Grehlakshmi Story: आज की सुबह का आकाश एकदम साफ था, आज मेरे मन पर भी कोई सिलवट बाकी नहीं थी। मैंने गहरी लम्बी सांस ली और कीर्ति मेरी जिगरी यार को फोन लगा दिया।
‘प्रीती क्या हुआ आज सुबह-सुबह कैसे याद किया? और कल से तुम्हारा फोन क्यों स्विच ऑफ जा रहा? कीर्ति लगातार सवाल पर सवाल करती जा रही थी।
‘कीर्ति तुम आज ऑफिस देर से चली जाना, अभी घर आ जाओ, मुझे तुम्हारी जरूरत है। मैंने कहा। कीर्ति आधे घंटे में मेरे घर आ गई।
‘मेरा सर फटा जा रहा, जल्दी बताओ यार, बहुत टेंशन हो रही। कीर्ति को देखते ही मुझे रोना आ गया।
‘लो जी अब तुम शुरू हो गईं, मेरी बहन पहले मुझे कुछ बता दो, फिर जी भर कर रोना।कीर्ति ने ये कहते हुए माहौल को हल्का करने की कोशिश की।
‘कीर्ति मैं आलोक से शादी नहीं कर सकती, उसके साथ मेरा दम घुटता है। मैंने रोते हुए कहा।
‘दो महीने बाद तो शादी है तुम्हारी और ये आज तुम क्या कह रही हो! सब कुछ तो फाइनल हो गया है।
‘कोई तो बात होगी, जो तुमने इतना बड़ा फैसला लिया है। कीर्ति ने सवाल किया।
‘यार कीर्ति वो हर बात में मुझे टोकता रहता है, कभी मेरे ड्रेसिंग सेन्स को लेकर मजाक उड़ाता है, कभी मेरे घर को लेकर। शादी में भी तमाम खर्चों का दबाव पापा के ऊपर डालता रहता है। हमारे बजट की कोई परवाह नहीं। बस अपनी पसंद और ब्रांड थोपता रहता है। पापा भी मेरी खुशी का सोच कर सब जुटाते जा रहे हैं और वो किस तरह जुटा रहे हैं, ये देखकर कोई बेटी कैसे खुश हो सकती है।
हर समय फोन करके मुझे मानसिक प्रताड़ना देता रहता है कि इतनी देर बाद मेरा मेसेज क्यों देखा? इतनी देर से मेरा फोन क्यों उठाया? मार्केट से इतनी देर में क्यों लौटीं? आज सुबह तुम्हारा फोन बिजी क्यों जा रहा था? इतनी देर तक नेट क्यों ऑफ था? मुझसे गुड नाइट कहने के बाद भी तुम इतनी देर तक किससे चैट कर रहीं थीं? मुझसे बात करते समय तो तुम्हें नींद आ रही थी!
