बेटी अगर हो गई है टीनएजर, जरूर समझाएं उसे ये 5 बातें
13 साल की उम्र से लेकर 19 साल तक की आगे काफी सेंसिटिव होती है। बच्चों के लिए ये वो वक्त होता है जब आप सही और गलत में फर्क समझाते हैं।
Teenage Talks: 13 साल की उम्र से लेकर 19 साल तक की आगे काफी सेंसिटिव होती है। बच्चों के लिए ये वो वक्त होता है जब आप सही और गलत में फर्क समझाते हैं। वहीं टीनएज में जाते ही ना सिर्फ बच्चों का बचपन खत्म हो जाता है, बल्कि उनकी जिंदगी और शरीर में भी कई बदलाव देखने को मिलते हैं। खासकर लड़कियों को टीनएज में कई चैलेंजेस से गुजरना पड़ता है।
ऐसा मन जाता है कि मां हर बच्चे की पहली गुरु होती है, जो अपने बच्चे के आगे ढ़ाल बनकर खड़ी होती है और साथ ही टीनएज के समय पर गुड और बैड टच हो या हेल्दी रिलेशनशिप जैसी चीज़ों के बारे में भी उन्हें समझाती है। वहीं ये भी माना जाता है कि लड़कियां खुद से जुड़ी ज़्यादातर बातें अपनी मां के साथ ही शेयर करती हैं। ऐसे में अगर आपकी बेटी भी टीनएजर है तो आप कुछ बातें समझाकर उसकी लाइफ को आसान और बेहतर बना सकते हैं.
प्यूबर्टी शब्द बच्चियों के जीवन के उस पड़ाव के लिए किया जाता है जब उनका शरीर एक बच्चे से एक एडल्ट में परिवर्तित होने लगता है। प्यूबर्टी एज गेन करने के बाद लड़कियों में कई तरह से फिजिकल चेंज आते हैं। जैसे ब्रेस्ट का साइज बढ़ना। आमतौर पर लड़कियों की प्यूबर्टी एज 8 साल से 13 साल तक की उम्र के बीच होती है। इस एज ग्रुप में लड़कियां न केवल नई-नई चीजें सीखती हैं, बल्कि उनकी इंटिमेट हेल्थ भी लगातार परिवर्तित होती है। इसलिए बेटी या छोटी बहन को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से कुछ जरूरी चीजों पर बात करना बेहद जरूरी है।
शारीरिक परिवर्तन

लड़कियों में प्यूबर्टी की एज हासिल करने के बाद उनके शरीर की शेप और साइज में तेजी से बदलाव आने लगते हैं। आमतौर पर लड़कियों का शरीर कर्वी भी हो जाता है। उनके निप्पल स्वेल करने के साथ-साथ धीरे-धीरे उनके हिप्स चौड़े भी हो जाता है। उनके ब्रेस्ट का डेवलपमेंट भी पूरी तरह से इस दौरान होने लगता है। यह भी संभव है कि दूसरे की तुलना में किसी लड़की की ब्रेस्ट साइज छोटी या बड़ी हो सकती है। इस समय में उन्हें सही साइज की ब्रा या ट्रेनिंग ब्रा पहनने की सीख दें। अगर वे किसी खेल या एक्सरसाइज में भाग लेती हैं, तो उसके लिए उन्हें स्पोर्ट्स ब्रा पहनने को कहें।
मेंटल हेल्थ

प्यूबर्टी के शुरूआती दौर में बच्चियों की मेंटल हेल्थ भी काफी प्रभावित होती है। एंग्जाइटी, ईटिंग डिसऑर्डर, डिप्रेशन, आचरण विकार, कॉन्सन्ट्रेशन की कमी और हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी), सेल्फ हार्म जैसी कई समस्याएं टीनएजर्स गर्ल को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती हैं। किशोरावस्था नेविगेट करने के लिए बहुत मुश्किल नहीं होती है, लेकिन जिन लोगों के पास पहले से ही मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, उनके लिए किशोरावस्था चीजों को और भी खराब कर सकती हैं। इसका रिजल्ट नशीली दवाओं का सेवन करना या शराब पीने की लत भी हो सकता है।
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सेक्सुअल हेल्थ

प्यूबर्टी की शुरुआत के साथ ही हार्मोन सीक्रेशन से सेक्सुअल हेल्थ भी प्रभावित होने लगती है, जिसमें गोनाडल हार्मोन, कोर्टिसोल, और कई चीजें भी शामिल हैं। यह न्यूरो-एंडोक्राइन इफेक्ट सेकंडरी सेक्सुअल कैरेक्टर की अभिव्यक्ति की ओर ले जाता है। इस दौरान लड़कियों को सेफ सेक्स के बारे में बताना बेहद जरूरी है। साथ ही, एक्सिलरी हेयर्स, जिनमें जेंडर स्पेसिफिक डेवलपमेंट पैटर्न भी होता है। प्यूबिक हेयर्स लड़के-लड़कियों दोनों में विकसित होते हैं, इसके साथ ही मेंस्ट्रुअल पीरियड के दौरान साफ-सफाई और स्वच्छता के बारे में भी लड़कियों को अच्छे से समझाना बेहद जरूरी है।
न्यूट्रिशन

प्यूबर्टी एज में बॉडी डेवलपमेंट के लिए सही मात्रा में न्यूट्रीशन और माइक्रो और मैक्रो दोनों तरह के पोषक तत्वों सहित बैलेंस डाइट लेनी बहुत जरूरी है। शरीर में आ रहे तेजी से बदलाव के दौरान प्रोटीन, कैलोरी, आयरन, कैल्शियम, जिंक और फोलेट की सबसे ज़्यादा जरूरत होती है। किसी भी एक न्यूट्रीएंट की कमी उनकी बॉडी डेवलपमेंट को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। इसलिए अपनी बेटी को पोषण से भरपूर बैलेंस डाइट लेने के बारे में ज़रूर बताएं और आदत डलवाएं।
एडिक्शन

एक रिसर्च के अनुसार जिन लोगों के मस्तिष्क में डोपामाइन हार्मोन की मात्रा ज़्यादा होती है और इसके प्रति कम संवेदनशीलता होती है, वे एडिक्टिव बिहेवियर, ड्रग मिसयूज और दूसरे कई तरह के नशे के की तरफ आकर्षित हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में आपको अपनी बेटी को नशे की लत की खामियों से अच्छी तरह अवगत कराना होगा। उसे यह बताना होगा कि नशे की वजह से उनके शरीर को कौन-कौन सी परेशानियां झेलनी पड़ सकती है।
