मजदूर दिवस, 1 मई

हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मई महीने की पहली तारीख को मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस को ‘मई दिवस भी कहकर बुलाया जाता है। अंतराष्‍ट्रीय तौर पर मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत 1 मई 1886 को हुई थी। अमेरिका के मजदूर संघों ने मिलकर निश्‍चय किया कि वे 8 घंटे से ज्‍यादा काम नहीं करेंगे। जिसके लिए उन्होंने हड़ताल की। इस हड़ताल के दौरान शिकागो की हेमार्केट में बम ब्लास्ट हुआ जिससे निपटने के लिए पुलिस ने मजदूरों पर गोली चला दी जिसमें कई मजदूरों की मौत हो गई और 100 से ज्‍यादा लोग घायल हो गए। इसके बाद 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में ऐलान किया गया कि हेमार्केट नरसंहार में मारे गये निर्दोष लोगों की याद में 1 मई अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा और इस दिन सभी कामगारों और श्रमिकों का अवकाश रहेगा। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस ‘लाखों मजदूरों के परिश्रम, दृढ़ निश्चय और निष्ठा का दिवस है। मजदूर दिवस के अवसर पर संपूर्ण राष्ट्र और समाज को राष्ट्र और समाज की प्रगति, समृद्धि तथा खुशहाली में दिए गए श्रमिकों के योगदान को नमन करना चाहिए।

परशुराम जंयती, 14 मई

परशुराम जयंती हिन्दू पंचांग के वैशाख माह की शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है। इसे ‘परशुराम द्वादशी भी कहा जाता है, अक्षय तृतीया को परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन दिये गए पुण्य का प्रभाव कभी खत्म नहीं होता अक्षय तृतीया से त्रेता युग का आरंभ माना जाता है। इस तिथि को प्रदोष व्यापिनी रूप में ग्रहण करना चाहिए क्योंकि भगवान परशुराम का प्राकट्य काल प्रदोष काल ही है। इस बार 14 मई 2021 को परशुराम जयंती मनाई जाएगी।

रवींद्रनाथ टैगोर जयंती, 7 मई

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कवि, उपन्‍यासकार, नाटककार, चित्रकार, और दार्शनिक रवींद्रनाथ टैगोर का जन्‍म 7  मई सन 1861 को कोलकाता में हुआ था। वे ऐसे मानवतावादी विचारक थे, जिन्‍होंने साहित्य, संगीत, कला और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अपनी अनूठी प्रतिभा का परिचय दिया। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के रवींद्रनाथ ने देश और विदेशी साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि को अपने अंदर समाहित कर लिया था। उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में अपूर्व योगदान दिया और उनकी रचना गीतांजलि के लिए उन्हें साहित्य के नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

हास्य दिवस, 2 मई

विश्व हास्य दिवस विश्व भर में मई महीने के पहले रविवार को मनाया जाता है। इसका विश्व दिवस के रूप में प्रथम आयोजन 11 जनवरी, 1998 को मुंबई में किया गया था। विश्व हास्य योग आंदोलन की स्थापना का श्रेय डॉ मदन कटारिया को जाता है। विश्व हास्य दिवस का आरंभ संसार में शांति की स्थापना और मानवमात्र में भाईचारे और सद्भाव के उद्देश्य से हुआ। विश्व हास्य दिवस की लोकप्रियता हास्य योग आंदोलन के माध्यम से पूरी दुनिया में फैल गई। आज पूरे विश्व में छह हजार से भी अधिक हास्य क्लब हैं। इस मौके पर विश्व के बहुत से शहरों में रैलियां, गोष्ठियां एवं सम्मेलन आयोजित किये जाते हैं।

शंकराचार्य जयंती, 17मई

आदि शंकराचार्य एक महान हिन्दू दार्शनिक एवं धर्मगुरु थे। वैशाख का महीना हिन्दू धर्म में आस्था रखने वालों के लिए बहुत महत्त्व रखता है। वैशाख मास की शुक्ल पंचमी के दिन आदि गुरु शंकराचार्य जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष आद्यगुरु शंकराचार्य जयंती 17 मई 2021, के दिन मनाई जाएगी। हिन्दू धर्म की ध्वजा को देश के चारों कोनों में फहराने वाले आदि शंकराचार्य को भगवान शंकर का अवतार माना जाता है, यह अद्वैत वेदान्त के संस्थापक और हिन्दू धर्म प्रचारक थे। आदि शंकराचार्य जी जीवनपर्यंत सनातन धर्म के जीर्णोंद्धार में लगे रहे उनके प्रयासों ने हिंदु धर्म को नव चेतना प्रदान की।

सुरदास जयंती, 17 मई

संपूर्ण भारत में मध्ययुग में कई भक्त कवि और गायक हुए लेकिन सूरदास का नाम उन सभी कवि/गायकों में सर्वाधिक प्रसिद्ध और महान कवि के तौर पर लिया जाता है। जिन्होंने श्रीकृष्ण भक्ति में अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया था। यह ‘सूरसागर के रचयिता सूरदास की लोकप्रियता और महत्ता का ही प्रमाण है कि एक अंधे भक्त गायक का नाम भारतीय धर्म में इतने आदर से लिया जाता है। सूरदास जन्म से ही अंधे थे, किंतु भगवान ने उन्हें सगुन बताने की एक अद्भुत शक्ति से परिपूर्ण करके धरती पर भेजा था।

मात्र छ: वर्ष की अवस्था में ही उन्होंने अपने माता-पिता को अपनी सगुन बताने की विद्या से चकित कर दिया था। लेकिन उसके कुछ ही समय बाद वे घर छोड़कर अपने घर से चार कोस दूर एक गांव में जाकर तालाब के किनारे रहने लगे थे। सगुन बताने की विद्या के कारण शीघ्र ही उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैल गई।