तुमने क्या खाया, क्या पहना, एक-एक बात की रिपोर्ट देते-देते मैं थक गई हूं। मुझे जीवनसाथी चाहिए था, जो मुझसे प्रेम करता और मेरे लिए भी एक स्पेस रहने देता रिश्ते में।
उसके फोन आने से अब मुझे खुशी नहीं होती। भीतर से डर जाती हूं, हर समय सॉरी बोलते-बोलते। उसे मनाते-मनाते मैं अब थक गई हूं, लग रहा है मैं किसी पिंजरे में कैद हूं। जाने कब से मेरे मन की भीत दरकती जा रही है। इससे पहले कि टूट कर भरभरा कर गिर जाए, मैं इस रिश्ते से समूची बाहर निकल आना चाहती हूं।
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हमेशा चुपचाप मिलने के लिए बुलाता रहता है, मेरे घर में ऐसा माहौल नहीं है कि मैं रोज-रोज उससे मिलने जाऊं, पर वो पीछे पड़ जाता है और जब मिलने जाती तो पूरे समय मुझे टोकता रहता।
पिछले हफ्ते तो उसने हद ही कर दी। मुझे मिलने के लिए बुलाया और वहां उसके दो दोस्त भी अपनी पत्नियों के साथ थे।
‘प्रीती देख लो मेरे दोस्तों की बीवियों को, तुम्हें इसलिए आज बुलाया है कि तुम कुछ सीख सको इनसे।
दोस्तों की पत्नियां भी शॄमदा हो रही थीं, उन्होंने बात सम्भालने की भरसक कोशिश की पर उस दिन मेरे आत्मसम्मान को चोट पहुंची थी।
‘एक ही जीवन तो मिला है, उसे भी मैं एक ऐसे आदमी के साथ गुजार दूं जो मुझे चौबीस घंटे केवल हिकारत से देखता रहे। अभी तो केवल सगाई हुई है, अभी तो हालात हमारे वश में है।
और फिर मेरे असिस्टेंट प्रोफेसर के इंटरव्यू का रिजल्ट आने वाला है, मुझे पूरी उम्मीद है कि मेरा सलेक्शन हो जाएगा। अगर नहीं भी हुआ तो मुझे खुद पर भरोसा है कि मैं कुछ न कुछ तो बढ़िया कर ही लूंगी लेकिन अगर आलोक के साथ रही तो ना ही मैं बचूंगी और न मेरा वजूद। मैं लगातार बोलती रही और कीर्ति चुपचाप मुझे सुनती रही।
‘प्रीती मैं तुम्हारे इस फैसले के साथ हूं, कीर्ति ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखते हुए कहा।
‘कीर्ति तुम तो मेरी बात समझ रही हो ना!! पर पापा-मम्मी मेरी बात नहीं समझ रहे, उल्टा मुझे ही समझा रहे हैं, तमाम उदाहरण दे देकर। मैंने कहा।
‘चलो अंकल आंटी से बात करते हैं और हम दोनों ड्राइंगरूम में आ गए। अंकल आंटी जी ने वही तर्क दिए जिनकी हमें उम्मीद थी।
‘बेटा हमारे समाज में शादी टूटना अच्छी बात नहीं होती। लड़के वालों को कोई दोष नहीं देता, सारे आक्षेप लड़की और लड़की के घर वाले ही सुनते हैं।
‘अंकल यही सोच तो बदलनी है हम लोगों को। अगर प्रीती शादी के बाद दुखी रही तो क्या आप लोग सुख से रह पाएंगे। जब अभी वो प्रीती को इतना तंग करता है तो शादी के बाद क्या हाल करेगा। कब तक लड़की होने के त्रास को हम लड़कियां सहती रहेंगी और लड़के वाले इसका फायदा उठाते रहेंगे। कीर्ति ने समझाते हुए पापा मम्मी से कहा।
