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वेणज हुए निषाद-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश: Rishimuni Story
Venaj Hue Nishaad

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Rishimuni Story: आदिकाल की बात है। मनु के वंशज, असग के पुत्र वेण ऋषि नि:संतान थे। ध्यान और तप में लीन रहने वाले वेण के मन में एक बार वासनामय विचार आ गए। उन्होंने फौरन अपना हाथ उठाकर ऋषियों को हट जाने दिया। ऋषि अंगिरा ने उन्हें शाप दे दिया जिसके कारण वेण का उठा हुआ दाहिना हाथ मथानी बन गया। उन्होंने अपनी जंघा को रगड़कर एक मनुष्य सदृश्य एक प्राणी की उत्पत्ति की। वह मनुष्य नाटा (कद छोटा), कोयले की तरह काला था। उसकी नाक चपटी थी। उसका नाम निषाद हुआ। उसे उसके स्वभाव को देखते हुए विंध्याचल पर्वत पर भेज दिया गया।

वेण इतने ही पर नहीं रुके। उन्होंने बाएँ हाथ से मथने का उपक्रम कर तीन और मनुष्यों की उत्पत्ति की। ये तीनों क्रमशः मुशाहंतरा, कोल तथा भीलों के आदि पुरुष हुए अर्थात इनसे ही मुशाहंतरा, कोल तथा भीलों का वंश आरंभ हुआ।

टीप – बाजसनेई संहिता के अनुसार निषाद, भील और भिलाला एक ही थे। महाभारत, विष्णु पुराण तथा हरिवंश में में भी इस तरह की कथा मिलती है। बी. सी. लाहा ने ट्राइब्स इन इंडिया में इसका उल्लेख किया है। एम. सी. राय. द्वारा लिखित द मुंडास एन्ड देयर कंटी में भी यह उल्लेख मिलता है।

निषाद अपने पूर्वजन्म में कभी कछुआ हुआ करता था। एक बार की बात है उसने मोक्ष के लिए शेष शैया पर शयन कर रहे भगवान विष्णु के अंगूठे का स्पर्श करने का प्रयास किया था। भगवान राम निषाद की सहायता से गंगा पार कर सके थे। राम के बाल सखा निषाद राज गुह ने उनका आतिथ्य कर वनवास की अवधि निषाद राजा के रूप में बिताने हेतु अपना राज्य देना चाहा था।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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