Pica Disorder in Children: बचपन में हम सबने गमले की मिट्टी, चॉक और बत्ती खाई होगी। ये एक सामान्य आदत हैं जो अक्सर अधिकांश बच्चों में पाई जाती है। लेकिन जब ये आदत हद से ज्यादा बढ़ जाए तो ये पीका डिस्ऑर्डर का संकेत हो सकता है। पीका डिस्ऑर्डर एक मेंटल हेल्थ कंडीशन है, जो व्यक्ति को मजबूरन नॉन-फूड आइटम्स खाने के लिए प्रेरित करती है। ये विशेष रूप से बच्चों में देखने को मिलती है। सामान्यतौर पर ये आदत हानिरहित होती है लेकिन जरूरत से ज्यादा नॉन-फूड आइटम्स का सेवन खतरनाक हो सकता है। पीका डिस्ऑर्डर का शिकार अधिकतर 6 साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं। अधिकांश बच्चे मिट्टी, पेंट, बॉल, प्लास्टिक, लकड़ी और कागज खाना पसंद करते हैं। बच्चे की ऐसी आदत को पहचानना कई बार मुश्किल हो जाता है लेकिन कुछ लक्षणों से इसकी पहचान की जा सकती है तो चलिए जानते हैं इसके बारे में।
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क्या है पीका डिस्ऑर्डर

पीका एक खाने का विकार है जिसमें बच्चा अनिवार्य रूप से ऐसी चीजें खाता है जो खाने योग्य नहीं होती हैं, और जिसकी न्यूट्रीशिनल वेल्यू न के बराबर होती है। कोई बच्चा ऐसा क्यों और कब करता है इसके आधार पर डिस्ऑर्डर की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस डिस्ऑर्डर को लत से जोड़ा गया है। जब बच्चे को किसी विशेष चीज को खाने की आदत हो जाती है तो वह उसे खाने की जिद्द पकड़ लेता है। कई मामलों में ये खतरनाक भी हो सकता है।
पीका डिस्ऑर्डर के कारण
– एनीमिया
– इलेक्ट्रोलाइट इमबैलेंस
– आयरन, जिंक और मिनरल्स की कमी
– देरी से मानसिक विकास
– तनाव या एंग्जाइटी
– अनुवांशिक समस्या
– बात मनवाने की जिद्द
– मेंटल हेल्थ कंडीशन
पीका डिस्ऑर्डर के लक्षण
– नॉन फूड आइटम्स का लगातार सेवन
– वजन कम होना
– पेट दर्द की समस्या
– आंतों में संक्रमण
– खाने की जिद्द करना
– छुप कर खाना
– कमजोरी
– कॉन्सटीपेशन
क्या नॉन-फूड आइटम खाते हैं बच्चे
– राख
– बेबी या टैल्कम पाउडर
– चॉक
– कोयला
– मिट्टी या मिट्टी के खिलौने
– अंडे का छिलका
– पूप
– बाल, डोरी या धागा
– बर्फ
– कपड़े धोने का साबुन
– पेंट
– कागज
– कागज या कपड़ा
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पीका डिस्ऑर्डर से कैसे पाएं निजात

बिहेवियरल थैरेपी
बिहेवियरल थैरेपी यानी व्यवहार चिकित्सा वह है जिसमें व्यक्ति को उसके व्यवहार को बदलने में मदद मिलती है। इस थैरेपी के अंतगर्त व्यक्ति को नॉन-फूड आइटम्स से दूरी बनाने के लिए रणनीतियां सिखाई जाती हैं। साथ ही उनके ईटिंग पैटर्न में भी बदलाव किया जा सकता है।
मनोचिकित्सक की मदद
पीका डिस्ऑर्डर एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है जिससे निपटने के लिए मनोचिकित्सक की मदद ली जा सकती है। मनोचिकित्सक समस्या की गंभीरता के अनुसार इलाज करते हैं जिससे कुछ ही सैशन में बच्चे को इससे निजात मिल सकता है।
दें न्यूट्रीशियस फूड
बच्चे में यदि आयरन या जिंक की कमी है तो वह मिट्टी या चॉक खा सकता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को न्यूट्रीशियस फूड दें। बच्चे की डाइट में फाइबर, फैट, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन को मुख्य रूप से शामिल करना चाहिए। विशेष स्थिति में सप्लीमेंट्स का भी सहारा लिया जा सकता है।