खैर हमारे मजबूत तर्क के आगे पापा-मम्मी की एक न चली। उन्होंने हमारे फैसले का समर्थन भी नहीं किया पर दुखी मन से हमारे फैसले को स्वीकृति जरूर दे दी।
रिश्ते का इंकार सुनते ही आलोक का परिवार तो आग बबूला हो गया। उन्होंने पापा को खूब खरी खोटी सुनाई और जैसा कि होता है मेरे बारे में भी खूब अनाप-शनाप बोला।
लगभग एक महीने बाद उच्चतर सेवा आयोग का रिजल्ट आया। मैंने मम्मी पापा को खुशखबरी देने के बाद कीर्ति को फोन मिलाया, वो ऑफिस में थी।
‘हेलो कीर्ति, मेरा सलेक्शन हो गया है। मैं असिस्टेंट प्रोफेसर बन गई हूं। अब ये खबर सुनते ही कीर्ति खुशी से उछल पड़ी।
जाहिर है एक छोटे शहर की लड़की का सलेक्शन होने की खबर पूरे शहर में आग की तरह फैल गई। अखबार में निकल गया कि फिरोजाबाद की एक लड़की ने मां-बाप का नाम रोशन किया, उच्चतर सेवा आयोग में चयन।
आलोक और उसके परिवार के हाथों से एक कमाऊ बहू का रिश्ता जा चुका था। उन्होंने बहुत जगह से घर पर दबाव डलवाया कि शादी कर दें। आलोक ने कई बार मुझसे मिलने की भी कोशिश की लेकिन मैं अब इस लालची व्यक्ति के फेर में नहीं पड़ना चाहती थी और मैं अपने निर्णय पर कायम थी।
आज इस बात को लगभग डेढ़ साल हो गए हैं और मैं आज उसी अपनी दोस्त के घर के रास्ते में हूं, जो मेरे इंतजार में फोन पर फोन किए जा रही है।
लो जी क्यों कर रही हैं कीर्ति जी इंतजार। अब ये भी बताना पड़ेगा, आज मेरी सहेली की शादी का संगीत है और बन्नो की सहेली न हो तो क्या रौनक आएगी।
‘कीर्ति मैं आ गई, मेरी ड्रेस देखो सबसे पहले, आज देखना मैं ही मैं दिखूंगी संगीत में। मैंने चहकते हुए कहा।
कीर्ति बोली, ‘जाओ, आज तो नूर मेरे ऊपर ही बरसेगा, मैं बन्नी जो हूं और हम दोनों खिलखिला कर हंस पड़े।
‘तुम अब तीन दिन यहां से कहीं नहीं हिलोगी। मेरे साथ रहना है तुम्हें। मैंने आंटी से पहले ही कह दिया था कीर्ति ने कहा।
‘तुम न भी कहतीं तो भी मैं तुम्हारे पास से हिलती नहीं।
‘यार बहुत तेज भूख लगी है, कुछ खिलाओगी नहीं क्या। मैंने कहा।
‘मम्मी, प्रीती और मेरे लिए लंच यहीं भिजवा दीजिए। कीर्ति ने तेज आवाज में कहा कि आंटी तक उसकी आवाज चली जाए।
लंच करने के बाद कीर्ति ने कहा, ‘प्रीती एक काम कर दो यार, मेरे बालों में लगाने के लिए गजरा लाना है, तुम अरविंद भैया के साथ ले आओ। प्लीज- प्लीज मेरी दोस्त जल्दी ले आओ। ब्यूटीशियन आने वाली होगी, पहले से ही बहुत देर हो चुकी है।
मैं कुछ कहती इससे पहले उसने अरविंद भैया को आवाज लगा दी और वो कार की चाबी लेकर आ गए। मैं आगे की सीट की तरफ बढ़ रही थी कि उन्होंने आगे बढ़कर कार का दरवाजा खोल दिया। मैंने एक नजर उनके चेहरे पर डाली तो उनके चेहरे पर एक भली सी मुस्कान तैर गई।
मैंने बस हैलो किया और गाड़ी में बैठ गई। गाड़ी में जगजीत सिंह की गजल बज रही थी, ‘तेरे आने की जब खबर महके, तेरी खुशबू से सारा घर महके।
