Kids In Depression: लोगों का मानना है कि तनाव और चिंता सिर्फ अधिक उम्र के लोगों को ही होती है लेकिन ऐसा नहीं है। तनाव किसी भी उम्र में और किसी को भी हो सकता है। कई बच्चे छोटी उम्र में ही तनाव और डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। यदि आपका बच्चा जरूरत से ज्यादा शांत और सहमा हुआ रहता है तो ये लक्षण डिप्रेशन के हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। डिप्रेशन एक मूड डिसऑर्डर है जिसमें बच्चे को तनाव और एंजाइटी महसूस हो सकती है। आमतौर पर डिप्रेशन की समस्या युवाओं को होती है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में छोटे बच्चों की संख्या में बेहद उछाल आया है। ऐसे में पेरेंट्स को अपने बच्चे के व्यवहार और नजरिये को लेकर जागरुक होने की आवश्यकता है। डिप्रेशन के शिकार बच्चे में कौन से लक्षण सामान्य रूप से दिखाई देते हैं चलिए जानते हैं इसके बारे में।
डिप्रेशन के लक्षण

गुस्सा या चिढ़ना: डिप्रेशन से ग्रस्त बच्चे छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाते हैं और चिल्लाने लगते हैं। उन्हें पेंरेंट्स का टोकना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। वह झुंझलाहट में गलत भाषा का भी उपयोग करने लगते हैं।
शांत और उदास: जिन बच्चों को डिप्रेशन की समस्या होती है वह जरूरत से ज्यादा शांत दिखाई देते हैं। उन्हें अकेला रहना और किसी से बात न करना अच्छा लगता है। इस स्थिति में बच्चे बात-बात पर रो देते हैं और अपना गुस्सा जाहिर करते हैं। वह पार्टी और भीड़ में भी उदास नजर आते हैं।
खुद में उलझना: ये एक ऐसी समस्या है जिसमें बच्चे अपनी ही समस्याओं में उलझे रहते हैं लेकिन दूसरों को बताने में हिचकिेचाते हैं। डिप्रेस्ड बच्चे छोटी-छोटी परेशानियों को बड़ा बना देते हैं जिससे उनका तनाव का स्तर काफी बढ़ जाता है।
खानपान में बदलाव: डिप्रेशन से गुजर रहे बच्चों का भूख का पैटर्न बदल सकता है। वह तनाव की स्थिति में अधिक खाना खा सकते हैं या उनके खाने की इच्छा पूरी तरह से समाप्त हो सकती है। डिप्रेशन में अधिकांश बच्चे ओवरइटिंग करते हैं।
सिर में दर्द: डिप्रेशन की स्थिति में व्यक्ति के सिर में लगातार दर्द बना रहता है। उसे सोने और जागने में परेशानी हो सकती है। कुछ बच्चों को माइग्रेन की समस्या भी हो सकती है।
बच्चों में डिप्रेशन का कारण

– हार्मोनल असंतुलन जैसे सेरोटोनिन, डोपामाइन और नॉरपेनेफ्रिन में उतार-चढ़ाव के कारण डिप्रेशन हो सकता है।
– डिप्रेशन का पारिवारिक इतिहास रखने वाले बच्चे अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। अनुवांशिक कारण भी मुख्य भूमिका निभा सकता है।
– डिजीटल उपकरणों का अधिक उपयोग और तनाव भी डिप्रेशन को बढ़ावा दे सकता है।
– चाइल्ड एब्यूज और स्कूल में बुली करना भी बच्चे को तनाव में डाल सकता है।
– बचपन में किसी अप्रिय दुर्घटना को करीब से देखने से भी बच्चे सहम जाते हैं।
पेरेंट्स रखें इन बातों का ध्यान
– बच्चे को यदि डिप्रेशन की समस्या है तो उन्हें कभी भी अकेला न छोड़ें।
– बच्चे की मनोस्थिति को ध्यान में रखते हुए अपने व्यवहार में बदलाव करें।
– बच्चों का भावनात्मक सपोर्ट करें।
– बच्चे की हर गतिविधियों को पैनी नजर रखें।
– बच्चे का सही ट्रीटमेंट करवाएं।
– तनाव और डिप्रेशन का कारण जानने की कोशिश करें।
– बच्चे के दोस्तों और स्कूल प्रशासन से बात करें और तनाव की जड़ तक पहुंचें।
