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वास्तु दोष भी हो सकता है कैंसर का कारण: Cancer Vastu
Vastu Tips for Cancer

Cancer Vastu: क्या आप जानते हैं कि जिन बड़ी बिमारियों के कारण हम इतना कष्टï झेलते हैं, दवाइयां खाते हैं तथा अपनी किस्मत को कोसते हैं उसका कारण वास्तु दोष भी हो सकता है? जी हां कैंसर जैसे जटिल रोग का कारण काफी हद तक हमारे घर का वास्तु दोष भी हो सकता है, कैसे? आइए जानते हैं इस लेख से।

क्या आप जानते हैं कि जिन बड़ी बिमारियों के कारण हम इतना कष्टï झेलते हैं, दवाइयां खाते हैं तथा अपनी किस्मत को कोसते हैं उसका कारण वास्तु दोष भी हो सकता है? जी हां कैंसर जैसे जटिल रोग का कारण काफी हद तक हमारे घर का वास्तु दोष भी हो सकता है, कैसे? आइए जानते हैं इस लेख से।

गोलाई लिए ईशान कोण

उत्तर-पश्चिम
उत्तर
उत्तर-पूर्व
पश्चिम
उत्तर-पूर्व
दक्षिण
दक्षिण-पश्चिम
पश्चिम

कटा हुआ ईशान कोण

Cancer Vastu
Cancer Vastu Shastra

उत्तर-पश्चिम
उत्तर
उत्तर-पूर्व
पश्चिम
उत्तर-पूर्व
दक्षिण
दक्षिण-पश्चिम
पश्चिम

दबा हुआ ईशान कोण

उत्तर-पश्चिम
उत्तर
उत्तर-पूर्व
पश्चिम
उत्तर-पूर्व
दक्षिण
दक्षिण-पश्चिम
पश्चिम

आवश्यकता से अधिक बड़ा ईशान कोण

उत्तर-पश्चिम
उत्तर
उत्तर-पूर्व
पश्चिम
उत्तर-पूर्व
दक्षिण
दक्षिण-पश्चिम
पश्चिम

दूषित ईशान बढ़ा हुआ पश्चिम नैऋत्य उत्तर-पश्चिम

उत्तर-पश्चिम
उत्तर
उत्तर-पूर्व
पश्चिम
उत्तर-पूर्व
दक्षिण
दक्षिण-पश्चिम
पश्चिम

पूर्व आग्नेय बढ़ने से दबा हुआ ईशान कोण

उत्तर-पश्चिम
उत्तर
उत्तर-पूर्व
पश्चिम
उत्तर-पूर्व
दक्षिण
दक्षिण-पश्चिम
पश्चिम

ब्रेन कैंसर- वायव्य, उत्तर, ईशान व पूर्व दिशा का ऊंचा होना एवं आग्नेय, दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम में भूमिगत पानी का स्रोत होना या नीचा होना या बड़ा हुआ होना, साथ ही अन्य दिशाएं ईशान कोण की तुलना में नीची होना।
ब्रेस्ट कैंसर- पूर्व आग्नेय में भूमिगत पानी का स्रोत जैसे टंकी, बोर, कुआं इत्यादि का होना या नीचा होना व अन्य दिशाओं की तुलना में ईशान कोण ऊंचा होने पर होता है।
यूट्रस कैंसर- दक्षिण या दक्षिण नैऋत्य में भूमिगत पानी का स्रोत होना या किसी भी प्रकार से नीचा या बढ़ा हुआ होना होता है।
पेट का कैंसर- पश्चिम और पश्चिम नैऋत्य में भूमिगत पानी का स्रोत होना, यही भाग किसी भी प्रकार से नीचा या बढ़ा हुआ होना।
किडनी का कैंसर- पश्चिम और नैऋत्य कोण में पानी का स्रोत होना या किसी भी प्रकार से नीचा या बढ़ा हुआ होना।
छाती एवं फेफड़े का कैंसर- उत्तर एवं उत्तर वायव्य का बन्द होना, पश्चिम और पश्चिम नैऋत्य में भूमिगत पानी का स्रोत होना या किसी भी प्रकार से नीचा या बढ़ा हुआ होना।
सिर, गले व मुंह का कैंसर- आवश्यकता से अधिक ऊंचा और बढ़ा हुआ होना, ईशान कोण होना एवं पश्चिम दिशा का किसी भी प्रकार से अधिक नीचा होना।
आंत का कैंसर- पश्चिम नैऋत्य में भूमिगत पानी का स्रोत होना या किसी भी प्रकार से नीचा या बढ़ा हुआ होना पर होता है।
यदि घर में कोई पहले से ही कैंसर का मरीज हो तो मेरी यह सलाह है कि, मरीज का योग्य डॉक्टर से उचित ईलाज करवाते रहें। ईलाज में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें, परन्तु साथ ही किसी योग्य वास्तु कन्सलटेन्ट को बुलाकर अपने घर को अवश्य दिखलाएं ताकि, घर में जो वास्तु दोष है उन्हें दूरकर दोषों से उत्पन्न होने वाली नकारात्मक ऊर्जा को दूर किया जा सके। वास्तु दोष दूर होने से मरीज पर दवाइयां अपना अच्छा प्रभाव देने लगती हैं। अत: जिन घरों में कैंसर के मरीज हैं उन्हें अपने घर के वास्तु दोषों को अवश्य दूर करवाना चाहिए ताकि मरीज अपना शेष जीवन आराम से व्यतीत कर सकें और कहीं वास्तु दोषों के कारण भविष्य में घर का कोई अन्य सदस्य कैंसर का शिकार न बने।

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