नारद जयंती हिन्दू पंचाग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है। पुराणों और शास्त्रों के अनुसार देव लोक का दूत कहे जाने वाले देवऋषि नारद, ब्रह्मा के सात मानस पुत्रों में से एक हैं। भगवान विष्णु के अनन्य भक्तों में से एक नारद जी एक लोक से दूसरे लोक की परिक्रमा करते हुए सूचनाओं को प्रेषित करते थे।
पिता ने दिया था अविवाहित रहने का श्राप
शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मदेव के श्राप के कारण नारद जी का विवाह नहीं हो पाया था। ऐसा कहा जाता है कि नारद जी ने ब्रह्रााजी जी द्वारा बताए गए सृष्टि के कार्यों में हिस्सा लेने और विवाह करने से मना कर दिया था। तब क्रोधित होकर बह्रााजी ने देवर्षि नारद को जीवन पर्यन्त अविवाहित रहने का श्राप दे दिया था।
दूसरे श्राप की वजह से नारद जी को हमेशा इधर-उधर भटकते रहना पड़ा। कहते हैं राजा दक्ष की पत्नी आसक्ति ने 10 हजार पुत्रों को जन्म दिया था। सभी पुत्रों को नारद जी ने मोक्ष का पाठ पढ़ा दिया, जिससे उनका मन मोह-माया से दूर हो गया। फिर दक्ष ने पंचजनी से विवाह किया और उनके एक हजार पुत्र हुए। इन पुत्रों को भी नारद जी ने मोह माया से दूर रहना सीखा दिया। इस बात से क्रोधित होकर दक्ष ने नारद जी को श्राप दे दिया कि वे हमेशा इधर-उधर भटकते रहेंगे।
कुछ रोचक जानकारी
- नारद जी ने महाभारत में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कहते है कि नारद मुनि ने ही युधिष्ठिर को धर्म का सही मार्ग दिखाया था।
- देवर्षि नारद जी को वीणा बहुत पसंद है। जब वे अकेले होते हैं, तो उस वक्त वीणा बजाते हैं और जग के पालनकर्ता विष्णु जी का गुणगान करते हैं।
- अपने आप में विशिष्ट नारद मुनि, विचारों एवं सूचनाओं को अपनी इच्छा के अनुसार दूसरों तक पहुंचाते थे। वे एक चलते-फिरते सार संग्रह व विश्वकोष थे।
- मनुष्य को न्यायसंगत जीवन जीने की महत्ता बताने का श्रेय नारद मुनि को जाता है। वे भक्ति एवं विश्वास की आवश्यकता बताने में हमेशा उत्सुक थे।
- नारद मुनि को 12 चिरंजीवियों में से एक माना जाता है और यह विश्वास किया जाता है कि वे अब भी जीवित हैं और हमारे बीच ही हैं।
- नारद मुनि ने ही निर्दयी राक्षस राज जालंधर को भगवान शिव के शौर्य एवं माता पार्वती के सौंदर्य के बारे में बताया। इससे उसमें पार्वती जी के प्रति लालसा उत्पन्न हो गई और शिव भगवान के द्वारा उसके अंत का रास्ता साफ़ हो गया।
- देवर्षि नारद द्वारा वर्णित भक्ति सूत्रों पर आधारित किताब की कोई समानता नहीं है। यह किताब सरल एवं सुन्दर शब्दों में वर्णित है, जिसे कोई भी आम इंसान आसानी से समझ सकता है।
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