An angry mother tries talking while teenage daughter refuses to listen
Teenage girls' attraction to older men: Credit: Istock

Overview: जनरेशन गैप को भरना चाहते हैं तो पेरेंट न करें ये गलती

जनरेशन गैप को कम करने के लिए पेरेंट्स को कुछ गलतियों से बचना चाहिए और स्‍मार्ट टिप्‍स और सलाह से इसे भरने का प्रयास करना चाहिए।

Generation Gap Parenting: पेरेंटिंग एक ऐसी कला है, जो बच्चों के व्यक्तित्व को निखारने और उन्हें अच्छे गुणों को सिखाने में मदद करती है। एक अच्‍छे माता-पिता वही हैं, जो अपने बच्चों की कमियों को दूर करने और अच्छे संस्कार विकसित करने में सहायता करते हैं। लेकिन आज के समय में कई माता-पिता यह मानते हैं कि बच्चों के लिए महंगे कपड़े, स्वादिष्ट भोजन और कोचिंग क्लास की ऊंची फीस देना ही उनकी जिम्मेदारी है। यही वजह है कि बच्‍चों और पेरेंट्स के बीच जनरेशन गैप हो रहा है। जिससे न केवल दोनों के बीच दूरियां बढ़ रही हैं बल्कि बच्‍चे के भविष्‍य के साथ खिलवाड़ भी हो रहा है। इसलिए जनरेशन गैप को खत्‍म करने के लिए पेरेंट्स का तनावमुक्त रहना बेहद जरूरी है। तो चलिए कुछ ऐसी गलतियों पर नजर डालते हैं, जो माता-पिता को जनरेशन गैप को बढ़ाने से रोकने के लिए नहीं करनी चाहिए।

नकारात्मक बातें और सोच

Negative things and thoughts
Negative things and thoughts

“तुम्हें कुछ नहीं आता” या “तुम बेकार हो” जैसे नकारात्मक वाक्य बच्चों के मन को गहरी चोट पहुंचाते हैं। शारीरिक चोटें तो समय के साथ ठीक हो जाती हैं, लेकिन मन पर लगी चोट आसानी से नहीं भरती। इसलिए, बच्चों से बात करते समय हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

हमेशा अतीत में जीना

जो माता-पिता हमेशा अतीत की घटनाओं और अनुभवों में खोए रहते हैं, वे अपने बच्चों से प्रभावी ढंग से कम्‍यूनिकेट नहीं कर पाते। बच्चे अतीत को आसानी से भूलकर वर्तमान में जीते हैं, यही कारण है कि वे हमेशा खुश रहते हैं। लेकिन माता-पिता पुरानी बातों को याद करके तनावग्रस्त रहते हैं। इसलिए, माता-पिता को हमेशा वर्तमान में जीने का प्रयास करना चाहिए।

अपनी गलतियों को न स्वीकार करना

अपनी गलतियों को स्वीकार करने से मन का तनाव कम होता है और बच्चों में हमारे प्रति सम्मान बढ़ता है। बच्चे अपने माता-पिता की नकल करते हैं, इसलिए जब हम अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं, तो वे भी ऐसा करना सीखते हैं। लेकिन जब हम अपनी गलतियों को छिपाते हैं, तो बच्चे सोचते हैं, “मेरे माता-पिता अपनी गलतियां नहीं मानते, तो मैं क्यों मानूं?” इससे बच्चों और माता-पिता के बीच दूरी बन जाती है।

बच्चों में हमेशा कमियां ढूंढना

पेरेंट्स यदि बच्चों की कमियां ढूंढते रहेंगे, तो हम हमेशा तनाव में रहेंगे। इसके बजाय, हमें उनके अच्छे गुणों को देखना और उनकी सराहना करनी चाहिए। इससे बच्चे अपनी कमियों को समझकर उन्हें सुधारने की कोशिश करते हैं।

अधिकारपूर्ण ढंग से बात करना

Speak in an authoritative manner
Speak in an authoritative manner

बच्चों को माता-पिता का अधिकारपूर्ण लहजा पसंद नहीं आता। इसके बजाय, प्यार भरे लहजे में बात करने से बच्चे सहज महसूस करते हैं। अधिकारपूर्ण ढंग से कही गई बातें स्वीकार करना मुश्किल होता है, जबकि प्यार भरी बातें मन को सुकून देती हैं।

अपनी सामाजिक छवि को बनाए रखना

कई माता-पिता अपनी सामाजिक स्थिति को बच्चों के सामने भी बनाए रखने की कोशिश करते हैं। इससे वे बच्चों से खुलकर कम्‍यूनिकेट नहीं कर पाते। माता-पिता को अपनी सामाजिक स्थिति को भूलकर बच्चों के साथ स्वाभाविक रूप से व्यवहार करना चाहिए।

जनरेशन गैप को खत्‍म करेंगे ये स्मार्ट टिप्स

ओपन कम्‍यूनिकेशन: पेरेंट्स बच्चों के साथ खुलकर और दोस्ताना तरीके से बात करें। 

ओपन माइंडेड : पेरेंट्स को अपने बच्चों के विचारों को बिना जज करे सुनना चाहिए। 

धैर्यपूर्ण समझना : पेरेंट्स बच्‍चों की बातों को ध्‍यान से सुनें और समझने का प्रयास करें। 

समय के साथ बदलाव : समय और पीढ़ी के पेरेंट्स को अपने विचार और व्‍यवहार में बदलाव करना चाहिए। वह बच्‍चों के अनुसार खुद को ढाल सकते हैं। 

साझा रुचियां: बच्चों के साथ उनकी रुचियों में भाग लें। 

बिना शर्त प्यार: बच्चों को बिना किसी अपेक्षा के प्यार दें।