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लंबे केश वाला चरवाहा लड़का-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड: Cowboy Story
Lambe Kesh Wala CHarvaha Ladka

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Cowboy Story: एक गाँव में एक चरवाहा लड़का रहता था। वह इतना दुबला और कमजोर था कि थोड़ी देर भी खड़ा नहीं रह पाता था और उसे गाय को हाँकने वाले डंडे का सहारा लेना पड़ता था। एक दिन गाय ने उससे पूछा कि तुम इतने दुबले और कमजोर क्यों होते जा रहे हो?

लड़के ने कहा, “मेरी सौतेली माँ मुझे अच्छे से खाना नहीं देती है। जिसपर गाय ने उससे कहा, “किसी को बताना नहीं, मैं तुम्हें खाना दूंगी”। तुम ऐसा करो कि जंगल से पत्ते लाकर उनसे दोना बना लो। गाय ने अपने एक सिंग से दोने में चावल और दूसरे सिंग से सुस्वादु झोर डाल दिया। ऐसा बहुत दिनों तक चलता रहा और धीरे-धीरे लड़का मोटा तगड़ा हो गया।

लड़के की सौतेली माँ को गाय और उसके बारे में एक दिन पता चल गया, उसने लड़के से बदला लेने की सोची। उसने बीमारी का बहाना किया एवं कहा कि अब वह शायद जी नहीं पाएगी। लोगों ने उससे पूछा कि ऐसा क्या किया जाए जिससे वह ठीक हो सकती है? उसने जवाब दिया कि अगर तुम लोग गाय को मार दो तो मैं जी जाऊँगी। सबने कहा ठीक है, अगर गाय को मारने से तुम ठीक हो जाओगी तो हम गाय को मार देंगे।

लड़के को जैसे ही यह बात पता चली कि उसे जीवन देने वाली गाय का जीवन खतरे में है, वह दौड़ कर उसके पास गया और बोला “वे लोग तुम्हें मार देना चाहते हैं।” यह सुनकर गाय ने कहा “तुम जाओ और धान के पुआल की एक रस्सी बनाओ। उसके कुछ हिस्से को मोटा बनाना और कुछ हिस्से को पतला रखना और उसे ऐसी जगह में रखना, जहाँ वे इसे आसानी से ढूंढ सकें। जब वे मुझे मारने लगें तब तुम मेरी पुंछ पकड़ कर खींचना।” अगले दिन गाँव के लोग गाय को मारने का इंतजाम करने लगे और उसी रस्सी से, जिसे लड़के ने एक दिन पहले बनाया था, गाय को एक खूटे से बांध दिया। एक आदमी ने अपना कुल्हाड़ा उठाया और गाय की गर्दन पर वार करने ही वाला था कि लड़के ने गाय की पूँछ को जोर से पकड़कर खींचा। गाय रस्सा तुड़ा कर लड़के के सहित हवा की गति से भाग खड़ी हुई। दोनों एक जंगल में पहुँच गए। वहाँ दोनों रहने लगे। वहाँ एक गाय से कई गायें उत्पन्न हुई एवं वहाँ गायों का एक बड़ा झुंड हो गया। एक दिन लड़का गायों को चराने के बाद उन्हें नदी के किनारे पर ले गया। गायों ने अपनी प्यास बुझाई और आराम करने लगी। लड़के ने वहीं नदी में स्नान किया और अपने केश संवारे। उसके केश बहुत सुंदर एवं खूब लंबे हो गए थे। केश बनाने के क्रम में उसका एक केश नदी में गिर गया और नदी की धारा में बह गया।

नदी में कुछ आगे जाकर एक राजकुमारी अपनी सहेलियों के साथ स्नान कर रही थी। जब वह पानी में थी तो उसने केश को नदी की धारा में बहते देखा। उसने अपने अनुचर को आदेश देकर उसे बाहर निकालने के लिए कहा। निकालने के बाद केश की जब माप ली गई तो केश बारह बिता लंबा निकला। उसकी सहेलियों ने बताया कि यह किसी युवा पुरुष के केश हैं, क्योंकि इन्हें कभी गूंथा नहीं गया है।

घर लौटने के बाद राजकुमारी अपने पिता के पास गई और उसे केश दिखाते हुए कहा कि यह केश उसे नदी में मिला है और उसने निश्चय किया है कि वह उसी से विवाह करेगी, जिसका यह केश है। राजा ने भी इस पर अपनी सम्मति दे दी और अपने सिपाहियों को आदेश दिया कि यह केश जिसका भी है उसे ढूंढ कर ले आए। वे राजा का आदेश पाकर राज्य के सभी नाइयों के यहाँ गए और पूछा कि यह बारह बिता का केश किसका है? लेकिन सभी नाइयों ने अनभिज्ञता जाहिर की। नौकरों के हार मान जाने के बाद यह निश्चय हुआ कि इस मामले में राजा के पालतू तोते की मदद ली जाए।

बहुत इधर-उधर उड़ने के बाद तोता आखिरकार लड़के को खोजने में सफल रहा। शाम का वक्त था। लड़का फुर्सत में बैठ कर अपने लंबे केश संवार रहा था। उसकी बाँसुरी वहीं पास ही में रखी थी। तोता सोचने लगा कि कैसे लड़के को राज्य के महल में ले जाया जाए।

बाँसुरी को देखकर उसके मन में विचार आया कि इस बाँसुरी के सहारे वह उसे वहाँ ले जा सकता है। तोते ने बाँसुरी को अपनी चोंच में पकड़ा और उड़ कर थोड़ी दूर जाकर एक झाड़ी पर बैठ गया। अपनी बाँसुरी को पाने के लिए लड़का तोते के पीछे-पीछे दौड़ा। लेकिन लड़के के पास आने पर तोता फिर आगे उड़ गया और इस तरह से तोता एक झाड़ी से दूसरी झाड़ी पर बैठता हुआ राजा के महल में पहुँच गया। राजमहल में उसके केश की माप ली गई और पाया गया कि उसके केश की लंबाई 12 बिता है। उसके बाद राजकुमारी के साथ उसकी सगाई धूमधाम से कर दी गई। लेकिन कहानी का अंत यहीं नहीं हुआ।

लड़के को अपनी गायों की चिंता हो रही थी, जिन्हें वह बाड़े में बंद कर आया था। उस रात्रि उसने राजमहल में राजा के अतिथि के रूप में विश्राम किया एवं अगले दिन सुबह-सुबह वापस अपने स्थान के लिए निकल पड़ा। जब वह वापस पहुंचा तो दिन बहत चढ चुका था। उसकी गायें बाडे में बंद भूख प्यास से व्याकुल हो रही थी। बाड़े में देर तक बंद रखे जाने के कारण वे बहुत क्रोधित भी थी। लड़के ने जैसे ही बाड़े का दरवाजा खोला उन्होंने उसे ढूस कर गिरा दिया एवं उसके बालों को अपने पैरों से रौंदते हुए बाहर जाने लगी। थोड़ी देर में ही उसके सारे केश निकल गए एवं वह पूरी तरह गंजा हो गया। लेकिन उसने उसकी परवाह न करते हुए अपनी सारी गायों को जमा किया एवं राजमहल में जाने के लिए निकल पड़ा। राजमहल पहुँचने पर सबने देखा कि उसके केश गायब हैं। केश नहीं होने के कारण राजकुमारी ने उससे शादी करने से मना कर दिया। इस प्रकार वह राजा का दामाद बनने के बदले उसका चरवाहा बन गया।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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