parenting masterclass
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Overview: एक मां ने अपने बेटे को पीरियड्स के बारे में खुले और समझदारी भरे तरीके से सिखाया

एक मां द्वारा अपने बेटे को पीरियड्स जैसी सामान्य लेकिन अक्सर छिपाई जाने वाली प्रक्रिया के बारे में शिक्षित करना, आज की दुनिया में साहस और जागरूकता का उदाहरण है। इस वीडियो ने साबित किया कि पैरेंटिंग सिर्फ बच्चों को अच्छे संस्कार देना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक दुनिया को समझना सिखाना भी है।

Mom Teaches Son about Periods: आज भी समाज में पीरियड्स जैसे प्राकृतिक विषय को लेकर झिझक और गलतफहमियां मौजूद हैं। लेकिन एक मां ने अपने बेटे को इस विषय पर जिस सहजता और संवेदनशीलता के साथ समझाया, उसने लाखों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ यह वीडियो न केवल एक शिक्षा का माध्यम बना, बल्कि यह दिखाने का उदाहरण भी कि सही परवरिश कैसी होनी चाहिए।

वीडियो में दिखा प्यार और समझ का खूबसूरत मेल

Mom Teaches Son About Periods
Mom Teaches Son About Periods

वीडियो में एक मां अपने छोटे बेटे को शांत और सहज भाषा में समझाती है कि पीरियड्स महिलाओं के शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। वह बताती है कि यह किसी बीमारी या शर्म की बात नहीं, बल्कि शरीर का सामान्य हिस्सा है। बच्चे को जिज्ञासु देख, मां ने बड़ी ही सादगी से बताया कि हर महीने लड़कियों को यह होता है ताकि उनका शरीर स्वस्थ रहे और भविष्य में मां बनने के लिए तैयार हो सके।

बेटे की मासूमियत और मां की समझदारी बनी चर्चा का विषय

जब बेटे ने पूछा, “क्या ये दर्द देता है?”, तो मां ने बिना किसी झिझक के कहा, “हां, थोड़ा दर्द होता है, लेकिन हम इसे संभालना सीख जाते हैं।” इस मासूम सवाल और ईमानदार जवाब ने लोगों के दिल छू लिए। नेटिज़न्स ने कहा कि अगर हर मां अपने बेटे को इस तरह समझाए, तो महिलाओं के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता बचपन से ही सिखाई जा सकती है।

सोशल मीडिया पर बरसे तारीफों के कमेंट्स

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने इसे “पैरेंटिंग गोल्स” कहा। हजारों यूज़र्स ने कमेंट्स में लिखा कि इस मां ने जो किया, वह हर घर में होना चाहिए। किसी ने कहा, “ऐसी बातें स्कूल में नहीं सिखाई जातीं, इसलिए घर से शुरुआत जरूरी है।” वहीं कई महिलाओं ने लिखा कि काश उन्हें भी बचपन में ऐसे खुलकर बताया जाता।

समाज में बदलाव की ओर एक कदम

यह वीडियो सिर्फ एक बातचीत नहीं थी, बल्कि समाज में चल रहे टैबू को तोड़ने की दिशा में एक छोटा परंतु महत्वपूर्ण कदम था। मां ने साबित किया कि बदलाव की शुरुआत घर से होती है। जब लड़के बचपन से महिलाओं के शरीर और उनकी प्रक्रियाओं को समझेंगे, तब ही भविष्य में वे सम्मानजनक साथी, बेटे और भाई बन पाएंगे।

शिक्षा का असली मतलब – जागरूकता और सम्मान

मां की यह पहल दिखाती है कि असली शिक्षा सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि सही बातचीत और संवेदना से मिलती है। बच्चों को ऐसे विषयों पर खुलकर बात करने देना उन्हें जीवन के प्रति अधिक संवेदनशील और समझदार बनाता है। यह वीडियो माता-पिता के लिए एक प्रेरणा है कि वे अपने बच्चों से हर विषय पर खुले मन से बात करें।

नेटिज़न्स बोले – “ऐसी मां हर बच्चे को मिले”

लोगों ने वीडियो पर भावनात्मक प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि यह पीढ़ी वही बदलाव लाएगी जिसकी समाज को जरूरत है। “मांओं को सिखाना बंद नहीं करना चाहिए, क्योंकि ज्ञान और समझ की शुरुआत घर से होती है,” एक यूज़र ने लिखा।

मेरा नाम श्वेता गोयल है। मैंने वाणिज्य (Commerce) में स्नातक किया है और पिछले तीन वर्षों से गृहलक्ष्मी डिजिटल प्लेटफॉर्म से बतौर कंटेंट राइटर जुड़ी हूं। यहां मैं महिलाओं से जुड़े विषयों जैसे गृहस्थ जीवन, फैमिली वेलनेस, किचन से लेकर करियर...