बच्चे की भावनाओं का भी करें सम्मान
स्कूल बैग के बोझ के साथ कब बच्चा अपने इमोशंस के बोझ से भी परेशान होने लगता है ये बात माता पिता कई बार नहीं समझ पाते हैं।
Parenting Tips: पहली बार स्कूल जाने पर माता पिता बच्चे को अच्छे से अच्छा स्कूल बैग दिलाते हैं ये सोच कर की उनका बच्चा खुश होगा, लेकिन इस स्कूल बैग के बोझ के साथ कब बच्चा अपने इमोशंस के बोझ से भी परेशान होने लगता है ये बात माता पिता कई बार नहीं समझ पाते हैं। कहीं न कहीं ये भावनाएं पढाई स्कूल या बच्चों के दोस्तों के आस पास ही छुपी होती हैं। बस जरुरत है तो इन्हें समझने की, स्कूल के नो बैग डे से बच्चों के बैग का बोझ कम किया जा सकता है पर उनकी भावनाएं जो कहीं दब गयी हैं उन पर माता पिता कैसे काम करें, आइए जानते हैं।
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हमेशा साथ खड़े रहे

बच्चे के गलत व्यवहार पर उसे चुभने वाले शब्द कहने की जगह प्यार से उसकी गलती का एहसास कराएं, वहीं दूसरी तरफ अच्छे व्यवहार के लिए उसकी तारीफ़ करना ना भूलें, उसे समझाएं की परिस्तिथियां कैसी भी हो आप हमेशा उनके साथ हैं। दूसरों के सामने कटु वचन कहने की जगह अच्छे और प्यार भरे शब्दों का इस्तेमाल करें। इस तरह आपका बच्चा अपनी भावनाएं अच्छे से व्यक्त कर पायेगा और उसमे आत्मविश्वास भरा रहेगा।
बातों बातों में

छोटे बच्चों को समझाना सबसे ज्यादा कठिन काम है। इस काम को आसान बनाने के लिए उनके साथ अलग अलग तरह के खेल खेले जैसे की उनके बारे में अपनी भावनाएं व्यक्त करें और उनसे उनके विचार पूछें किसके साथ वो ज्यादा सहज महसूस करते हैं, किसके साथ उन्हें समय बिताना पसंद है और अपने माता पिता और परिवार में किस से उन्हें डर लगता है, इस तरह बच्चे के मन में छुपा हुआ डर बाहर निकालें।
पैसों का रोना न रोएं

बचपन से ही बच्चों को बचत करना सिखाएं, ये किसी तरह की कंजूसी नहीं जबकि एक जरिया है जिस से आपका बच्चा मेहनत और पैसे की अहमियत समझेगा। बच्चे के सामने पैसों का रोना न रोएं, अमीर गरीब जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से बच्चा हीं भावना से ग्रस्त होने लगता है। बेहतर है की आप उसे बचत के फायदे समझाएं। इस तरह बच्चे की भावनाएं भी आहत नहीं होंगी।
सकारत्मक सोच

बच्चे के सामने हम जैसा व्यवहार करेंगे वो वैसा ही व्यवहार अपनी आदत में शामिल कर लेगा, इसके लिए पूरी तरह से परिवार जिम्मेदार होता है। बाचों के सामने किसी तरह का झगड़ा बहस या अपशब्द ना कहें, इस तरह के आचरण से बच्चे का मन कमजोर हो जाता है, उसकी भावनाएं आहत होने लगती हैं वो धीरे धीरे सबसे अलग हो जाता है और अपनी एक अलग दुनिया बना लेता है। बच्चे के साथ सकारात्मक बातें करें, प्रेम से रहे, परिबार और भाई बहिन की हमारे जीवन में क्या अहमियत है इस बात को समझाएं। सकारात्मकता बच्चे को मजबूत बनाएगी।
स्कूल का डर ना दिखाएं

बच्चों के थोड़ी शैतानी या जिद करने पर बहुत से माता पिता उन्हें स्कूल और टीचर का डर दिखते हैं, इस तरह बच्चे स्कूल जाने से डरने लगते है और अपने दोस्तों, टीचर आदि से दूरियां बना लेते हैं। वो किसी काम में रूचि नहीं लेते और हर बात पर चिचिड़े हो जाते हैं, जिद करना उनकी आदत में शामिल हो जाता है, बच्चे के इस व्यवहार के जिम्मेदार कहीं न कहीं हम बड़े ही हैं। बच्चों के मन में स्कूल दोस्तों और टीचर की एक अच्छी छवि डालें इस तरह बच्चा अपनी भावनाओं को दबाने की जगह आपसे साझा करेगा और वक्त आने पर अपने टीचर और दोस्तों से भी आसानी से साझा कर पायेगा।
