Parenting Advice
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बच्चे की शैतानियों को ना लें नकारात्मक रूप में, कुछ इस तरह करें डील

ऐसे बच्चे किसी भी बात के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहते और ना ही किसी के डराने धमकाने से डरते हैं।

Parenting Advice: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अच्छा और समझदार होने के साथ साथ अनुशासन में भी रहें, लेकिन कई बार बच्चों की चंचलता और जिद माता पिता के लिए गुस्से और परेशानी का कारण बन जाती है। इस तरह की आदत वाले बच्चों को लोग बड़ी ही नकारात्मक भावना से देखते हैं। कई लोग बच्चों की इस तरह की गतिविधियों पर नकारात्मक प्रतिक्रया देते हैं है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। चंचल और जिद्दी बच्चे अपने खुद के तरीके से अपने विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आइये आज समझेंगे कि ऐसे बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास किस तरह से दूसरे बच्चों से अलग होता है और माता-पिता को इन बच्चों के साथ कैसे व्यवहार करना चाहिए।

बच्चे के इस तरह के व्यवहार को नकारात्मक लेने की जगह उसके सकारत्मक पहलुओं के बारे में जान लेना हर माता पिता के लिए बेहद जरुरी है। माता पिता के सकारात्मक व्यवहार को देख कर बच्चों में आत्मविशास बढ़ेगा और वो हमेशा सही राह की तरफ बढ़ेंगे।

चंचल और जिद्दी बच्चे अक्सर नए-नए खेल और गतिविधिया तलाशते रहते हैं। ऐसे बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में ज्यादा कल्पनात्मक होते हैं और उनकी सृजनात्मकता भी ज्यादा विकसित होती है। वे खुद से समस्याओं का समाधान ढूंढने की कोशिश करते हैं, जिससे उनकी मानसिक क्षमता तेज होती है।

जिद्दी बच्चे अक्सर अपने फैसलों पर अडिग रहते हैं। उनका ये व्यवहार उनका आत्मविश्वास बढ़ाता है। वे न सिर्फ अपने विचारों पर विश्वास करते हैं, बल्कि अपने लक्ष्य को पाने के लिए संघर्ष भी करते हैं। हालांकि उनका ये व्यवहार कभी-कभी उन्हें परेशानियों में डाल सकता है। लेकिन ये उनके आत्मविश्वास और अंदर की शक्ति को मजबूत करता है। ऐसे बच्चों में जीवन के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है।

चंचल और जिद्दी बच्चे हमेशा कुछ न कुछ नया करने की कोशिश करते रहते हैं, चाहे वह खेल हो या पढ़ाई। यह उनकी समस्या सुलझाने की क्षमता को बढ़ाता है। ऐसे बच्चे हर परिस्तिथि में जीवन जीने की  कला आसानी से सीख जाते हैं। इतना ही नहीं बल्कि ये अपने इरादों को पूरा करने के लिए नए नए रास्ते तलाशते रहते हैं।

चंचल और जिद्दी बच्चों के माता पिता को यही सिखाने की आवश्यकता होती है कि उन्हें अकेले ही अपनी समस्याओं का समाधान निकालना होगा। लेकिन कभी किसी जगह वो फंस जाएं तो माता पिता उनके साथ हमेशा खड़े हैं। ऐसे बच्चे बचपन से ही स्वतंत्रता की भावना की अहमियत को समझने लगते हैं। वे अपने माता-पिता पर ज्यादा निर्भर नहीं रहते और खुद निर्णय लेने में सक्षम होते हैं। यह उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद करता है, जो भविष्य में उनके लिए उपयोगी साबित होता है।

ऐसे बच्चे अक्सर निडर होते हैं। लेकिन फिर भी माता पिता को निडरता की भी एक सीमा तय करना बच्चों को सिखाना चाहिए। बेशक निडर होना बच्चों को काफी तेज़ बनाता है। ऐसे बच्चे किसी भी बात के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहते और ना ही किसी के डराने धमकाने से डरते हैं। सही समय पर सही जवाब देना ऐसे बच्चों की खासियत होती है।

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...