Generation beta baby meaning
Generation beta baby meaning

Overview:

पेरेंट्स बच्चों के लिए सब करना चाहते हैं, लेकिन उनकी और बच्चों की सोच में जनरेशन चेंज के कारण बड़ा अंतर आ जाता है। कई बार वह उसे समझ नहीं पाते और यहीं से शुरू हो जाती हैं प्रॉब्लम्स। अभी तक जेन जी की सोच में खुद को ढालने की कोशिश करने वाले पेरेंट्स को अब जेन-बीटा के लिए खुद को तैयार करना होगा।

Gen Beta Parenting: पेरेंटिंग कोई आसान काम नहीं है। वैसे तो हर माता-पिता की पूरी कोशिश होती है कि वह बच्चों के लालन पालन में कोई कमी न छोड़ें, लेकिन कई बार समस्या आती है दो जनरेशन के अंतर को लेकर। दरअसल, पेरेंट्स बच्चों के लिए सब करना चाहते हैं, लेकिन उनकी और बच्चों की सोच में जनरेशन चेंज के कारण बड़ा अंतर आ जाता है। कई बार वह उसे समझ नहीं पाते और यहीं से शुरू हो जाती हैं प्रॉब्लम्स। अभी तक जेन जी की सोच में खुद को ढालने की कोशिश करने वाले पेरेंट्स को अब जेन-बीटा के लिए खुद को तैयार करना होगा। जी हां, जेन जी और अल्फा अब पुरानी जनरेशन हो चली है। साल 2025 में जन्म लेने वाली जनरेशन कहलाएगी ‘जेन बीटा’। ऐसे में हर पेरेंट्स को कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना होगा।

ये कहलाएंगे जेन बीटा

साल 2025 में जन्म लेने वाले बच्चों की नई जनरेशन 'जनरेशन बीटा' कहलाएगी।
The new generation of children born in the year 2025 will be called ‘Generation Beta’.

सबसे पहले आप ये जान लें कि आखिर जेन बीटा की श्रेणी में कौन आएगा। साल 2025 में जन्म लेने वाले बच्चों की नई जनरेशन ‘जनरेशन बीटा’ कहलाएगी। इस श्रेणी में साल 2025 से साल 2039 तक जन्‍मे बच्‍चों को शामिल किया जाएगा। साल 2013 से 2024 तक के बीच की जनरेशन को जेन अल्फा बोला जाता है। वहीं साल 1997 से 2012 के बीच जन्मी जनरेशन जेन जी की श्रेणी में आती है। साल 1981 से 1996 तक के बीच पैदा हुए लोगों को मिलेनियल्स कहा जाता है। ऐसे में साफ है कि साल 2025 में जन्म लेने वाली जेन बीटा के लिए अधिकांश मिलेनियल्स को नए सिरे से तैयारी करनी होगी।

जनरेशन बीटा की परवरिश पर ऐसे दें ध्यान

जनरेशन बीटा की परवरिश जहां आसान होगी, वहीं इसमें पेरेंट्स को कई चुनौतियों का सामना भी करना होगा। इसका कारण है तकनीक में आ रहे बदलाव और गैजेट्स की जिंदगी में घुसपैठ। ऐसे में पेरेंट्स को ये 5 बातें ध्यान में रखनी होंगी।

1. बैलेंस लाइफस्टाइल जीना सिखाएं

जनरेशन बीटा के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी लाइफस्टाइल को बैलेंस करना। इस स्थिति में पेरेंट्स की जिम्मेदारी काफी बढ़ जाती है। आपको बचपन से ही बच्चे को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के बारे में समझाना होगा। उन्हें स्क्रीन और गैजेट्स का सीमित उपयोग करने की शिक्षा देना इसमें सबसे महत्वपूर्ण होगा। इसी के साथ उन्हें हमउम्र बच्चों के साथ खेलना, बातें करना, एक-दूसरे की मदद करना आदि सिखाना होगा। इससे वे न सिर्फ शारीरिक तौर पर हेल्दी रहेंगे, बल्कि उनका मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा।

2. भरने दें सोच को उड़ान

आपने महसूस करा होगा कि आज की जनरेशन और आपकी जनरेशन की सोच में बड़ा अंतर है। यह अंतर सिर्फ जीवन जीने के तरीके में नहीं नजर नहीं आता, बल्कि आपको उनके इनोवेशन में भी इसकी झलक दिखेगी। इसलिए आप उनकी सोच के पंखों को ऊंची उड़ान भरने दें। उन्हें बात-बात पर टोके नहीं। इससे उनका आत्मविश्वास बना रहता है, जो सफल होने के लिए बहुत जरूरी है।

3. नहीं करें दूसरे बच्चों से तुलना

अपने बच्चों की तुलना आप किसी से न करें। जब जेन अल्फा को किसी से तुलना करना पसंद नहीं है तो ऐसे में जेन बीटा तो इससे भी आगे की जनरेशन है। इसलिए पेरेंट्स को समझना होगा कि कंपेरिजन से आप बच्चों को मोटिवेशन नहीं दे रहे हैं, बल्कि उन्हें कमजोर कर रहे हैं। इससे बच्चों का कॉन्फिडेंस टूट सकता है। उनकी सेल्फ रिस्पेक्ट को ठेस पहुंच सकती है।

4. बच्चों को सही तरीके से करें प्रोत्साहित

जेन बीटा को मोटिवेट करने के लिए आपको उनकी कमियां गिनाने की जगह खूबियों पर फोकस करना होगा। इससे बच्चों को आगे बढ़ने का उत्साह मिलेगा। यह परवरिश का एक पॉजिटिव तरीका है।

5. दोस्त बनें, समय दें

आज के सिंगल चाइड के दौर में पेरेंट्स की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों पूरा समय दें। उनके साथ खेलें, बातें करें, उन्हें समझें। सबसे जरूरी है उनके दोस्त बनें। इससे बच्चा अकेलापन महसूस नहीं करेगा। अपनी परेशानियां आपको बताएगा। हालांकि इस दौरान सीमाएं तय करना और बच्चों को अनुशासन सिखाना न भूलें।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...