Heavy School Bag
Heavy School Bags Credit: Istock

Heavy School Bag: पढ़ाई का बोझ सिर्फ बच्‍चे के मस्तिष्‍क पर ही नहीं बल्कि कंधों पर भी पड़ रहा है। स्‍कूल बैग के बढ़ते वजन की वजह से बच्‍चों को कई तरह की मानसिक और ऑर्थोपैडिक समस्‍याएं हो रही हैं। हाल ही में हुए एक सर्वे के मुताबिक प्राइवेट स्‍कूलों के बच्‍चों के बैग का वजन 8 किलोग्राम से ज्‍यादा था जबकि शिक्षा विभाग की गाइडलाइन के अनुसार बैग का अधिकतम वजन 5 किलो से ज्‍यादा नहीं होना चाहिए। हेल्‍थ एक्‍सपर्ट के मुताबिक यदि बच्‍चों के बैग का वजन ऐसे ही बढ़ता रहा तो बच्‍चे की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। यदि आपका बच्‍चा भी अपनी उम्र और वेट से अधिक वजन वाला बैग उठा रहा है तो सावधान हो जाएं।  बढ़ते बैग के वजन से बच्‍चे को ये समस्‍याएं हो सकती हैं।

क्‍यों बढ़ रहा है बैग का वजन

Why is the weight of the bag increasing
Why is the weight of the bag increasing

माना जा रहा है कि स्‍कूल प्रशासन और प्राइवेट पब्लिशर्स मिलकर बच्‍चों को सिलेबस के अलावा ऐसी किताबें लेने के लिए मजबूर करते हैं जिनका पढ़ाई से कोई लेना-देना नहीं है। इससे न सिर्फ पढ़ाई का प्रेशर बढ़ रहा है बल्कि बैग का वजन भी दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है।

बच्‍चे को हो सकती हैं ये समस्‍याएं

फिजिकल हेल्‍थ प्रभावित: भारी बैग उठाने से बच्‍चों को सीरियस पोश्‍चर प्रॉब्‍लम्‍स हो सकती हैं। बच्‍चे की रीढ़ अत्‍यधिक प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा बच्‍चा ऑर्थोपैडिक समस्‍याओं का शिकार हो सकता है। बच्‍चा लगातार सिर और कंधे के दर्द की शिकायत कर सकता है।

मानसिक तनाव: बच्‍चे के कंधे पर बढ़ता बोझ उसके मानसिक तनाव का कारण बन सकता है। भारी बैग की वजह से बच्‍चा हमेशा थका हुआ महसूस करता है। उसके गर्दन की मांसपेशियां दर्द हो सकती हैं जिसका प्रभाव उसके मस्तिष्‍क पर पड़ सकता है।

अपर बैक पेन: भारी बैग की वजह से बच्‍चा आगे की ओर झुक कर चलता है जिससे उसके शरीर के ऊपरी हिस्‍से में दर्द हो सकता है। इससे गर्दन और कंधे पर भी असर पड़ता है।

घुटनों पर असर: भारी बैग की वजह से बच्‍चे के घुटनों में दर्द की समस्‍या हो सकती है। बैग का वजन बच्‍चा सह नहीं पाता जिसका प्रभाव उसके ज्‍वांट्स पर पड़ सकता है।

फॉलो करें 10-15 प्रतिशत रूल

शिक्षा विभाग की गाइडलाइन के अनुसार बैगपैक का वजन बच्‍चे के शरीर का 10-15 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। सभी स्‍कूलों को यही रूल फॉलो करना चाहिए।

होना चाहिए स्‍मार्ट बैगपैक

It should be a smart backpack
It should be a smart backpack

– अधिकांश बच्‍चे एक कंधे पर बैग टांगना पसंद करते हैं जिससे उन्‍हें पोश्‍चर प्रॉब्‍लम हो सकती है। इसलिए बच्‍चे को दोनों कंधे पर बैग टांगने के लिए प्रोत्‍साहित करें।

– बच्‍चों के लिए लाइटवेट बैग खरीदें।

– बैग में कई सारे कंपार्टमेंट होने चाहिए ताकि वजन को सही ढंग से विभाजित किया जा सके।

– बैग खरीदते समय ध्‍यान दें कि बैग में वेस्‍ट बेल्‍ट हो ताकि बैग को कमर से भी बांधा जा सके।

स्‍कूल भी अपनाएं ये रूल

– बैग का बोझ कम करने के लिए स्‍कूल की ओर से सही टाइमटेबल जारी किए जाएं। जिससे किताबों का बोझ कम किया जा सके।

– बच्‍चों को स्‍कूल में लॉकर की सुविधा मिलनी चाहिए। जहां बच्‍चे अपनी एक्‍स्‍ट्रा किताबें रख सकें।

– छोटे बच्‍चों को बैगलेस स्‍टडी की सुविधा दी जा सकती है।

– किताबों की अपेक्षा बच्‍चों को कराएं विजुअल लर्निंग और ऑनलाइन स्‍टडी।