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धरती की बेटी विदी का आगमन-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड: Dharti ki Beti
Dharti ki Beti Vidi ka Aagman

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Dharti ki Beti: एक बार की बात है, धरती की बेटी विदी नहाने के लिए नदी में उतरी और गायब हो गयी। धरती ने अपने दूत चारों तरफ भेजे लेकिन विदी का कहीं कुछ पता नहीं चला। धरती माता इस बात से अत्यंत दुखी हो गई एवं शोक ग्रस्त होकर उदास रहने लगी। धरती के दुखी होने से धरती के सारे फूल मुरझा गए, सभी पौधे सूख गए। सब तरफ उदासी छा गयी। अंत में पता चला कि वह मरकर यमलोक पहुँच गयी है। दूतों ने यमराज से अनुनय विनय किया कि विदी पृथ्वी की इकलौती बेटी है, उसे वापस कर दिया जाए। लेकिन यमराज मानने को तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि जो यमलोक एक बार आता है, वापस नहीं जाता है। दूतों ने यम को समझाया कि ऐसा नहीं करने से धरती मर जाएगी और सृष्टि समाप्त हो जाएगी। यमराज इस शर्त पर विदी को वापस करने के लिए तैयार हुए कि विदी आधा समय पृथ्वी पर और आधा समय पाताल में बिताएगी। तभी से जब जब विदी आती है, धरती खुशी से फूले नहीं समाती एवं फूलों से भर जाती है और जब विदी पाताल को जाती है, पतझड़ आ जाता है, पृथ्वी उदास हो जाती है। सरहुल विदी के पृथ्वी पर वापस आने का समय है। धरती के खुश होने एवं सजने-सँवरने की ऋतु है।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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