भारत कथा माला
उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़ साधुओं और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं
Nari Shakti Story: पड़ोसी के घर चीख-पुकार सुन सरिता दौड़ी-दौड़ी अपने मकान की छत पर पहुंची। पड़ोसी के यहाँ आज फिर बेटा-बहू में लड़ाई हो रही थी। बेटा अपनी बीबी के साथ मारपीट, गाली-गलौज कर रहा था। पास ही खड़ा पाँच साल का बेटा सिसक-सिसक कर रोते हुए कहता जा रहा था, “पापा माँ को मत मारो, पापा माँ को मत मारो”, घर के सदस्यों ने बीच-बचाव कर दिया। वो गाली बकते हुए कह रहा था, तेरे पास पैसे नहीं है! कहता हुआ बाहर निकल गया।
वो औरत आँगन में बैठी रोये जा रही थी, नन्हा बच्चा माँ के आंसू पोंछते हुए कह रहा था, माँ मत रो, मां चुप हो जाओ। यह सुनते ही उस औरत ने झट बच्चे को गोद में छुपा लिया और सिसकियाँ लेती रो रही थी।
यह सब देख, सरिता धम्म से बैठ गई। उसका अतीत चलचित्र की भाँति दिमाग में चलने लगा, वह एक चपरासी की बेटी, उसकी दो छोटी बहनें, गरीब पिता ने मैट्रिक पास होते ही एक सम्पन्न घर में विवाह कर दिया। बिन दहेज नौकरी वाला लड़का मिल गया था। किन्तु उम्र में काफी अन्तर। पहली पत्नी के बच्चे न थे। शादी बच्चों की चाह में उस गरीब से शादी कर ली थी।
समय बीता और वो अब दो बच्चों की माँ बन चुकी थी। अब उस पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था। परिवार के सदस्य दिन-रात गरीब पिता के घर से कुछ न लाई? ताना देते। पति शराब पीकर आये दिन मार-पीट करता। पर सब चुपचाप रोते सहती रही। वो जानती थी पिता के घर कब तक बोझ बनी रहती?
शादी में विदाई के समय माँ ने कहा था, “बेटा अब पति का घर ही तेरा घर है। सुख-दु:ख मिले, धीरज न खोना। बेटियों की विदाई पिता के घर से और पति के घर से अर्थी निकले। अपने गरीब पिता की इज्जत रखना।”
माँ के शब्द अब भी याद थे उसे। कछ साल बाद, एक एक्सीडेंट में सास-ससुर चल बसे। ननद की शादी हो गई। देवर पढ़ाई पूरी कर शहर में नौकरी करने लगे। उसके बच्चे अब बड़े हो गए थे। पति रिटायर्ड हो चुके थे। बच्चों ने शराब छुड़वा दी थी। आज वो हर तरह से सुखी थी।
किन्तु पड़ोस की घटना ने उसके मन को बुरी तरह झकझोर दिया। आज वो पहले की तरह कमजोर, मजबूर नहीं थी। सोच रही थी, चाहे कुछ भी हो वह चुप न बैठेगी। किसी औरत पर अत्याचार न होने देगी। उसने जो हिंसा, दु:ख सहा, वो किसी और औरत के साथ उस जैसा अत्याचार होते नहीं देख सकती। वो उस औरत से जरूर मिलेगी। लड़ाई का कारण जानेगी। और वो सहमत हई तो पुलिस की मदद लेगी। उसका मानना था, घरेलू हिंसा चुपचाप देखते रहना भी अपराध है।
सरिता भीगी आँखों से आँसू पोंछती, सोचती, नीचे उतर रही थी कि, आज वो सुखी है किन्तु दुःख से इस सुख के आने तक का समय, तकलीफें कभी न भुला पायेगी। उसने दृढ़ निश्चय किया कि आज से अपने आस-पड़ोस में कहीं भी किसी औरत के साथ हुई हिंसा पर चुप न बैठेगी। कारण जानेगी और गलत पाया तो पुलिस की मदद लेगी।
आज की दु:खद घटना देख वो अपने आप को सशक्त महसूस कर रही थी। अगले दिन वह कुछ फूल लिए पडोसिन के घर गई। दरवाजा खट-खटाया। अंदर से कोई बृद्ध महिला ने दरवाजा खोला। वह उसे अंदर ले गई। तब सरिता ने बातचीत करते हुए कहा, “मैं मंदिर जा रही थी सोचा आपको भी साथ ले चलूं।”
तब वृद्धा ने कहा, “बेटा मेरी हिम्मत कहां? हाथ-पैर चल रहे हैं इतना ही बहुत है!”
वह फिर बोली, “बहू तू जा मंदिर हो आ। मन अच्छा हो जाएगा।” इतना सुन सरिता अनजान बनते हुए झट बोल उठी, “क्यों क्या हुआ? तबियत तो ठीक है!”
इतना सुन, वृद्धा कल की घटना के बारे में बोल रही थी। वह अच्छी तरह जानती थी कि इतना शोर, चीख-पुकार? पडोसियों ने सब देखा-सुना जरूर होगा!
सरिता ने फिर पूछा, “आपका बेटा बहू से पैसे क्यों माँग रहा था?”
वह लम्बी सांस लेते हुए बोली, “शराब पीने के लिए। पूरा घर सिर पर उठा लेता है। नाक में दम कर रखा है। बड़े भाग्य की खानदानी बहू है, जो इतना सब सह रही है!” इतने में अंदर से बहू आई और दोनों मंदिर चल दी। रास्ते में सरिता ने कहा, “तुम चाहो तो हम पुलिस का सहारा लें? मैं तुम्हारे साथ हूं।”
सुनते वह उदास हो बोली, “नहीं, नहीं आंटीजी मुझसे ये न होगा। वो मुझे घर से निकाल देंगे। कहां रहूंगी? मायके में भाई-भाभी हैं बस। कौन रखेगा मुझे?”
तब सरिता बोली, “कल मैं तुम्हारे पति से बात करूंगी, समझाऊंगीं।” और अगले दिन सरिता ने वैसा ही किया। तरह-तरह के उदाहरण दिए। मासूम बच्चे की बात कही। बहुत समझाया। उसके समझाने का असर हुआ। अब घर में काफी शांति थी।
सरिता पूरी तरह तैयार थी कि अब मार-पीट की तो सीधी पुलिस को बुला लेगी। सरिता उस औरत और मासूम बच्चे की दशा देख बेहद दुःखी हो उठी थी, उसमें आत्मविश्वास आया। आज उसके अंदर छुपी नारी शक्ति जाग चुकी थी।
भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’