मुझे कीर्ति पर गुस्सा आ रहा था कि उसने क्यों एक अजनबी के साथ मुझे भेज दिया है। कितना अजीब लग रहा है।
‘जी, बस यहीं साइड में लगा लीजिए, मैंने उनसे कहा और मैं गजरा लेने चली गई।
‘भैया गेंदे और गुलाब की लड़ी दे दीजिए दो मीटर।
‘एक बेला के फूलों की लड़ी भी दे दीजिए, पीछे आवाज की तरफ मुड़ी तो देखा अरविंद जी फूलों की दुकान पर आ चुके थे।
‘दो मीटर काफी रहेगी? उन्होंने मुझसे पूछा।
‘जी, मुझे क्या पता कि आपको कितनी चाहिए होगी। मैंने तुनकते हुए कहा।
‘भैया जितनी मैडम ने ली है उतनी ही मुझे भी दे दीजिए। इतना कहकर उन्होंने पैसे पूछे और आगे बढ़कर दे दिए।
जाने क्या था उस चेहरे में कि मेरा मन उस चेहरे और सादगी के आकर्षण में बंधता जा रहा था। गाड़ी के शीशे बंद थे तो फूलों की खुशबू पूरी कार में घुलने सी लगी।
रास्ते में हम दोनों ने अल्फाजों में तो कोई बात नहीं की लेकिन हम दोनों के मन चुपके से थोड़े-थोड़े जुड़ने लगे थे।
घर पास में ही था, मैं कीर्ति का गजरा लेकर उतरने लगी तो अरविंद जी बोले, ‘सुनिए, मैं पीछे पलटी
‘जी, ‘ये गजरा आपके लिए। मना मत कीजिएगा ले लीजिए। मन न हो तो न पहनिएगा।
अरविंद जी की आवाज ऐसी लग रही थी मानो दूर पहाड़ों से पानी का कोई मीठा सोता बहता हुआ आ रहा हो। एकदम पवित्र, एकदम उजला।
मैंने गजरा ले तो लिया पर फिर खुद से ही जिरह करने लगी कि क्या सोच रहे होंगे वो मेरे बारे में! और मैंने क्यों ले लिया?
मैंने तो आज तक गजरा लगाया भी नहीं। जाने दो, मुझे क्या!
‘प्रीती मेरा लहंगा देखो, ज्यादा ब्राइट तो नहीं लग रहा! कीर्ति की आवाज से मेरा ध्यान टूटा।
‘अरे नहीं बहुत प्यारा लग रहा मैंने कहा।
‘कीर्ति मैं भी जल्दी से चेंज कर लूं, अपनी ब्यूटीशियन से कहना कि मेरा हेयर स्टाइल भी बना देंगी।
‘हां-हां, क्यूं नहीं कीर्ति ने कहा।
‘सुषमा मेरी दोस्त का ऐसा हेयर स्टाइल बनाना कि आज कोई फूल अटक जाए मेरी दोस्त के दिल में, मतलब बालों में।
मुस्कुराते हुए जब कीर्ति ने कहा तो जाने क्यों अरविंद जी का चेहरा मेरी आंखों के सामने आ गया। मैंने झट अपने ख्यालों को झटक दिया। क्योंकि बीते समय की धूल अब तक मेरे मन पर पड़ी हुई थी। मैंने लाल रंग का कुर्ता और शरारा पहना था। लाल मुझे बहुत पसंद था और यही वो रंग था जिसको आलोक ओल्ड फैशन कहते हुए मुझे जलील किया करता था।
कानों में बड़े से इयरिंग्स पहन लिए थे। गले में हल्का सा सेट, हाथों में लाल चूड़ियां और अब बाल भी बना दिए थे सुषमा ने।
‘दीदी आप एक बार शीशा देखकर चेक कर लो अपना हेयर स्टाइल, सुषमा ने कहा।
फिर जाने क्या सोचकर मैंने सुषमा से कहा कि ड्रेसिंग टेबल पर जो गजरा रखा है, वो भी सेट कर दो मेरे बालों में।
बालों में गजरा लगा कर जैसे ही मैं शीशा देखने को हुई कीर्ति ने मुझे छेड़ना शुरू कर दिया, ‘ओहो, गजरे-शजरे, आज तो कोई बड़े-बड़े कत्ल करने पर आमादा है।
