की आस्था का केंद्र है। ध्यान में बैठे भगवान बुद्ध की इस प्रतिमा की ऊंचाई करीब 125 फीट है। इसका निर्माण कार्य साल 2003 में शुरू हुआ। करीब 12 साल में यह पूरा हुआ। प्रतिमा के परिसर में ही स्तूप भी है। यहां लोग ध्यान लगाते हैं। यहां आकर आपका मन शांत और रोमांचित दोनों होगा।

8. हरियाली के बीच विराजे पद्मसंभव   

हिमाचल प्रदेश के रेवलसर में गुरु पद्मसंभव की विशाल प्रतिमा ​है।
हरियाली के बीच विराजे पद्मसंभव 

मूर्ति की ऊंचाई- 123  फीट

बौद्ध धर्म को भूटान एवं तिब्बत तक ले जाने एवं प्रसार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गुरु रिन्पोछे की अलौकिक प्रतिमा बेहद खूबसूरत है। हिमाचल प्रदेश के रेवलसर में स्थित इस प्रतिमा को पद्मसंभव नाम दिया गया है। भारत के इस साधु पुरुष को लोपों रिन्पोछे भी कहा जाता है। इस प्रतिमा की ऊंचाई 123 फीट है। हरियाली ओढ़े पहाड़ों के बीच सोने से चमकती  यह प्रतिमा देखकर आपके दिल को सुकून मिलेगा। प्रतिमा के चारों ओर बारीक काम किया गया है, जो आपको यहां की संस्कृति से रू-ब-रू करवाएगा। 

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...

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