Food Craving Causes: अगर हम अपनी फूड हैबिट्स को देखें तो अक्सर 3 मेन मील के अलावा छोटी भूख को शांत करने के लिए दिन भर कुछ न कुछ खाते रहते हैं। जो आमतौर पर बिजी लाइफ स्टाइल और वेस्टर्न लाइफ स्टाइल को फोलो करने के कारण होती हैं। चाहे हमें भूख लगी हो या नहीं, खाने की बहुत ज्यादा इच्छा होना- के्रविंग है। क्रेविंग को शांत करने के लिए हम हैल्दी खाने के बजाय फास्ट फूड या जंक फूड जैसा अनहैल्दी प्रोसेस्ड खाना ज्यादा खाते हैं। सोडियम, शूगर और फैट में रिच इन चीजों से पेट तो नहीं भरता, शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जरूर बढ़ती रहती है। अनचाहे ही हम मोटापे और लंबे समय में दिल की बीमारी, डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, दिल का दौरा और कई तरह की गंभीर बीमारियों का आप शिकार हो सकते हैं। इसलिए बिना सोचे समझे या सिर्फ मन की तृप्ति के लिए न खाएं। हमेशा सोच समझकर ही डाइट लें।
क्रेविंग के कारण
माइक्रो न्यूट्रीएंट की कमी होना–
जब शरीर में मिनरल और विटामिन की कमी हो जाती है, तो हमारा शरीर क्रेव करता है। शरीर के इस सिगनल की अनदेखी करते हैं, तो शरीर पर गलत प्रभाव पड़ेगा। प्रोसेस्ड खाना खाने से पेट नहीं भरेगा, क्रेविंग होती रहती है। पिज्जा-बर्गर जैसे अनहैल्दी खाद्य पदार्थ ज्यादा खाना गलत है। लेकिन ऐसा भी नहीं हो सकता कि आप इन चीजों को बिलकुल न खाएं। दोनों का बैलेंस करके चलना बेहतर है। यानी अगर सप्ताह के 6 दिन आप घर का पौष्टिक खाना खाएं, एकाध दिन बाहर का पसंदीदा खाना खा सकते हैं। इससे आपको क्रेविंग नहीं होगी क्योंकि इससे आपके शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी नहीं होगी।
ऐसी स्थिति में माइक्रो न्यूट्रिएंट की कमी को पूरा करने के लिए सबसे बेस्ट है- रोजाना रेनबो डाइट लें। आहार में रंग-बिरंगी और मौसमी फल-सब्जियां ज्यादा से ज्यादा शामिल करें। इनमें अलग-अलग रंग के मुताबिक विटामिन, मिनरल और एंटी ऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं। सलाद के तौर पर जितनी सब्जियां कच्ची खा सकती हैं, जरूर खाएं क्योंकि पकाने के बाद उनके पौषक तत्व न चाहते हुए भी कम हो जाते हैं।

साउंड स्लीप है जरूरी– आमतौर एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद सोना जरूरी है। लेकिन जब किसी वजह से ठीक तरह सो नहीं पाते, तो आपका स्लीप पैटर्न गड़बड़ा जाता है। इसका असर आपकी सेहत पर पड़ता है। अगली सुबह उठने पर आपके हार्मोन गड़बड़ा हो जाते हैं। खासकर भूख के ग्रैलिन हार्मोन और तृप्ति के लैप्टिन हार्मोन में असंतुलन आ जाता है। नतीजतन दिन भर आपको भूख ज्यादा लगती है और खाना-खाने के बाद भी ऐसा लगेगा कि पेट नहीं भरा है। ऐसे में आपको दिनचर्या का टाइम शेड्यूल बनाने और नींद पर फोकस करने की जरूरत है। निश्चित समय पर सोने-उठने की दिनचर्या होने पर आप इस समस्या से बच सकते हैं।
फिजीकल एक्सरसाइज की कमी– यह मानना गलत है कि रेगुलर एक्सरसाइज करने से क्रेविंग बढ़ती है। कैलोरी बर्न होती है जिसकी वजह से भूख ज्यादा लगती है। आप भरपेट हैल्दी खाना खाएंगे तो क्रेविेंग नहीं होती। इसके उलट लैथार्जिक होने या खाली रहने पर क्रेविंग ज्यादा होती है क्योंकि इस समय आपके दिमाग के पास कुछ करने के लिए नहीं होता और वह कुछ खाने का सिगनल देता रहता है। जिससे आपको क्रेविंग की इच्छा बढ़ती है। जरूरी है कि रेगुलर फिजीकल एक्सरसाइज या एक्टिविटीज करें जिससे आपको अच्छी भूख लगेगी। आप पौष्टिक और संतुलित भोजन करेंगे और क्रेविंग नहीं होगी।

