मेडिकल फंड…वही जो आप अपने परिवार की सेहत के लिए जमा करते हैं। हम यहां पर हेल्थ इंश्योरेंस की बात बिलकुल नहीं कर रहे हैं। हम तो सेविंग की बात कर रहे हैं, जिसे आप अपनी सैलरी से नियम से जोड़ती ही हैं। पॉलिसी में आपने पैसे लगाए होंगे लेकिन यहां मामला कैश सेविंग का है। मेडिकल इमेर्जेंसी के लिए भले ही आपने कितनी भी पॉलिसी क्यों न ली हो लेकिन ऐसा समय आने पर अक्सर कैश की ही जरूरत पहले पड़ती है। तो मेडिकल फंड ठीक इसी समय आपका साथी बन जाता है। पर इस मेडिकल फंड को कैसे तैयार करें कि ये जल्दी और ज्यादा तैयार हो? बस इसी सवाल का जवाब हमारे पास है, चलिए मेडिकल फंड कोई कैसे करना है तैयार जान लीजिए-

कुछ हिस्सा मेडिकल फंड-

जैसे बाकी सेविंग के साथ होता है ठीक वैसे ही कीजिए। अपनी हर महीने की कमाई का कुछ हिस्सा मेडिकल फंड के लिए अलग करना शुरू कर दीजिए। भले ही 1000 रुपए अलग कीजिए लेकिन ऐसा कीजिए जरूर। ईश्वर का आशीर्वाद रहे कि आपको इन पैसों को इस्तेमाल करने की जरूरत ही न पड़े। लेकिन ये पैसे जुड़ते-जुड़ते इतने तो हो ही जाएंगे कि आपकी जरूरत के समय किसी भी तरह की मदद हो सके। कुल मिलाकर ये पैसे जोड़कर फायदा तो आपको ही होगा। इसलिए हर महीने की कमाई का कुछ पैसा मेडिकल फंड के लिए जरूर निकाल दें। शुरुआती दिनों में आपको ये पैसे जेब पर भारी लगेंगे लेकिन कुछ महीनों के बाद आपको ये भारी नहीं लगेगा। फिर आपके खर्चे इसी के हिसाब से सेट हो जाएंगे और आपके लिए ये आसान हो जाएगा।

जब इंश्योरेंस भी ना आए काम-

इंश्योरेंस ज्यादातर बार अस्पताल में एडमिट होने के बाद ही काम आता है। जबकि घर से अस्पताल पहुंचने के बीच में भी काफी खर्चे होते हैं। जो कई बार इतने हो सकते हैं जो सिर्फ पर्स में पड़े पैसों से पूरे भी न हो पाएं। इस वक्त ये मेडिकल फंड आपके काम आता है। इतना ही नहीं अस्पताल से घर के आने के बाद भी कई बार खर्चे खूब होते हैं ये फंड इस वक्त आपकी पूरी मदद करता है।

कमाओ, जोड़ो-

ये बहुत पुराना नियम है कि पहले कमाओ, फिर जोड़ो और फिर खर्च करो। मेडिकल फंड को भी इसी नियम में शामिल कर लीजिए। कमाई में से जोड़ने के मदों वाले पैसे अलग कीजिए तो मेडिकल फंड के लिए पैसे अलग कर कीजिए। मगर बहुत ज्यादा सेविंग से परेशान न हों बल्कि बहुत थोड़ा सा एमाउंट इस फंड के हिसाब से अलग करते रहें। चाहे तो किसी पुराने कम इस्तेमाल होने वाले एकाउंट में पैसे जमा करते रहें। या फिर घर पर सुरक्षित रख सकें तो वहीं पर लॉकर में रख लें। इन पैसों को जमा करना बेहद जरूरी है। आपको इसकी अहमियत जरूर महसूस होगी।

ब्रेक ना लें-

इस महीने नहीं जमा किए तो भी क्या हो जाएगा? ये सोच कर हो सकता है कि आपको लगे कि पैसे तो जोड़ ही लिए हैं। अब एक महीने नहीं भी जोड़े तो क्या हो जाएगा। आपकी ये सोच गलत है। क्योंकि एक महीने की ये कमी हो सकता है कि आपकी आदत बन जाए। फिर कभी हो सकता है आप नियम से ये फंड बना ही नहीं पाए। इसलिए मेडिकल फंड जोड़ें तो ये काम नियम से करें। हर महीने इतने पैसे जमा करने की आदत छोड़ें बिलकुल न। ये सिर्फ आपके काम ही आएगी।

जब हो जाए बड़ी रकम-

अब ये भी हो सकता है कि मेडिकल फंड जोड़ते हुए आपको इसकी जरूरत ही न पड़े। आपको लगे कि इतने पैसे जोड़कर अब रुक जाते हैं। क्योंकि इनकी तो जरूरत ही नहीं पड़ी। लेकिन ठीक इस वक्त आपको अपनी सोच  बदलनी होगी। आप बड़ी रकम को बैंक में फिक्स करा सकते हैं। फिक्स रकम को भी जब मन करे या जब जरूरत हो आप इन्हें तब निकाल भी सकते हैं। आजकल तकरीबन हर बैंक में फ्लेक्सी डिपॉजिट की सुविधा दी ही जाती है। इसलिए इसका फायदा आपको मिलेगा ही। आप बड़ी रकम को फिक्स कर दें और फिर हर महीने वाली रकम जमा करने लगें। ये आदत आपकी दूसरी जरूरतों में भी खूब काम आएगी। जैसे अब कई लोग हर कुछ दिन में ट्रेवल करना चाहते हैं तो उन लोगों को भी इसी तरह पैसे जोड़ने चाहिए।

कुछ प्रतिशत कैश-

मेडिकल फंड जमा करने के लिए जरूरी है कि सेविंग एकाउंट में तो करें ही कैश भी घर में रखें जरूर। कैश के बिना आपका काम नहीं चलेगा। क्योंकि जब मेडिकल इमरजेंसी होती है तो फिर सबसे पहले कैश की जरूरत होती है। न कि आप बैंक या एटीएम जाकर पैसे निकालते हैं। इसलिए आप जितना भी पैसे मेडिकल फंड में जमा करते हैं उसका कम से कम 20 प्रतिशत घर पर जरूर रखें। ये 20 प्रतिशत कैश आपके बहुत काम आएगा। इसलिए भले ही आप मेडिकल फंड किसी एकाउंट में जमा करें लेकिन इसका कुछ हिस्सा घर पर ही रखें।

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