Jaisalmer Tour: राजस्थान में एक ऐसा शहर है जो सूरज की रोशनी पड़ते ही सोने सा चमकने लगता है। इस खूबसूरत शहर का नाम है जैसलमेर। अपनी शानदार हवेलियों, महल और रेगिस्तान के कारण यह शहर सिर्फ भारत ही नहीं दुनियाभर में मशहूर है। जैसलमेर एक ऐसा शहर है जहां लोगों के ‘निजी निवास’ विश्व प्रसिद्ध है। यही कारण है कि यहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। अगर आप सच में धरती धोरां री देखना चाहते हैं तो यहां आना बेस्ट ऑप्शन है। थार मरुस्थल के बीच बसा जैसलमेर, अपनी पीले पत्थर की इमारतों और रेत के धोरों पर ऊंटों की कतारों के लिए मशहूर है।
ऐसे बसा यह खूबसूरत शहर

शहर का सबसे प्रमुख आकर्षण है जैसलमेर का किला जिसे सोनार किला-द गोल्डन फोर्ट कहा जाता है। यह किला कई मायनों में भारत में मौजूद अन्य किलों से अलग है। यह सिर्फ किला ही नहीं है बल्कि अपने आप में पूरा शहर है। जी हां, इस किले के अंदर ही दुकानें, होटल और प्राचीन हवेलियां आज भी मौजूद हैं। जिनमें आज भी लोग रहते आ रहे हैं। इस खूबसूरत शहर का इतिहास 12वीं शताब्दी से भी पहले से मिलता है। देवराज के रावल और वारिस रावल जैसल के एक छोटे सौतेले भाई को लोदुरवा का सिंहासन दे दिया गया था। ऐसे में वे अपना राज्य स्थापित करने के लिए नया स्थान खोजने लगे। जब वे ऋषि ईसल के पास आए तब ऋषि ने उन्हें भगवान कृष्ण की उस भविष्यवाणी के बारे में बताया। जिसमें कहा गया था कि यदुवंश के वंशज इस स्थान पर एक नया राज्य बनाएंगे। 1156 में रावल जैसल ने यहां एक मिट्टी के किले का निर्माण करवाया जिसका नाम जैसलमेर रखा और उन्होंने इसे अपनी राजधानी घोषित कर दिया।
सरताज है जैसलमेर का किला

वक्त के थपेड़े खाने के बावजूद यहां की कला, संस्कृति, किले, हवेलियां और सोने जैसी माटी, बार-बार जैसलमेर आने के लिए आमंत्रित करती है। यहां की रेत के कण-कण में पिछले आठ सौ वर्षों के इतिहास की गाथाएं छिपी हुई हैं। जैसलमेर का किला एक वर्ल्ड हैरिटेज साइट है। थार मरुस्थल के त्रिकुटा पर्वत पर खड़ा यह किला बहुत सी ऐतिहासिक लड़ाइयां देख चुका है। सूरज की रोशनी जब इस किले पर पड़ती है तो यह पीले बलुआ पत्थर से बना होने के कारण सोने जैसा चमकता है। इसलिए इसे सोनार किला या गोल्डन फोर्ट कहते हैं। अस्तांचल में जाता सूर्य भी अपने उजास से किले को अद्भुत सौंदर्य दे जाता है। बेजोड़ शैली में निर्मित यह किला स्थानीय कारीगरों द्वारा शाही परिवार के लिए बनाया गया था।
विश्व धरोहर स्थल
सोनार किला एक विश्व धरोहर स्थल है। महान फिल्मकार सत्यजीत रे की प्रसिद्ध फिल्म फेलुदा में सोनार किला का विशेष उल्लेख है। इसके अलावा भी यहां बहुत सी फिल्मों की शूटिंग की गई है। इस किले के सामने हर वर्ष राजस्थान पर्यटन विभाग की ओर से फरवरी माह में डैजर्ट फैस्टिवल मनाया जाता है। इस उत्सव में ऊंट दौड़, ऊंट श्रृंगार, पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता तथा विभिन्न प्रकार के नृत्य व संगीत के कार्यक्रम होते हैं। इस उत्सव में हजारों की संख्या में देशी व विदेशी पर्यटक यहां आते हैं।
अपने आप में अजूबा है पटवा की हवेली

