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तमाचा-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी: Mother's Love story
Tamacha

Mother’s Love story: “दीदी, मैं नानी बन गयी अभी -अभी रिया के ससुराल से फोन आया है कि उसको बेटा हुआ है” खुशी से सराबोर स्वर में संगीता ने अपनी बड़ी ननद कृष्णा को बताया। खुशखबरी सुनकर कृष्णा फूली नहीं समायी। रिया उसके छोटे भाई संजीव की बेटी है उसकी शादी 5 वर्ष  पूर्व राहुल के साथ हुई थी शादी के 2 वर्ष बाद संतान ना होने पर दोनों ने अपना चेकअप कराया रिया तो माँ बनने के काबिल थी लेकिन राहुल पिता बनने के योग्य नहीं था।उसकी सास ने अपनी बेटी का बच्चा गोद लेने के लिये कहा तो रिया ने स्पष्ट मना करते हुए कहा, “मम्मी, मैं तो माँ  बनने के काबिल के हूँ तो हम बच्चा क्यों गोद लें ? मैंने और राहुल ने निर्णय किया है कि हम “आर्टिफिशियल इनसेमिशन ” द्वारा माता पिता बनने का सुख और गौरव हासिल करेंगे।
रिया की यह बात सुनकर कृष्णा अवाक रह गयी थी। वह सोचने लगी… अगर वह भी हिम्मत करके अपनी सास से बच्चा गोद लेने की बात कह देती तो वह भी आज मातृत्व सुख भोग रही होती 30 वर्ष पुराना अतीत का घाव फिर से हरा हो गया….
शादी के 5 वर्षो तक औलाद ना होने पर ससुराल में सभी ने उसे बाँझ  की उपाधि से विभूषित कर दिया। एक दिन उसने केशव से कहा क्यों ना हम दोनों अपना- अपना चेकअप करा लें यह सुनकर केशव का अहम जाग गया।

“मैं क्यों कराऊं अपना चेकअप ? मेरे में कोई कमी नहीं है। हाँ,अगर तुम चाहो तो अपना चेकअप करा सकती हो “
 दूसरे दिन कृष्णा ने अपना चेकअप कराया तो उसकी रिपोर्ट सही निकली  वह माँ बनने योग्य थी। रिपोर्ट देखकर केशव को  धक्का पहुँचा लेकिन अपना चेकअप कराने की उसमें हिम्मत नहीं थी शायद उसका अहम उसे यह करने से रोक रहा था कृष्णा ने उसको बहुत समझाया कि वह इस बात को  हमेशा गुप्त रखेगी  लेकिन वह तैयार नहीं हुआ। इस बीच सास ने  केशव की दूसरी शादी का ऐलान कर दिया तो वह बुरी तरह झटपटा गई केशव को प्यार से समझाते हुए बोली , ” केशव इस शादी को रोको  यह मेरे साथ सरासर अन्याय है मैं सब कुछ सहन कर सकती हूँ लेकिन मेरा पति किसी और का हो जाए मैं यह सह नहीं सकती हम लोग बच्चा गोद लेकर माता-  पिता बनने का सुख हासिल  कर लेगें.”
 ” लेकिन माँ इसके  लिये कभी तैयार नहीं होंगी वह अपना वंश चलाने के लिये किसी दूसरे की औलाद बर्दाश्त नहीं कर  सकतीं” केशव ने बहुत ही सहज भाव से कहा तो वह तिलमिला गई ।
” यह जरूरी तो नहीं कि दूसरी पत्नी से तुम्हें औलाद हो ही  जाये”।
“कृष्णा, शायद कोई चमत्कार हो जाए …
 ” दूसरी , तीसरी,चौथी शादी करके तुम चमत्कार का इंतजार ही करते रहना “, केशव के बोलने से पूर्व ही वह घायल शेरनी की तरह दहाड़ी  लेकिन  सास के सामने ज़बान ना खोल पाई ना ही केशव की दूसरी शादी रोक पाई .स्वेच्छा से ससुराल छोडकर अपने छोटे भाई संजीव के पास आ गई.
केशव की दूसरी शादी हुए भी 7-8 साल हो गए लेकिन  उसे संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ .कई बार तो उसकी इच्छा हुई  जाकर वह केशव से पूछे लेकिन ऐसे कायर पुरुष से  मिलने का उसका मन ही नहीं हुआ जिसने अपने अहम की खातिर उसे मातृत्व सुख से वंचित  कर दिया खुद अपने ऊपर भी क्रोध आया  क्यों नहीं बाँझ कहने वाले समाज को अपने माँ बनने की योग्यता का प्रमाण पत्र दिखाकर उनको तमाचा सा जवाब दिया ?
 ” दीदी ,चलो तैयार हो जाओ बाजार से बच्चे के लिए कपड़े,खिलौने वगैरह ले आएं कल ही चलना है रिया की ससुराल” जब संगीता ने कहा तो वह अतीत से वर्तमान में लौट आयी।
“हां,अभी  तैयार होकर आती हूँ ” कहकर कृष्णा उठ गई. वाशबेसिन में मुँह धोते हुए, शीशे में खुद को देखकर सोचने लगी….. अपने कोमल मन पर समाज के तानों  का जिंदगी भर  दर्द सहती रही. काश… रिया  की तरह तमाचा सा जवाब दिया होता तो  आज उसकी जिंदगी  के मायने ही दूसरे होते।

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