A father angrily lectures his teenage children
Father Stress Impact on Child Behavior

Summary: पिता के तनाव का बच्चों पर अनदेखा असर

पिता का रोज़ का मानसिक तनाव बच्चों में डर, चिड़चिड़ापन, असुरक्षा और भावनात्मक दूरी जैसे व्यवहारिक बदलाव पैदा करता है।

Father Stress Impact on Child: हमारे समाज में पिता के नाम से बच्चों को डराना एक आम धारणा है। पढ़ाई कर लो पापा आने वाले हैं, टीवी बंद करो, लड़ाई मत करो, पापा के आने से पहले यह काम खत्म करो। इस तरह का वातावरण भारतीय परिवार में आम है। बच्चों में पिता के व्यवहार से उपजा डर अक्सर बच्चों का उनसे दूरी का कारण होता है। और पेरेंट्स समझ बैठे हैं कि वह अपने पिता का सम्मान करते है, इसलिए उनके सामने चुप रहते हैं। आईए जानते हैं इस लेख में किस तरह पिता का तनावपूर्ण व्यवहार बच्चों में बदलाव लाता है।

Parents sit turned away, while a silent, sad child sits between them
Father Stress Impact on Child Behavior

घर परिवार की जिम्मेदारियां, एक अच्छे आए की कमी, नौकरी की अनिश्चित, आर्थिक खींचतान यह सभी एक पुरुष के तनाव का कारण है। लेकिन इसके अलावा एक मुख्य कारण है अपने भावनाओं को साझा ना करना। हर वक्त खुद को कठोर दिखाना।

हमारे समाज में पुरुषों को रोने, थकने या यह कहने की, कि मुझे भी मदद चाहिए आजादी नहीं दी गई। उन्हें सिखाया ही नहीं गया की भावना स्त्री और पुरुष नहीं देखता वह सभी में होता है। उसे दिखाना, जताना या कहना सभी के लिए जरूरी है।

पुरुष की जिम्मेदारियों के साथ अपने भावनाओं को नजरअंदाज करना उनके तनाव का मुख्य कारण है जो कि उनके व्यवहार में झलकता है।

ऐसा नहीं है कि बच्चा पिता के 1 दिन के व्यवहार से डरना सीख जाता है या उनसे दूरी बना लेता है। बल्कि यह लगातार चलने वाली एक प्रक्रिया है, जिसे भारतीय समाज में सामान्य मान लिया जाता है। जैसे पिता के आते ही बच्चे को प्यार करने के बजाय डांटते हुए पढ़ने के लिए कहना या फिर टीवी, फोन बंद करके रूम में जाने के लिए कहना। बच्चों के कुछ पूछने पर पिता का जवाब ना देना या गुस्से में मना करना। बच्चों के खेल में साथी बनने की बजाय झुंझला कर उसे बंद करने के लिए कहना। हर समय पिता का बच्चों के साथ चिड़चिड़ा व्यवहार उनके मासूम भावनाओं को आहत करता है और बच्चा खुद पिता का सामना करने से बचने लगता है।

भावनात्मक विकास में बाधा: पिता के चिड़चिड़े स्वभाव को बच्चा सामान्य मान लेता है। उसे लगता है कि चुप रहना, गुस्सा करना या खुद की चुप्पी से दूसरों को कंट्रोल करना एक सामान्य स्थिति है। बच्चों में भावनाओं के प्रति इस तरह की सोच उसे भावनात्मक रूप से कमजोर करती है। यहां तक की बच्चा कंट्रोल को प्यार समझ लेता है जो कि बच्चों के भविष्य के लिए खतरनाक है।

पिता से भावनात्मक दूरी: बच्चा पिता के डर से उसकी सारी बात मानता है पर बच्चों में पिता के प्रति यह सोच सामान्य हो जाती है कि पिता के पास मेरे लिए समय नहीं है। वह कभी मुझसे नहीं पूछते, मैं क्या चाहता हूं। रिश्ते में इस तरह की स्थिति पिता और बच्चे के बीच सिर्फ जरूरत तक सीमित हो जाती है।

उग्र व्यवहार: पिता का तनाव बच्चों को उग्र बना सकता है। हो सकता है बच्चा पिता के आगे डरा, सहमा रहे परंतु प्रतिक्रिया के तौर पर वह बाकी रिश्ते में ज्यादा उग्र, मारपीट या चिल्लाने वाला व्यवहार अपनाएं।

इंसान बने सुपर हीरो नहीं: अगर बच्चा आपसे साथ खेलने की मांग कर रहा है और आप थके हों, तो उसे कहे बेटा में थका हूं थोड़े समय बाद खेलते हैं। या कहें प्लीज मुझे थोड़ा आराम का समय दो मैं थका हुआ हूं इसके बाद हम साथ में खेलेंगे।

बच्चों के साथ आप अपने भावनाओं को खुलकर साझा करें। ताकि बच्चा भी सीखे की भावनाओं को छुपाने से नहीं उन्हें बताने से सही रास्ता निकलता है।

बच्चों के साथ समय: आप हर रोज बिना फोन या टीवी के बच्चे के साथ 25 से 30 मिनट गुजारे इस दौरान आप उनसे बातें करें या उनके साथ कोई गेम खेलें।

अपने पार्टनर के साथ अपना रिश्ता बेहतर करें। कई बार पति-पत्नी का आपसी तनाव बच्चे पर डांटने या चिल्लाने के रूप में निकलता है।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...