जब एक कपल पैरेंट्स बनते हैं तो उनकी जिन्दगी में काफी कुछ बदल जाता है। उनकी ना केवल आर्थिक जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, बल्कि बच्चे की परवरिश से लेकर उसकी हर छोटी-बड़ी बात को लेकर पैरेंट्स चिंतित रहते हैं। इस स्थिति में कभी-कभी कपल्स के भीतर चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है, वहीं कभी-कभी उनके आपसी मुद्दे या बच्चे की परवरिश के तरीकों को लेकर भी कपल्स के बीच बहस हो जाती है। ऐसा होना सामान्य है और लगभग हर पैरेंट्स को इस दौर से गुजरना पड़ता है। लेकिन जब आप अपनी बहस या लड़ाई बच्चों के सामने ही शुरू कर देते हैं तो इससे बच्चे के मन-मस्तिष्क पर विपरीत और बेहद गहरा प्रभाव पड़ता है। जो ना केवल उन्हें उस समय दुखी करता है, बल्कि इससे उनका भविष्य भी प्रभावित होता है। ऐसे बच्चों का स्वभाव अन्य बच्चों की अपेक्षा काफी अलग होता है। वह या तो बेहद गुमसुम या अकेले रहना पसंद करते हैं तो वहीं कुछ बच्चों का स्वभाव बेहद गुस्सैल व चिड़चिड़ा हो जाता है। तो चलिए आज हम आपको बच्चों के सामने पैरेंट्स के बीच होने वाली लड़ाई का प्रभाव और उसके उपायों के बारे में बता रहे हैं-

खुद को कोसते हैं बच्चे

जब माता-पिता बच्चों के सामने झगड़ा करते हैं और अपनी लड़ाई में बच्चों का जिक्र करते हैं तो ऐसे में बच्चे खुद को ही कोसने लगते हैं। उन्हें ऐसा लगने लगता है कि उनके पैदा होने के कारण ही अब उनके पैरेंट्स के बीच में प्यार नहीं है और इस तरह वह एक तरह के अपराधबोध व नकारात्मकता का शिकार होने लगते हैं।

बैड प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स

यह तो हम सभी जानते हैं कि बच्चे अपने बड़ों को देखकर ही सीखते हैं। आप जो बच्चों से कहते हैं, उसका असर बच्चे पर उतना नहीं होता, जितना कि आपके करने का। बच्चे अपने पैरेंट्स को कॉपी करने की कोशिश करते हैं। इसलिए, जब बहुत छोटे बच्चे अपने माता-पिता के झगड़े को देखते हैं तो उनके भीतर बैड प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स डेवलप होते हैं। उन्हें ऐसा लगने लगता है कि किसी भी समस्या को हल करने के लिए चिल्लाना या गुस्सा करना सबसे बेहद उपाय है। ऐसे में वह अपनी समस्याओं के हल के लिए इसी रास्ते को अपनाते हैं, जिसके कारण उन्हें आगे चलकर अपनी पर्सनल व प्रोफेशनल लाइफ में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

मानसिक समस्याएं

जो बच्चे बचपन से ही अपने घर में घरेलू हिंसा या माता-पिता के झगड़े को देखते हैं तो इससे उनके भीतर कई तरह की मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे बच्चों के मन में नकारात्मकता की भावना पनपने लगती है और फिर वह अवसादग्रस्त भी हो जाते हैं। इतना ही नहीं, ऐसे बच्चों का अपने व्यवहार पर कोई संयम नहीं होता। वह किसी छोटी सी बात पर रो सकते हैं या फिर वह चिल्लाना शुरू कर सकते हैं।