उसकी इस बात पर मैं शरमा गई। फिर मैंने बात बदलते हुए कहा कि यार चलो, अब सामने पार्क में कब से नाच-गाने की आवाजें आ रही हैं और हम अब तक घर में ही हैं।
घर के सामने ही पार्क में संगीत का कार्यक्रम रखा गया था, पूरा पार्क जगमगा रहा था।
मैं जैसे ही कीर्ति को लेकर पहुंची, सब लोगों ने कहा कि अब प्रीती डांस करेगी। सबने पकड़ कर मुझे खींच लिया और गाना बजने लगा, ‘मन क्यों बहका रे बहका आधी रात को, गजरा महका रे महका आधी रात को।
अरविंद जी ने पास आकर कहा कि ये गाना लगा दूं और मैं बस मुस्कुरा दी।
डान्स परफॉर्म करके जब मैं आई तो अरविंद जी की नजरें लगातार मुझे ही देखे जा रही थीं और पूरा पंडाल तालियों से गूंज रहा था।
पंडाल से लौटकर जब मैं किचन से पानी लेकर कमरे में जा रही थी तो फिर वही रस में घुली आवाज आई, ‘सुनिए जी, मैंने कहा आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं। ये लाल रंग आप पर बहुत खिल रहा है। उन्होंने कहा और मैं थैंक यू कहते हुए आगे बढ़ने लगी।
‘सुनिए, फिर वही आवाज।
‘जी, मैंने कहा, ‘गजरा भी बहुत अच्छा लग रहा है आप पर, शुक्रिया गजरा लगाने के लिए।
रात को मैंने कीर्ति से पूछा कि ये अरविंद कौन हैं? ‘प्रीती ये मेरे पापा की चचेरी बहन के बेटे हैं। इंजीनियर हैं। भैया के पापा नहीं हैं, बहुत संघर्षों से पढ़े हैं भैया। स्वभाव से बहुत अच्छे हैं, इन दिनों इनकी पोस्टिंग आगरा में है तो आते-जाते रहते हैं। शादी के लिए पापा ने इनसे छुट्टी लेकर यहीं रहने को बोला था। तभी आए हुए हैं। अभी चीकू तो छोटा है ना, वो इतनी जिम्मेदारी से शादी ब्याह के काम कहां कर पाएगा। चीकू कीर्ति का छोटा भाई है, जो अभी बीटेक कर रहा है।
‘प्रीती एक बात कहूं।
‘हां कहो ना! मैंने उसकी तरफ देखते हुए कहा।
‘प्रीती अब बीती बातों पर मिट्टी डालो और आगे बढ़ो। तुम्हारे गुलाबी सपने नीले आकाश में उड़ने के लिए फड़फड़ा रहे हैं। उन्हें पंख फैलाकर उड़ने दो। कब तक पुराने घावों के बारे में सोच-सोच कर दुखी होती रहोगी। हर पुरुष आलोक जैसा नहीं होता, मुझे देखो मैं कितनी खुश हूं मनीष के साथ।
‘अरविंद भैया को तुम बहुत पसंद आ गई हो। मैं उनकी आंखों में तुम्हारे लिए कुछ ख्वाब सजते देख रही हूं और तुम किस तरह अपने मन की कही आवाज झुठला रही हो, ये भी मुझसे छिपा नहीं है कीर्ति ने मुझसे कहा।
मैंने जवाब में कुछ कहा नहीं कीर्ति से, बस बात टाल दी।
शादी वाले दिन ज्वैलरी लेकर आनी थी मार्केट से। दोबारा फिर मुझे अरविंद जी के साथ जाना पड़ गया। अरविंद जी और हम दोनों पूरे रास्ते चुप रहे। हां गाड़ी में फिर इस बार जगजीत सिंह की गजल के बोल बजते रहे, जो शायद अरविंद जी ने मेरे लिए ही लगाई थी।
