रहस्यों से हटा पर्दा - स्वामी विवेकानंद की कहानी
रहस्यों से हटा पर्दा - स्वामी विवेकानंद की कहानी

स्वामीजी ने मनुष्य को जीवन में सफलता दिलाने वाले नियमों व मंत्रों के रहस्य से पर्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि हम किसी कार्य को पूरी लगन व समर्पण भाव से करते है, तो जीवन में सफलता मिलते देर नहीं लगती फिर चाहे वह खेत में किसान द्वारा हल चलाना ही क्यों न हो।

एकाग्रता की शक्ति के आधार पर ही हम दो मनुष्यों की आपस में तुलना कर सकते हैं। जो व्यक्ति अपने काम को पूरी एकाग्रता से यानी मन लगाकर करता है, वह निश्चित रूप से सफल होता है। कर्म तो सभी करते हैं, पर किसी ने उस काम को कितनी लगन या एकाग्रता से किया, यही अंतर उसकी सफलता को प्रभावित करता है।

कहते हैं स्वामीजी ने अल्पायु में ही राजयोग के आठों अंगों को अपने जीवन में उतार लिया था । यम यानी अहिंसा, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि को राजयोग के आठ अंग कहा जाता है। उन्होंने राजयोग के इन अंगों को सच्चे अर्थों में अपनाया।

रहस्यों से हटा पर्दा - स्वामी विवेकानंद की कहानी
रहस्यों से हटा पर्दा – स्वामी विवेकानंद

अहिंसा का अर्थ है – किसी दूसरे के साथ हिंसा न करना । नियम का अर्थ है- तपस्या व ईश्वर के प्रति समर्पण भाव। आसन का अर्थ है-बैठने की प्रणाली। प्राणायाम का अर्थ है-प्राणों का संयम ।

प्रत्याहार का अर्थ है-अपने ध्यान को भीतर की ओर लगाना। धारणा का अर्थ है- किसी स्थान पर मन को धारण करना, ध्यान का अर्थ है- ध्यान लगाना तथा समाधि का अर्थ है- अंतिम लक्ष्य।

रहस्यों से हटा पर्दा - स्वामी विवेकानंद की कहानी
रहस्यों से हटा पर्दा – स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद ने इन सभी चरणों को पार किया और अपने अंतिम लक्ष्य समाधि तक पहुंचे। अल्पायु में ही यह युवा संन्यासी सदा के लिए समाधि में लीन हो गया।

रहस्यों से हटा पर्दा - स्वामी विवेकानंद की कहानी
रहस्यों से हटा पर्दा – स्वामी विवेकानंद