जगन्नाथ पुरी मंदिर की तीसरी सीढ़ी का क्या है रहस्य, यमराज से जुड़ा है कनेक्शन: Jagannath Temple
secret of the third staircase of Jagannath Puri temple

Secret Of The Third Step Of Jagannath Temple : उड़ीसा के पूरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। जगन्नाथ का अर्थ होता है जगत का स्वामी। हिंदुओं के चार धाम में से एक धाम जगन्नाथ पुरी भी है। इस मंदिर के दर्शन के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर के इतने रहस्य हैं, जिनके कारण आज तक विज्ञान भी नहीं लगा पाया है। इस मंदिर से हर वर्ष रथ यात्रा निकलते हैं, जो पूरे दुनिया में प्रसिद्ध है। भगवान श्री कृष्णा उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा तीनों की मूर्तियां यहां सजी हुई हैं। इसलिए रथ यात्रा में भी तीन रथ निकलते हैं। जगन्नाथ पुरी मंदिर को धरती के बैकुंठ के रूप में माना गया है। कहा जाता है कि जो लोग भी यहां दर्शन के लिए आते हैं। उनके सभी पाप धुल जाते हैं।

इस मंदिर के रहस्य में एक सबसे बड़ा रहस्य है कि मंदिर के ऊपर का झंडा हवा के विपरीत दिशा में लहराता है। कहते हैं कि कोई भी पक्षी और विमान इस मंदिर के ऊपर से नहीं गुजर पाता। कई रहस्य में से एक रहस्य यह भी है कि मंदिर के 22 सिढ़ियों में से तीसरी सिढ़ी को काले रंग से रंग गया है और श्रद्धालुओं को इस सीढ़ी पर पैर रखने से मना किया जाता है। आईए जानते हैं क्या है वजह।

Mysteries of Jagannath Temple
Mysteries of Jagannath Temple

मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि इस मंदिर को धरती पर बैकुंठ माना गया है जो भी व्यक्ति इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण के दर्शन कर लेता वह अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता था। इसलिए सभी श्रद्धालु इस मंदिर में आकर अपने पाप धो लेते थे। एक दिन यमराज श्री कृष्ण के पास गए और बोले की धरती पर बैकुंठ धाम होने की वजह से सभी लोग आपके दर्शन करके अपने पाप धो लेते हैं और कोई भी यमलोक नहीं जा रहा तो भगवान श्री कृष्ण ने यमराज की समस्या का समाधान बताते हुए कहा कि जगन्नाथ पुरी मंदिर के 22 सीढ़ियों में से तीसरी सीढ़ी पर जो भक्त मेरे दर्शन के बाद अपना पैर रखेगा उसके सभी पाप क्षीण हो जाएंगे और वह यमलोक चल जाएगा। इसीलिए मंदिर के तीसरी सीढ़ी को काले रंग से रंग गया है ताकि कोई भी श्रद्धालु भूल कर भी इस सीढ़ी पर अपना पैर न रखें।

The 22 steps of the Jagannath Temple will not touch this stone by mistake
The 22 steps of the Jagannath Temple will not touch this stone by mistake

इस सीढ़ी को यमशिला के नाम से जाना जाता है क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने इस सीढ़ी पर यमराज को स्थान दिया था। जगन्नाथ पुरी मंदिर में चार द्वार है। श्रद्धालुओं की भीड़ बहुत ज्यादा होती है तब चारों द्वारों को खोला जाता है। मंदिर का पूर्वी द्वार सिंह द्वार के नाम से जाना जाता है। वहीं मंदिर का पश्चिमी द्वार व्याघ्र द्वार से जाना जाता है और उत्तरी द्वार हस्ती द्वार के नाम से प्रसिद्ध है। इसके अलाव दक्षिणी द्वार अशद द्वारा नाम से विख्यात है। जगन्नाथ पुरी मंदिर में जहां चार द्वार हैं वहीं 22 सिढि़यों का भी अपना रहस्य है। इन 22 सीढ़ियों को इंसान की 22 कमजोरी के रूप में दर्शाया गया है।

इन सीढ़ियों के बारे में बताया गया है कि वर्तमान में अगर इनको देखा जाए तो यह केवल 18 सीढ़ियां ही दिखेंगी हालांकि बाजार की तरफ की दो सीढ़ियों को जोड़ दिया जाए तो यह 20 हैं। इसके साथ ही 21 और 22वीं सीढ़ि मंदिर के रसोई की ओर हैं। इन सीढ़ियों की चौड़ाई 6 फीट बताई जाती है और 70 फीट इसकी लंबाई है। यही नहीं मंदिर की कुछ सीढ़ियां तो 15 फीट चौड़ी है। जो लोग यहां दर्शन करने आते हैं उनके लिए इनको पार करना आवश्यक बताया गया है।

प्रतिमा 'गृहलक्ष्मी’ टीम में लेखक के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। डिजिटल मीडिया में 10 सालों से अधिक का अनुभव है, जिसने 2013 में काशी विद्यापीठ, वाराणसी से MJMC (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की। बीते वर्षों...