Short Story: बात अब से 23 वर्ष पूर्व की है जब मैं अपनी ससुराल नई दुल्हन बनकर आई थी। मेरे पीहर में तो सदा कम नमक मिर्च का खाना और बिना खटाई का खाना खाया जाता था। सब्जियों में टमाटर भी कम ही डलता था। तेल का इस्तेमाल भी कम ही होता था। हमारे यहां दूध दही आदि का जोर था। आलू तो मेरे पिताजी को बिल्कुल ही पसंद नहीं थे। हमारे घर में आलू की सब्जी बनती ही नहीं थी। मेरे पीहर और ससुराल के खाने में जमीन आसमान का अंतर था। ससुराल के लोगों को चटपटा खाने का पसंद था। यहां तीनों टाइम आलू की सब्जी बनती थी और खूब चटपटे मसाले के साथ बनती थी। इनका घर का मुख्य भोजन आलू की सब्जी और कचोरी था। अच्छी तो मुझे भी लगती थी लेकिन मैं स्वास्थ्य के नजर से ज्यादा नहीं खा पाती थी। मुझे गैस्ट्रिक और मोटापे की समस्या थी। इसलिए मैं जब भी सब्जी बनाती थी मेरी सास मुझे टोकती थी कि तुमने इसमें नमक खटाई और मिर्च तो डाला ही नहीं है। अच्छी तरह सब्जियों में नमक मिर्च खटाई डालो तो सब्जियां टेस्टी और चटपटी बनेंगे। मुझे हरी सब्जियां खाने का ज्यादा शौक था। उनके यहां के लिए तला हुआ खाना भी बहुत पसंद किया जाता था। मेरी सास को पूरी कचोरी पकौड़ी खाने का भी एवं खिलाने दोनों का बहुत शौक था। मेरी सास के हाथों में खाने में बहुत स्वाद था। जब भी मेरी सास खाना बनाती थी मैं बहुत स्वाद से खाती थी।
लेकिन बस मुझे शुरू से आदत नहीं थी ऐसा खाना खाने की इसलिए कभी मैंने ज्यादा मजे से नहीं खाया और मेरी सास की हमेशा यही मेरे से नोकझोंक चलती रहती थी नमक मिर्च कटाई सब्जी में बहुत कम है और सब्जियों में ऊपर से अगर छौंक लगा दिया जाए तो सब्जी रंगीन और सुंदर लगती है जिसे खाने वाले का मन खाने के लिए ललचा जाता है।
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