‘प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है न, परिंदों को उड़ने में वक्त तो लगता है। जिस्म की बात नहीं थी उनके दिल तक जाना था, लम्बी दूरी तय करने में वक्त तो लगता है।
वापसी में अरविंद जी ने कहा, ‘प्रीती जी, कीर्ति से आपके बारे में बहुत सुना था। जब मैंने आपको पहली बार देखा, उसी लम्हे आपने मेरे दिल में जगह बना ली और अब आप मुझे बहुत अच्छी लगने लगी हैं। इतनी कि आपके बगैर अपने जीवन का तसव्वुर भी नहीं कर पा रहा।
मुझे आपके जीवन में पिछली हुई घटना का इल्म है और मैं आपको इतना भरोसा दिलाना चाहता हूं कि आप जैसी भी हैं वैसी ही प्रिय हैं मुझे और हमेशा रहेंगी। बस आप मुझे अपने जीवनसाथी के रूप में पूरे मन के साथ स्वीकार कर लें फिर देखिएगा कैसे मैं आपके जीवन की स्लेट पर अपने प्यार की नई अमिट इबारत लिखता हूं। मैं आपके जवाब की प्रतीक्षा करूंगा।
मैंने अरविंद जी की आंखों में झांकने की कोशिश की और मुझे उनमें अपने अक्स के सिवा कुछ न दिखा।
हम घर लौट आए, उस दौरान हमारे बीच कोई संवाद नहीं हुआ। घर पहुंच कर मैंने कीर्ति को जूलरी पकड़ाई और उसके लहंगे का बैग भी अलमारी से निकाल दिया। सुषमा कुछ देर में आती होगी कीर्ति को रेडी करने।
तभी किसी ने दरवाजा नॉक किया, मैंने दरवाजा खोला तो सामने अरविंद जी थे।
‘सुनिए ये गजरा ले लीजिए मैं लेकर आने लगी तभी उन्होंने दुबारा पुकारा, ‘सुनिए उनकी इस बार की पुकार में जाने क्या था जैसे लगा कि बस ये आवाज मेरे कानों में जीवन भर घुलती रहे।
‘ये एक गजरा आपके लिए भी लाया हूं, इसमें मेरे प्यार की सुगंध है। अगर आपको मेरा प्रस्ताव स्वीकार है तो आप इसे पहन लीजिएगा। मैं आपको देखने के लिए पलकें बिछाए छत पर आपका इंतजार करूंगा। अगर आपको मेरा प्यार स्वीकार नहीं है तो मैं दोबारा आपसे इस बारे में बात नहीं करूंगा। समझ जाऊंगा कि मेरे प्यार और मुझमें ही कुछ दोष होगा जो आपका दिल जीतने में मैं नाकामयाब रहा।
मुझे लगा कि मैं वहीं रो पडूंगी। मैं गजरा लेकर अंदर आ गई। कीर्ति मुझे देखते ही आंखों-आंखों में सवाल करने लगी। मैंने भी आंखों-आंखों में अपने प्यार का इकरार कर लिया।
बारात आने में अभी समय था, सब लोग द्वारचार, तिलक आदि की तैयारियों में व्यस्त थे। मैं तैयार होकर गजरा पहन कर छत की तरफ चल दी।
वहां अरविंद जी बेचैनी से टहल रहे थे। मेरे बालों में गजरा देखकर मुस्कुरा दिए।
‘कैसी लग रही हूं मैं? कुछ कहेंगे नहीं! मैंने उनकी आंखों में देखते हुए कहा।
मेरे कंधों पर दोनों हाथ रखते हुए वे बोले, ‘इतनी खूबसूरत कि जी कर रहा है कि आज ही चांद की गवाही में आपको अपना बनाकर अपने घर ले जाऊं। तुम इंतजार करना, अगले हफ्ते ही मैं अपनी मां के साथ आऊंगा तुम्हारे घर और जल्द विदा करा कर ले आऊंगा तुम्हें अपने पास।
खुले आकाश की चादर तले हम दोनों एक-दूसरे का हाथ थामे मुस्कुरा रहे थे। एक अरसे बाद मेरा मन भी मुस्कुरा रहा था मेरे संग…।