गंगा सप्तमी, 18 मई

वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा जयंती यानी गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन पर गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्त्व होता है। पौराणिक शास्त्रों में उल्लेख है कि जीवनदायिनी गंगा में स्नान, पुण्यसलिला नर्मदा के दर्शन और मोक्षदायिनी शिप्रा के स्मरण मात्र से मोक्ष मिल जाता है। वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन मां गंगा स्वर्गलोक से भगवान शिव की जटाओं में पहुंची थी इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी, गंगा जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मां गंगा का पूजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है यदि गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान किया जाये तो सभी पाप नाश हो जाते हैं।

मर्दस डे, 9 मई

‘मदर्स डे की शुरुआत वेस्ट वर्जिनिया में एना जार्विस ने की थी उन्होंने इस दिन अवकाश घोषित कर दिया था। बाद में ये हॉलीडे काफी लोकप्रिय हो गया जिसे कि ‘होलमार्क होलीडे की संज्ञा दे दी गई। यूरोप और ब्रिटेन में ‘मदर्स डे को एक खास संडे को मनाया जाता है जिसे कि ‘मदरिंग संडे कहते हैं। लेकिन भारत में ‘मदर्स डे मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। चीन में, मातृ दिवस के दिन मां को उपहार के रूप में गुलनार का फूल दिया जाता है, ये दिन वहां गरीब माताओं की मदद के लिए 1997 में निर्धारित किया गया था।

सीता नवमी, 21 मई

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को सीता नवमी कहते हैं। वैशाख मास की शुक्ल नवमी को जबकि पुष्य नक्षत्र था,  मंगल के दिन संतान प्राप्ति की कामना से यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए राजा जनक हल से भूमि जोत रहे थे। उसी समय पृथ्वी से देवी का प्राकट्य हुआ। जोती हुई भूमि को तथा हल की नोक को भी सीता कहते हैं। अत: प्रादुर्भूत भगवती विश्व में सीता के नाम से विख्यात हुई। इसी नवमी की पावन तिथि को भगवती सीता का प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है।

नृसिंह जयंती, 25 मई

नृसिंह जयंती वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। हिन्दू धर्म में इस जयंती का बहुत महत्त्व है। इस वर्ष नृसिंह जयंती 25 मई 2021 शुक्रवार को है। भगवान विष्णु ने इसी दिन अपने भक्त प्रह्लïद को राक्षसराज हिरण्यकश्यप से बचाने के लिए आधे नर और आधे सिंह के रूप में नृसिंह अवतार लिया था। मान्यता है कि जो भी भक्त इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु के स्वरूप नृसिंह देव की प्रार्थना करता है, उनका आह्वान करता है।

बुद्ध पूर्णिमा, 26 मई

यह दिवस भगवान बुद्ध की बुद्धत्व की प्राप्ति हेतु मनाया जाता है। इस दिन को बौद्ध धर्म के लोग ही नहीं, बल्कि हिन्दू धर्म के लोग भी धूमधाम से मनाते हैं। दरअसल, हिन्दू धर्म के अनुसार बुद्ध भगवान, भगवान विष्णु के 9वें अवतार हैं, इसलिए यह पर्व हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए भी खास होता है। भगवान बुद्ध ने जब अपने जीवन में हिंसा, पाप और मृत्यु को जाना तब उन्होंने मोह माया त्याग कर अपने गृहस्थ जीवन से मुक्ति ले ली और जीवन के सत्य की खोज में निकल पड़े। कई सालों तक बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे तपस्या कर जब उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई तो यह दिन पूरी सृष्टि के लिए खास दिन बन गया जिसे वैशाख पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।

नारद जयंती, 27 मई

हर साल ज्‍येष्‍ठ महीने की कृष्‍ण पक्ष द्वितीया को नारद जयंती मनाई जाती है। हिन्‍दू शास्‍त्रों के अनुसार नारद को ब्रह्मा के सात मानस पुत्रों में से एक माना गया है। नारद को देवताओं का ऋषि माना जाता है। इसी वजह से उन्‍हें देवर्षि भी कहा जाता है। मान्‍यता है कि नारद तीनों लोकों में विचरण करते रहते हैं। इस बार नारद जयंती 27 मई को मनाई जाएगी। नारद जी ज्ञानी होने के साथ-साथ बहुत तपस्वी भी थे। नारद जी हमेशा चलायमान रहते थे। वे कहीं ठहरते नहीं थे। नारद जी भगवान विष्णु के परम भक्त हैं। हमेशा नारायण नाम का जप ही उनकी आराधना है। इनकी वीणा महती के नाम से जानी जाती है। कहा जाता है की नारद जी के श्राप के कारण ही भगवान राम को सीता जी के वियोग का सामना करना पड़ा।

तम्बाकू निषेध दिवस, 31 मई

31 मई को दुनिया भर में हर साल विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस दुनिया भर में धूम्रपान करने के प्रभाव, तंबाकू चबाने और इससे उत्पन्न हुई बिमारियों आदि के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। आईएएनएस के अनुसार आंकड़े बताते हैं कि देशभर में करीब 2739 लोग तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों के कारण कैंसर व अन्य बिमारियों से हर रोज दम तोड़ देते हैं। इस दिन तंबाकू के उपयोग से जुड़े स्वास्थ्य समस्याओं और अन्य पैदा हुए खतरों पर जोर दिया जाता है। साथ ही तंबाकू की खपत को कम करने के लिए प्रभावी नीतियों को भी सरकार द्वारा नृसिंह जयंती बनाया जाता है।

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