कोई भी शुभ कार्य दीपक के बिना पूरा नहीं माना जाता। दीपक का प्रकाश घर की उदासीनता को दूर करके उत्साह का संचार करता है। इसके पीछे अनेक कारण व लाभ हैं जो इस प्रकार हैं-
वातावरण को शुद्ध करे दीपक
हिन्दू धर्म में दीपक जलाने की प्रथा है। वेद पुराण कहते हैं कि दीपक जलाने से घर का अंधकार दूर हो जाता है परंतु विज्ञान कहता है कि दीपक के धुएं से वातावरण शुद्घ होता है। बशर्ते आप घी व सरसों के तेल का दीया जलाते हैं तब घी व तेल का धुंआ हवा में फैल रहे हानिकारक कीटाणुओं को मारने की क्षमता रखता है। कहते हैं कि घी के दीपक के बुझने के 4 घंटे बाद भी उसके धुंए की गरमाहट घर के वातावरण को शुद्घ करने का काम करती है। सरसों के तेल का दीया आधे घंटे तक वातावरण को शुद्घ रखता है।
जब दीपक में लौंग डालकर जलाते हैं तो वह वातावरण को और तेजी से शुद्घ करता है। यह पूरे घर के वातावरण को पवित्र बनाता है। अस्थमा के रोगियों के लिए शुद्घ घी का दीपक रामबाण का काम करता है व साथ ही अन्य रोगों में भी दीयों का प्रकाश व सुगंध औषधि का कार्य करता है। दीपावली के पर्व की तो महत्ता और सुंदरता ही दीपकों से है परंतु क्या आप जानते हैं कि दीपावली के पर्व में मिट्टी के दीये ही जलाए जाते हैं, वो भी सरसों तेल से। प्रभु श्रीराम के अयोध्या वापस आने की खुशी और अच्छाई की बुराई पर विजय के रूप में हर साल दीपावली के दिन घर और आंगन को रोशन करते हैं। हर मंगल कार्य को पूर्ण करने वाला दीपक शुभता, तेज, मंगल, सफलता, उत्साह, खुशी, जोश का ना केवल प्रतीक है बल्कि इसको हमेशा बढ़ाता भी है। जीवन में घर की वास्तु को संतुलित करने में भी दीपक अहम भूमिका निभाता है।
दीपक में बाती के प्रकार
दीपकों में यूं तो कपास की रुई की बाती का ही प्रयोग किया जाता है पर कुछ विशेष कार्यों की पूर्ति के लिए विशेष प्रकार की बाती जलाने का भी प्रचलन है-
- रुई की बाती में पीला चंदन मिला कर बाती बना कर उसको जलाने से शिव गौरी प्रसन्न होते हैं।
- रुई की बाती में केसर मिला कर बाती बनाकर, उसको सुखाकर जलाने से गुरु के प्रभाव में वृद्घि होती है। बृहस्पति मजबूत होता है एवं वैवाहिक जीवन सुखी होता है।
रुई की बाती को गाय के घी में भिगोकर एक साथ 21 बाती जलाने से कुंवारी लड़की की शादी जल्दी होती है। 21 बाती को बृहस्पतिवार को बृहस्पति देव के सामने जलाएं। 5 गुरुवार ऐसा करें।
- मंगलवार को हनुमान जी के सामने दीपक जलाने से रोग व पितृदोष दूर हो जाते हैं। धन बढ़ता है, ऋण मुक्ति होती है।
- कमल की डंडी के रेशे को सुखाकर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी के सामने जलाने से (घी के साथ) धन, यश में निरंतर वृद्घि के साथ ही पूर्वजन्म के दोष भी दूर हो जाते हैं और हर तरफ से लाभ की प्राप्ति होती है।
आंक के पेड़ की रुई को देशी घी में बाती बनाकर जलाने से (गणपति जी के सामने) गणपति जी के साथ-साथ रिधि-सिद्घी, शुभ-लाभ का आर्शीवाद भी प्राप्त होता है।