जैसलमेर में बनी पटवा की हवेली अपने आप में अजूबा है। यह हवेली आपको सालों पहले के ठाठ बाट और वैभव का एहसास करवा देगी। इस हलेवी का हर एक हिस्सा, हर एक कोना इतनी बारीकी और सुंदरता से बनाया गया है कि आपकी नजरें इससे नहीं हट पाएंगी। सालों पहले उस समय के कारीगरों की यह बारीक कारीगरी देखकर आपका दिल खुश हो जाएगा। खास बात ये है कि इस एक हवेली में ही पांच अलग-अलग हवेलियां बनी हैं, जिन्हें उस समय के मशहूर सेठ गुमान चंद पटवा ने अपने पांच बेटों के लिए बनवाया था। कहा जाता है कि इस शानदार हवेली को बनाने में 50 साल का लंबा समय लगा था। जैसलमेर में सबसे बड़ी और सबसे खूबसूरत नक्काशीदार हवेली यही है। इसे देखे बिना आपका ट्रिप अधूरा ही कहा जाएगा। जैसलमेर की ये पहली हवेली है, जो पांच मंजिला है।
प्रधानमंत्री की नथमल जी की हवेली

जैसलमेर की दूसरी सबसे मशहूर हवेली है नथमल जी की हवेली। यह हवेली जैसलमेर राज्य में प्रधानमंत्री दीवान मोहता नथमल के रहने के लिए बनाई गई थी। महारावल बेरीसाल की ओर से इस शानदार हवेली का निर्माण करवाया गया था। इसकी वास्तुकला को निखारा दो भाइयों हाथी और लूलू ने। हवेली के मुख्य द्वार पर पत्थर के दो हाथी देखकर लगता है कि वे आपका ही स्वागत कर रहे हैं। इस बेमिसाल हवेली का निर्माण 19वीं शताब्दी में करवाया गया था। इस हवेली पर हो रही नक्काशी अन्य हवेलियों से काफी अलग है। इसे करीब से देखना आपको रोमांचक लगेगा।
मोर पंख जैसी है सालिम सिंह की हवेली

जैसलमेर रेलवे स्टेशन के पास स्थित है शानदार सालिम सिंह की हवेली। यह हवेली मशहूर है अपने मोर के पंखों जैसी गोलाई लिए छज्जों और मेहराबों के कारण। करीब 300 साल पुरानी यह हवेली जैसलमेर के एक अन्य प्रधानमंत्री सालिम सिंह का निवास स्थान हुआ करती थी। यह हवेली 18वीं शताब्दी के आरंभ में बनाई गई थी। हवेली का एक प्रमुख हिस्सा अब भी सालिम सिंह के वंशजों के अधीन है। ऊंचे मेहराबदार छत में खांचे बांटकर मोर के आकार से अलंकरण तैयार किये गये हैं। कहा जाता है कि कभी हवेली में लकड़ी की दो मंजिलें और थींए जो इसे महाराजा के महल के समान ऊंचाई प्रदान करती थीं। यही कारण था कि उन्हें ध्वस्त करने का आदेश दे दिया था।
ट्रिप में जरूर शामिल करें ताजिया टावर

अपनी जैसलमेर ट्रिप में ताजिया टावर को शामिल करना न भूलें। यह खूबसूरत महल किसी पत्थर के ताजिए जैसा नजर आता है। करीब 200 साल तक यह शानदार हवादार महल जैसलमेर के राजाओं का निवास स्थान रहा है। इस महल का सबसे खास हिस्सा है ‘बादल विलास’। यह पांच मंजिला इमारत आपका दिल जीत लेगी, क्योंकि इसे बहुत ही खूबसूरती से बनाया गया है। यहां आकर आपको जैसलमेर के हैरिटेज का अनुभव करीब से होगा। जैसलमेर घूमने के लिए आपको कई शानदार बजट फ्रेंडली टूर पैकेज भी मिल जाएंगे। क्योंकि इस खूबसूरत शहर के आस-पास भी देखने लायक कई जगहें हैं। यहां के टैंट रिसोटर्स दुनियाभर में फेमस हैं।
