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Jagannath Temple
Lord Krishna' Heart in jagannath temple

Jagannath Temple: भगवान जगन्नाथ की महिमा अपरंपार है। ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर कृष्ण भक्तों की आस्था का विशेष केन्द्र है। 1 जुलाई 2022 से आरंभ हुई जगन्नाथ रथ यात्रा 12 जुलाई 2022 तक चलेगी। हिंदू पंचाग के हिसाब से आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को रथ यात्रा निकाली जाती है। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ शामिल होते हैं। दरअसल भारत के 4 पवित्र धामों की शृंखला में भगवान जगन्नाथ का मंदिर भी एक है। जहां एक तरफ इस मंदिर की भव्यता कारीगरी का बेजोड़ नमूना पेश करती है। तो वहीं इस मंदिर में छिपे रहस्य वाकई चौंकाने वाले हैं।

मंदिर के अंदर नहीं आती लहरों की ध्वनि

मंदिर के समीप स्थित समुद्र में उठने वाली तेज लहरों की ध्वनि यूं तो हर ओर गूंजती हैं। मगर हैरान करने वाली बात ये है कि मंदिर के अंदर प्रवेश करने के बाद लहरों की ध्वनि सुनाई नहीं देती है। जी हां मंदिर के भीतर कदम रखते ही हर प्रकार की आवाजें बंद हो जाती हैं। यह आवाज तब तक वापिस नहीं सुनाई देती जब तक आप मंदिर के प्रवेश द्वारा से बाहर नहीं लौटते हैं।

मंदिर में खास विधि से प्रसाद होता है तैयार

जगन्नाथ मंदिर में प्रसाद विशेष तरीके से तैयार किया जाता है। यहां प्रसाद को बनाने के लिए सात बर्तनों का प्रयोग होता है। जो एक के उपर एक रखकर बनाया जाता है। हैरान करने वाली बात यह है कि सबसे पहले खाना सबसे ऊपर रखे बर्तन में बनता है और उसके बाद यह क्रम नीचे की तरफ चलता है। यानी सबसे ऊपर वाले बर्तन के बाद उससे नीचे वाले बर्तन का खाना बनकर तैयार होता है

मंदिर के उपर नहीं दिखता कोई पक्षी

Jagannath Temple
No bird is seen above the temple

आमतौर पर हर जगह पक्षियों का झुंड नजर आता है। मंदिरों में तो ये नजारा आम होता है। मगर जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से पक्षी होकर नहीं गुजरते हैं और यहां तक कि मंदिर के ऊपर से कोई हवाई जहाज भी नहीं गुजरता है।

सुदर्शन चक्र की विशेषता

तकरीबन 20 फीट की ऊंचाई पर लगे सुदर्शन चक्र के बारे में ऐसा माना जाता है कि इसके दर्शन आप शहर के किसी भी कोने से कर सकते हैं। इसको किसी भी दिशा से देखने पर चक्र का मुंह आपकी तरफ ही दिखाई देता है।

नहीं बनती मंदिर की परछाईं

इस मंदिर की बेहतरीन बनावट जहां एक तरफ खूबसूरती का नमूना पेश करती है। तो वहीं इस मंदिर की परछाई न बनना भी एक चौंकाने वाला तथ्य है। दरअसल, इसे मंदिर की बनावट कहें या फिर ईश्वर की महिमा कि इस मंदिर की परछाईं दिन में किसी भी वक्त देखने को नहीं मिलती है। लोग इसे ईश्वरीय शक्ति का प्रमाण मानते हैं।

मूर्ति के भीतर विराजमान है भगवान कृष्ण का दिल

ऐसी मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी देह का त्याग किया तो उसके बाद उनका अंतिम संस्कार भी किया गया। कहते है कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। मगर उनका हृदय जिंदा रहा और धड़क रहा था। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक आज भी वो हृदय भगवान जगन्नाथ की मूर्ति में विराजमान है।

जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

चार धामों में से एक जगन्नाथ पुरी को भगवान विष्णु का स्थल माना जाता है। पवित्र स्थ्लों में से एक जगन्नाथ मंदिर को लेकर यूं तो कई पांरपरिक कथाएं हैं। मगर भगवान कृष्ण के हृदय से जुड़ी ये कथा हर ओर प्रचलित है। इस पौराणिक कथा की मानें तो भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के भीतर भगवान कृष्ण का दिल का एक पिंड रखा हुआ है जिसमें ब्रह्मा विराजमान हैं।

दरअसल, जनश्रुति के मुताबिक जब भगवान श्रीकृष्ण इस लोक को छोड़कर दूसरे लोक पहुंचे, तो पांडवों ने उनके शरीर का दाह संस्कार कर दिया। मगर कहा जाता है कि उनका दिल पंच तत्व में विलीन होने की बजाय जलता ही रहा। ऐसे में ईश्वर के आदेशानुसार पिंड को पांडवों ने जल में प्रवाहित कर दिया और फिर देखते ही देखते हृदय ने लट्ठे का रूप धारण कर लिया। राजा इन्द्रद्युम्न, जो कि भगवान जगन्नाथ के भक्त थे, उन्होंने वो लट्ठा भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के भीतर स्थापित कर दिया। उस क्षण से लेकर आज तक वो लट्ठे का रूप ले चुका हृदय भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के भीतर विराजमान है।

जैसे हर 12 वर्ष के अंतराल के बाद जगन्नाथ की मूर्ति बदली जाती है, लेकिन यह लट्ठा उसी में रहता है और इसे देखने की अनुमति किसी को नहीं हैं। मूर्ति को बदलने वाले पुजारी भी मूर्ति बदलते वक्त अपनी आंखों पर कपड़ा बांध लेते हैं और हाथों को भी कपड़ों से ढ़क दिया जाता है। इस मंदिर में हर 12 साल बाद भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र की मूर्ति को बदला जाता है। इन मूर्तियों को बदलते वक्त हर ओर अंधेरा कर दिया जाता है। साथ ही एक पुजारी के अलावा किसी को भी मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाती है। यहां के पुजारियों का कहना है कि वे लट्ठा बेहद मुलायम होता है और हाथ में खरगोश के समान फुदकता है। ऐसा कहा जाता है कि अगर कोई भी शख्स मूर्ति के भीतर बसे ब्रह्मा को देख लेगा तो उसकी तत्काल मृत्यु हो जाएगी। ऐसे में ये बात आज भी एक चौकांनें वाला रहस्य ही है कि क्या वाकई भगवान जगन्नाथ की मूर्ति में ब्रह्मा का वास है।

जगन्नाथ पुरी केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में मशहूर है। दूर-दूर से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। 4 लाख वर्ग फुट में फैली इस जगह में मौजूद भगवान जगन्नाथ का ये खूबसूरत मंदिर कलिंग शैली की मंदिर स्थापत्य कला की झलक पेश करता है। इसके अलावा शिल्पकारी की छाप छोड़ता ये पावन स्थल भारत के भव्य स्मारक स्थलों में शुमार है।

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