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नया जीवन-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश: Life Journey Story
Naya Jeevan

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Life Journey Story: बहुत पुरानी बात है। एक धोबी नदी पर कपड़े धोया करता था। उसका स्वभाव बहुत दयालु था। जब भी उसे कोई मछली दिखाई देती, वह मछली को चारा खिलाता, जब चींटी दिखाई देती तो उन्हें आटा खिला देता। एक दिन वह कपड़े धोने में मगन था। आकाश में बादल आकर छा गए, उसे पता ही नहीं चला। तेज हवा चलने लगी, बादलों की गर्जना सुनकर उसने आसमान की ओर देखा, काले बरसात करने वाले बादल उमड़-घुमड़ रहे थे। वह जल्दी-जल्दी कपड़े धोने लगा कि बरसात होने से पहले कपड़े धोकर निकल सके। तभी एक मछली दिखाई दी। उस मछली को धोबी ने कई बार दाना चुगाया था। मछली ने कहा कि घनघोर वर्षा होने वाली है जो प्रलय ले आएगी। तुम लकड़ी का बड़ा-सा संदूक बना लो और उसके भीतर बैठकर दूर तक जाने के लिए तैयार रहो।

धोबी ने झटपट कपड़े समेटे और घर की ओर भागा। बिना कोई देर किए धोबी ने लकड़ी का बड़ा-सा संदूक बनाया और अपनी बहिन तथा मुर्गे के साथ सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए तैयार हो गया। अचानक तेज गर्जना हुई और कई दिनों तक लगातार तेज बारिश हुई। मूसलाधार पानी बरसता रहा, बिजली चमकती रही, बादल गरजते रहे। चारों तरफ पानी ही पानी। सभी स्थान पानी में डूबने लगे। प्रलय का सा दृश्य उपस्थित हो गया। मनुष्य ही नहीं सभी जीव-जंतु, पेड़-पौधे त्राहि-त्राहि कर उठे। धोबी के घर के भीतर पानी घुस गया तो उसने पति में अपनी बहिन और मुर्गे को बैठाया और सुरक्षित जगह की तलाश में निकल पड़ा। पानी बरसता तो वह संदूक का ढक्कन बंद कर बचाव करता और पानी बंद होने पर ढक्कन खोल कर सुरक्षित स्थान खोजता। कई दिनों तक उसका संदूक पानी में हिचकोले खाते यहाँ-वहाँ उतरता रहा।

प्रलय का पानी उतरने पर राम जी ने अपने सेवकों को सबका हाल-चाल देखने के लिए भेजा। एक सुबह पौ फटते ही मुर्गे ने अपनी आदत के अनुसार बांग दी। सेवक ने बांग सुनी तो उस दिशा में तलाश कर संदूक को खोज लिया। श्री राम जी ने संदूक खुलवाया तो उसके अंदर से बदहवास धोबी और उसकी बहिन तथा मुर्गा निकला। धोबी ने शांत चित्त होने पर श्री राम को पूरी बात बताई। राम जी ने यह पक्का करने के लिए कि स्त्री धोबी की बहिन ही है, धोबी से उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम सभी दिशों में मुख कर कसम दिलाई। धोबी ने बाकी दिशाओं में कसम ठीक से ले ली लेकिन दक्षिण दिशा में मुँह कर कसम लेते समय उसके मुँह से ‘बहिन’ की जगह ‘स्त्री’ शब्द निकला।

राम जी ने धोबी से पूछा कि प्रलय से बचने का यह उपाय उसे किसने बताया। मछली ने जैसे ही यह सुना उसकी जीभ कट गई। तब से मछली बिना जीभ की होने लगी। राम जी ने धोबी को वंश वृद्धि का आदेश दिया। प्रलय पूर्व का संबंध दक्षिण दिशा की ओर मुँह करते की मर गया तथा नए कल्प में वे दोनों नया जीवन पाकर केवल स्त्री-पुरुष हैं। राम जी के आदेश पर उन दोनों ने विवाह कर, पति-पत्नी की तरह घर बसाया। उन्हें सात पुत्रों और सात पुत्रियों की प्राप्ति हुई। राम जी ने उन्हें एक घोड़ा भी दिया लेकिन घोड़े की सवारी करना न जानने के कारण धोबी घोड़े को साथ न लाया। धोबी लकड़ी काटने जंगल गया तो घोड़ा भाग गया। धोबी अपनी घरवाली के साथ जंगल में चला गया। उसके वंशज भील कहलाए।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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