Hariyali Amavasya 2025 Puja Muhurat
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Overview: सोलह सोमवार व्रत में नमक क्यों होता है वर्जित?

सावन के शुरू होते ही श्रद्धालु 16 सोमवार व्रत रखना आरंभ करते हैं, और मान्यता है कि इस व्रत में नमक का सेवन वर्जित होता है। क्या आपने कभी सोचा है कि इस नियम के पीछे क्या वजह है? आइए जानें

Solah Somvar Vrat: हिंदू धर्म में उपवास का विशेष स्थान है, और उसमें भी सोलह सोमवार व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव की कृपा प्राप्ति के लिए किया जाता है। सावन के महीने को शिव भक्ति के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है, और इसी दौरान अधिकांश श्रद्धालु सोलह सोमवार का व्रत आरंभ करते हैं। इस उपवास की विधियों में एक प्रमुख नियम है, नमक का त्याग।

बहुत से लोग यह जानते हैं कि सोमवार के दिन नमक नहीं खाना चाहिए, लेकिन इसके पीछे के धार्मिक और वैज्ञानिक कारणों को लेकर भ्रम बना रहता है। आइए, इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि सोलह सोमवार व्रत में नमक का त्याग क्यों किया जाता है और इसके क्या लाभ होते हैं।

सोलह सोमवार व्रत में नमक क्यों होता है वर्जित?

सोलह सोमवार व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक माध्यम माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के दौरान नमक का सेवन करने से भगवान शिव अप्रसन्न हो सकते हैं। यह व्रत न केवल शारीरिक तपस्या का प्रतीक है, बल्कि मानसिक संयम और आस्था की परीक्षा भी है।

जब व्रती नमक जैसे सामान्य भोजन पदार्थ का त्याग करता है, तो यह उसके आत्मसंयम, भक्ति और तप का प्रतीक बन जाता है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि नमक त्यागकर यदि व्यक्ति व्रत करता है, तो उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और उसे शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

सोलह सोमवार व्रत के पीछे का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

जहाँ एक ओर धार्मिक मान्यताएं नमक के त्याग को भगवान शिव की कृपा से जोड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर इसका वैज्ञानिक पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उपवास के दौरान जब शरीर नमक नहीं लेता, तो यह डिटॉक्सिफिकेशन यानी शरीर की अशुद्धियों को बाहर निकालने की प्रक्रिया में सहायक होता है।

नमक शरीर में जल संतुलन और रक्तचाप को प्रभावित करता है। ऐसे में इसके सीमित या शून्य सेवन से शरीर कुछ समय के लिए स्वाभाविक रूप से शुद्ध होने लगता है। यह प्रक्रिया मानसिक शांति, एकाग्रता और शरीर की ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।

क्या सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं?

हालांकि सामान्य नमक (साधारण नमक या टेबल सॉल्ट) व्रत में वर्जित होता है, लेकिन सेंधा नमक को व्रत में स्वीकार्य माना गया है। यह नमक प्राकृतिक होता है और इसे धार्मिक रूप से शुद्ध माना जाता है। बहुत से लोग, जो व्रत में थोड़ा स्वाद चाहते हैं, वे सेंधा नमक का प्रयोग करते हैं। फिर भी, अगर व्रत किसी विशेष कामना या संकल्प के साथ किया जा रहा हो, तो बिना नमक के व्रत करना श्रेष्ठ माना जाता है।

सोलह सोमवार व्रत के लाभ

सोलह सोमवार व्रत को विधिपूर्वक करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से यह व्रत मनोकामना पूर्ति, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य में सुधार और समृद्धि देने वाला माना जाता है। अविवाहित कन्याएं इस व्रत को आदर्श जीवनसाथी प्राप्ति के लिए करती हैं, वहीं विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और गृहस्थ जीवन की सुख-शांति के लिए इसका पालन करती हैं।

इसके साथ ही, यह व्रत व्यक्ति में आत्मसंयम, धैर्य और भक्ति भावना को भी प्रबल करता है। शरीर के साथ-साथ मन भी शुद्ध होता है और व्यक्ति शिव भक्ति के मार्ग पर अग्रसर होता है।

मैं आयुषी जैन हूं, एक अनुभवी कंटेंट राइटर, जिसने बीते 6 वर्षों में मीडिया इंडस्ट्री के हर पहलू को करीब से जाना और लिखा है। मैंने एम.ए. इन एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया है, और तभी से मेरी कलम ने वेब स्टोरीज़, ब्रांड...