रिश्तों में अविश्वास

यह भी एक समस्या है, जो ऐसे बच्चों में देखने को मिलती है। ऐसे बच्चों में तीन तरह की भावनाएं पैदा हो सकती हैं। पहला- पैरेंट्स को झगड़ते हुए देखकर बच्चों के मन में रिश्तों के प्रति अविश्वास पैदा हो सकता है। वह बड़े होकर किसी के साथ भी रिश्ते में बंधने से डरते हैं और अकेले रहना अधिक पसंद करते हैं। इसके अलावा, ऐसे बच्चों में रिश्तों के प्रति एक डर भी पैदा हो सकता है। चूंकि ऐसे बच्चों का आत्मविश्वास काफी कम होता है, इसलिए वह अपने प्रेमी के सामने किसी भी बात को कहने से डरते हैं या फिर अपने प्रेमी के छोड़कर चले जाने के डर से वह उसकी हर नाजायज बात को भी मान लेते हैं। वहीं, ऐसे बच्चे बड़े होकर अपने रिश्ते में आक्रामक भी हो सकते हैं, क्योंकि वह बचपन से अपने माता-पिता को चीखते-चिल्लाते हुए देखकर बड़ा हुआ है, इसलिए वह अपने साथी के साथ भी ऐसा ही व्यवहार कर सकता है और हो सकता है कि उसे इसमें कुछ गलत भी ना लगे। जिससे वह अपने रिश्ते में सफल ना हो सके।

शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं

ऐसे बच्चों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी देखी जाती है। दरअसल, अपने माता-पिता को झगड़ता हुआ देखकर उनके मन में निराशा छाने लगती है और फिर वह अपनी उस निराशा को दूर करने के लिए अन्य चीजों में खुशी ढूंढने की कोशिश् करने लगते हैं। मसलन, ऐसे बच्चे अक्सर भोजन में आराम पाने लगते हैं, या तो वे खाना बंद कर देते हैं या अधिक खा लेते हैं। जिससे वे सिरदर्द या पेट दर्द से पीड़ित हो सकते हैं। उन्हें रात में सोने में भी परेशानी हो सकती है। माता-पिता के बीच लड़ाई बच्चों में फोबिया आदि जैसे व्यवहार संबंधी मुद्दों को जन्म दे सकती है।

पढ़ाई में कमजोर होना

माता-पिता के बीच लगातार झगड़े बच्चे के दिमाग पर एक नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। जिससे उनके मन में भय और अनिश्चितता समा जाती है। अक्सर बच्चे अपने माता-पिता के झगड़े के बारे में ही सोचते रहते हैं और फिर उनके लिए किसी भी काम में पूरी तरह से ध्यान लगा पाना काफी मुश्किल होता है। नतीजन, वह पढ़ाई में भी काफी कमजोर रह जाते हैं।

यूं करें समस्या का निपटारा

  • सबसे पहले तो हर पैरेंट्स को एक नियम बना लेना चाहिए कि उनके बीच में चाहे कितने भी मतभेद क्यों ना हो, लेकिन इसका डिस्कशन वह कभी भी बच्चों के सामने नहीं करेंगे।
  • वहीं, आप दोनों को यह भी समझना होगा कि हर वक्त झगड़ते रहने से किसी भी समस्या का हल नहीं निकलेगा, बस आपके रिश्ते में कड़वाहट ही बढ़ेगी। इसलिए झगड़ने की जगह बातचीत का रास्ता अपनाएं।
  • जब आप मिलकर बात करें तो एक-दूसरे की गलतियां गिनाने की जगह उन मुद्दों पर बात करें, जिसके कारण आपके बीच समस्या बनी हुई है। जब आप सही मुद्दों पर बात करेंगे तो समस्या का हल ढूंढने में मदद मिलेगी।
  • अपने रिश्ते में वास्तविक समस्या को जानने के बाद आप दोनों मिलकर ऐसा रास्ता ढूंढें, जिसमें आप दोनों सहज हों। कभी भी एक पार्टनर अपनी मर्जी दूसरे पर ना थोपे, क्योंकि इससे समस्या का हल नहीं निकलेगा।

 

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