मानसिक ओैर भावनात्मक कारण– जब आप तनाव में होते हैं और दिमाग में कई बातें घूम रही होती हैं तो दिमाग को एनर्जी की जरूरत रहती है जिससे क्रेविंग होने लगती है। ऐसे में मीठा, नमकीन, तीखा या फ्राइड अनहैल्दी खाद्य पदार्थ खाने लगते हैं। इसी तरह मूड ठीक न होने पर आपको मीठा खाने की तलब या स्वीट क्रेविंग होती है। ऐसे में आप चैक जरूर करें कि क्या आपका दिमाग क्रेविंग कर रहा है या आपका शरीर। क्या आपको असल में भूख लगी है या सिर्फ मानसिक या भावनात्मक संतुष्टि के लिए आप खा रहे हैं क्योंकि ऐसा होने पर मनपसंद चीज खाने के बाद भी आप संतुष्ट नहीं होंगेे।
फूड क्रेविंग को कम करने के टिप्स
पानी पिएं- हमारा दिमाग अकसर कंफ्यूज हो जाता है कि हमें वास्तव में भूख लगी है या हम सिर्फ डिहाइड्रेटिड हैं। जब भी आपको ऐसी क्रेविंग हो तो एक गिलास पानी जरूर पिएं। पानी पीने के कुछ समय बाद खुद को परखें कि सच में आपको भूख लगी है या नहीं। इस दौरान आपकी क्रेविंग कम हो ही जाएगी।
प्रोटीन रिच आहार ज्यादा लें– आमतौर पर हमारी डाइट में प्रोटीन की मात्रा बहुत कम होती है। आहार विशेषज्ञों के मुताबिक हमारे एक किलो वजन के हिसाब से आहार में प्रोटीन की मात्रा 1 ग्राम जरूर होना चाहिए। प्रोटीन हमारी क्रेविंग को कम कर सकता है क्योंकि प्रोटीन को पचाने में काफी समय लगता है। जिससे पेट देर तक भरा होने का अहसास रहता है इसलिए कोशिश करें कि हर मील में प्रोटीन रिच खाद्य पदार्थ जैसे-दालें, दूध और दूध से बने पदार्थ, अंडे, सााल्मन मछली, चिकन जरूर शामिल करें।।

बहुत ज्यादा देर भूखे न रहें-जब हमें बहुत ज्यादा भूख होती है, तो क्रेविंग बढ़ जाती है। हम खाने पर टूट पड़ते हैं या चाॅकलेट, बर्गर, पिज्जा जैसे अनहेल्दी फूड खाने लगते हैं। इससे बचने के लिए दिन में 3 मील न लेकर 5-6 मील लें। यानी हर 2-3 घंटे में हेल्दी चीजें (फल, ड्राई फ्रूट्स, सीड्स) थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाते रहें। इससे आप भूख कम महसूस करेंगे और खाने के सेवन में संयम बरत पाएंगे।

मानसिक तौर पर मजबूत बनें- अगर आप हेल्थ और फिगर के प्रति सचेत हों तो कुछ भी खाने से पहले एक बार जरूर सोचें कि क्रेविंग के चलते अगर आप जंक फूड खाते रहेंगे, तो कुछ समय बाद आपकी हेल्थ पर कैसा असर पड़ेगा। मोटापे का शिकार तो होंगे ही, कई बीमारियों की गिरफ्त में भी आ जाएंगे। खुद को हेल्दी डाइट लेने के लिए खुद को पूरी तरह मोटिवेट करें। संभव है कि शुरू में आपको दिक्कत आए, लेकिन तय है कि हेल्दी फूड खाएंगे तो सालों स्वस्थ रहेंगे।
