Summary : पिंचिंग क्या है और इसकी खस बात?
यह कोई आधुनिक तकनीक नहीं बल्कि पुरानी बागवानी कला है जिसमें पौधे की नरम कली को हल्के से तोड़ दिया जाता है। इससे पौधे स्वस्थ और पूरी तरह से मज़बूत बनते हैं।
Benefits of Plant Pinching: हर कोई चाहता है कि उसका बगीचा हरियाली एवम फूलों की खुशबू से भरा रहे। पौधे स्वस्थ और पूरी तरह से मज़बूत दिखें। लेकिन कई बार ऐसा नहीं होता है। पौधे बढ़ते तो हैं लेकिन उनकी संतुलित ग्रोथ नहीं हो पाती है। फूल भी गिने-चुने ही आते हैं। इसका सबसे सरल समाधान है पिंचिंग। यह कोई आधुनिक तकनीक नहीं बल्कि पुरानी बागवानी कला है जिसमें पौधे की नरम कली को हल्के से तोड़ दिया जाता है।
पौधा बनता है झाड़ीदार और संतुलित

पौधे की ऊपरी कली में ऑक्सिन नामक हार्मोन होता है जो उसे ऊपर बढ़ने का संकेत देता है। जब यह कली हटा दी जाती है तो यह हार्मोन साइड की कलियों में सक्रिय हो जाता है। परिणामस्वरूप, पौधा नई शाखाएँ निकालता है और अधिक झाड़ीदार हो जाता है। जहाँ पहले केवल एक तना होता है, अब वहाँ चार से छह शाखाएँ दिखने लगती हैं। तुलसी जैसे पौधों में तो नियमित पिंचिंग से लगभग 30-40% अधिक पत्तियाँ मिलती हैं।
फूल और फल लगने की क्षमता बढ़ती है
जब पौधा एक ही तने पर बढ़ता है तो उसकी पूरी ऊर्जा लंबाई में खर्च हो जाती है। लेकिन पिंचिंग के बाद यह ऊर्जा कई शाखाओं में विभाजित होती है जिससे हर शाखा पर फूल और फल बनने लगते हैं। बैंगन, मिर्च, गुलदाउदी या पेटूनिया जैसे पौधों में यह तकनीक 2-3 गुना ज़्यादा उत्पादन देती है। किसान इसे ब्रांचिंग बूस्ट कहते हैं, क्योंकि एक पौधा कई पौधों जैसा फल देने लगता है।
पौधा संतुलित और मजबूत बनता है

बिना पिंचिंग के पौधे अक्सर 2 फीट तक ऊँचे, कमजोर और झूलते हुए दिखते हैं। पिंचिंग उन्हें संतुलित आकार में रखती है। लगभग 30-50 सेमी ऊँचाई में। इस कॉम्पैक्ट रूप में पौधा न केवल देखने में सुंदर लगता है बल्कि तेज़ हवा या बारिश में टूटने से भी बचा रहता है। साथ ही, ऊर्जा केवल ऊपर नहीं जाती बल्कि जड़ों को भी मज़बूत करती है जिससे पौधा लंबे समय तक स्वस्थ रहता है।
कीट और रोगों से बेहतर सुरक्षा
पिंचिंग से पौधा घना तो होता है लेकिन हवादार भी। पत्तियाँ एक-दूसरे पर चिपकती नहीं जिससे नमी जमा नहीं होती और धूप हर हिस्से तक पहुँचती है। इसका असर सीधा फफूंद और कीटों पर पड़ता है। पौधों में होने वाले ब्लैक स्पॉट जैसे रोग 50% तक कम हो जाते हैं। कीटों को छिपने की जगह नहीं मिलती और पौधा स्वाभाविक रूप से रोग-प्रतिरोधक बन जाता है।
फूलों का मौसम लंबा और लगातार

पिंचिंग केवल एक बार की प्रक्रिया नहीं, यह फूलों के मौसम को बढ़ाने का रहस्य भी है। हर बार जब आप पिंचिंग करते हैं, नई शाखाएँ और कलियाँ निकलती हैं, जिससे फूल लगातार आते रहते हैं। मैरीगोल्ड, जरबेरा या गुलदाउदी जैसे पौधे 4-6 हफ्ते तक खिलते रहते हैं। यदि हर 15 दिन में हल्की पिंचिंग की जाए तो एक पौधा पूरे मौसम भर रंग बिखेर सकता है, बिना नया पौधा लगाए।
पिंचिंग कब और कैसे करें?
जब पौधा लगभग 15-20 सेमी ऊँचा हो जाए, तब पहली 2-3 पत्तियों के ऊपर की नरम कली को हल्के से चुटकी या साफ कैंची से तोड़ें। सुबह का समय सबसे बेहतर होता है। हर 15 दिन बाद यह प्रक्रिया दोहराएँ लेकिन जब पौधा फूल देने लगे तो पिंचिंग बंद कर दें।
बिना किसी रासायनिक खाद या महंगे उपकरण के यह प्रकृति के नियमों के अनुरूप एक सीधी, सटीक बागवानी तकनीक है।