- आंकड़ा की रुई को सरसों के तेल में बाती बनाकर जलाने से कोर्ट कचहरी के काम तथा छात्रों की शिक्षा में सफलता प्राप्त होती है। परंतु उपरोक्त लाभ के लिए 21 दिनों तक ये दीया शिव मंंदिर में जलाना होता है।
- गरीबी दूर करने के लिए प्रत्येक बुधवार को पीपल के पेड़ के नीचे शक्कर के ऊपर अलसी के तेल का दीया जलाने से लाभ की प्राप्ति होती है और धन आगमन के रास्ते बन जाते हैं।
- नकारात्मक ऊर्जा को घर से बाहर निकालने के लिए हर रोज घर के मुख्य द्वार पर तिल के तेल का दीया जलाएं। अगर पारिवारिक शत्रु बढ़ रहे हों तो सरसों के तेल का दीया जलाएं।
- अगर कर्ज बहुत ज्यादा हो तो आटे का तिकोना दीया बनाएं और हनुमान जी के मंदिर में चमेली के तेल के साथ 11 दिन तक जलाएं, चमत्कारिक लाभ होगा।
- कपूर का दीया हर शुक्रवार को पीपल के वृक्ष के नीचे जलाने से गरीबी तो दूर होती ही है, साथ ही सौभाग्य में वृद्घि होती है।

दीपकों में बाती की संख्या
एक बाती का दीया सुख शांति लाता है। दो बाती का दीया वैवाहिक जीवन को मजबूत व दीर्घायु करता है। तीन बाती का दीया संतान व पुत्र सुख को बढ़ाता है। चार बाती का दीया चारों दिशाओं से सुख दिलाता है एवं माता अन्नपूर्णा का आशीष दिलाता है। छ: बाती का दीया ज्ञान बढ़ाता है, उच्च शिक्षा दिलवाता है, साथ ही भगवान कार्तिकेय का आशीष भी मिलता है। सात बाती का दीया विवाह में आ रही बाधाएं दूर करके योग्य जीवन साथी दिलाता है। आठ या बारह बाती का दीया अगर सरसों डालकर शिव मंदिर में शाम को जलाएं तो इससे अनिष्टï दूर होते हैं। नौ बाती का दीया नवग्रह शांत करता है और संतान प्राप्ति में आ रही बाधाएं दूर करता है। सोलह बाती का दीया अगर घी व कपूर मिलाकर सांयकाल को मंदिर में जाकर गणपति जी के सम्मुख जलाएं तो इससे सर्वसुख की प्राप्ति होती है, रोग दूर होते हैं।
- पालक के रस में आटे को रंगकर चौमुखी हरा दीया बनाएं और उसको अरंडी के तेल से हर शनिवार को अगर शिवजी के सामने जलाएं तो इससे दुर्घटनाएं टल जाती हैं और टूटे हुए रिश्ते भी जुड़ जाते हैं।
- पीपल पर शनिवार को सरसों का एक मुखी दीया जलाने से पितृदोष दूर होता है।
- मेली के तेल में एक गोल बाती का दीया गणपति जी के सामने जलाने से सर्वसुख मिलता है। मित्र बनते हैं, शत्रु कम होते हैं।
- अगर छात्र मूंगफली के तेल का एक मुखी दीया सरस्वती जी के मंदिर में जाकर जलाएं तो इससे बुद्घि तीक्ष्ण होती है।
अपनी लम्बाई के बराबर लाल कलावे को नापकर घी का दीया जलाने से भारकेश में रक्षा होती है। दीया सुबह व शाम को अवश्य जलाएं, घर के मंदिर व रसोई घर में इससे सुख सौभाग्य, यश, धन, आयु में वृद्घि होती है साथ ही घर में मंगल होता है।
अत: प्रत्येक पूजा में दीपकों की पूजा-पाठ कर ईश्वर का अशीर्वाद पाएं।
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