Adrishya Lakire
Adrishya Lakire

Hindi Short Story: ऑफिस में मीटिंग खत्म होते-होते काफी देर हो गई थी । प्रिया तेजी से बाहर निकली ।
“अरे ! बारिश शुरू हो गई,” उसने आकाश की ओर देखते हुए बुदबुदाया ।
उसे खड़े-खड़े काफी देर हो गई थी । दूर-दूर तक कोई साधन नजर नहीं आ रहा था । धीरे-धीरे वह आगे बढ़ने लगी बारिश तेज होती जा रही है । उसकी छतरी हवा से पलट जा रही थी । वह पूरी तरह भीग गई थी ।तभी एक कार आकर रुकी ।
” अरे !भाभी जी ..आप कहाँ भीग रहीं हैं.. आइए गाड़ी में बैठिए.. हम उधर ही जा रहे हैं,” मिश्रा जी शीशा खोल कर झाँकते हुए बोले ।
“ओह्ह आप.. नमस्कार भाई साहब .. अरे ! आप परेशान न हो हम चले जाएंगे,” प्रिया कहते हुए आगे बढ़ ली ।
” अरे भाभी बहुत पानी है ..कोई साधन भी नहीं मिलेगा.. आप हमारे साथ चलिए हम छोड़ देंगे,” मिश्रा जी आग्रह कर रहे थे ।
बिजली चमक रही थी.. बादलों की गड़गड़ाहट दहशत उत्पन्न कर रही थी.. बारिश रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी ।
“भाई साहब..बहुत धन्यवाद.. बुरा मत मानिएगा..क्षमा  करिए.. हम स्वयं चले जाएंगे,” प्रिया थोड़ा कठोर होते हुए बोली और तेज कदमों से आगे बढ़ गई ।
” मैं आपके साथ जाना चाहती थी.. पर क्या करूँ.. इस भारी बरसात और तूफानी रात को झेलना फिर भी आसान है ..घर और समाज को झेलना नामुमकिन..मुझमें इन अदृश्य लकीरें लाँघने की हिम्मत नहीं ,” प्रिया मन ही मन बड़बड़ाते हुए .. चारों तरफ पसरे सन्नाटे और भयावह रात को देख रही