बड़ा मजा आता है यह दृश्य देखकर जब तथाकथित पतिगण बाजारों में, पार्कों में, रेलवे फ्लेटफार्म और सिनेमाघरों में अपनी स्थूलकाय पत्नी की नजर बचाकर चोर निगाहों से किसी अन्य की सुंदर पत्नी को टीप रहे होते हैं। खुदा न खास्ता किसी सुंदर महिला से अगर बात करने का मौका मिल जाए, फिर तो कहने ही क्या? इनकी बांछे खिल जाती हैं, लेकिन अगले ही क्षण पत्नी की घूरती निगाहें सारा मजा किरकिरा कर देती हैं। कुछ पल ही सही, स्वर्ग का आभास तो हो ही जाता है।
ऐसे खुशनुमा पल भले ही कुछ देर के लिए हों, लेकिन उत्सुकता तो जगा ही जाते हैं। खूबसूरत महिलाओं को देखने से पुरुषों को जिस स्वर्गिक आनंद की अनुभूति होती है वैसी खूबसूरत पत्नी को देखकर नहीं होती। पति महाशय के पास दफ्तर में यदि पत्नी का फोन आ जाए तो मायूसी छा जाती है, लेकिन किसी महिला मित्र या सहकर्मी का फोन आ जाए तो बल्लियों उछलने लगते हैं। फोन पर बात करते हुए शक्ल देख दूर से ही अनुमान लगाया जा सकता है कि फोन पत्नी का है या अन्य महिला का।
खैर, जो भी हो, पतियों की इस क्षणिक सुखद अनुभूति को मेरे मन में भी पति बन कर देखने की जिज्ञासा जागृत हुई है। वो क्या है न, कि ऐसा पत्नियों के साथ नहीं होता कि किसी अन्य के पति या किसी और पुरुष को कनखियों से देखकर वैसी ही अनुभूति हो, जैसा कि पतियों को होती है। बस इसी अनुभूति का आनंद लेने की इच्छा है यह इस जन्म में तो पूरी होने से रही। मैं निश्चित रूप से अगले जन्म में पति बनना चाहूंगी। वैसे भी, इस जन्म के पतियों के पत्नी के प्रति उपेक्षित व्यवहार, सकीर्ण दृष्टिकोण और पत्नियों की असंतोषजनक पारिवारिक और सामाजिक स्थिति को देखते हुए मैं यही कामना करूंगी कि अगले जन्म में मुझे पति बनने का सौभाग्य मिले और मैं एक आदर्श पति बनकर अपनी पत्नी की भावनाओं को समझूं, उसकी अभिरुचियों को विकसित करूं और उसे दोस्त की तरह सहारा दूं, न कि पति की तरह हुक्म चलाऊं, जैसा इस जन्म में होता है।
इस जन्म में नारी को पग-पग पर जो कांटे चुभे हैं, पति रूप में मैं उन कांटों को निकालने और पगतलों में खुशियों के फूल बिखेरने की कोशिश जरूर करूं। वैसे तो इस जन्म में पति के रूप में पुरुषों ने नारी पर जो जुल्म ढाए हैं, उन जुल्मों का गिन-गिन कर बदला लेने के भी अच्छे चांसेस हैं, किन्तु पति रूप में मैं ऐसा नहीं करूंगी, वरना इस जन्म के पत्नी पीड़क पतियों और मेरे में अंतर ही क्या रह जाएगा? पति बनने के पीछे एक मंशा शोध करने की भी है।
पति बनकर मैं जानना चाहती हूं कि आखिर पत्नी पर झूठे रौब का खौफ, गर्व, अहंकार और वर्चस्व स्थापित करने के पीछे का मनोविज्ञान क्या है? वे ऐसा करके अपने अहं की तुष्टि करते हैं या सुखद आनंद की अनुभूति करते हैं। निश्चित ही जब मेरा यह शोध पूरा हो जाएगा और उसका निष्कर्ष सबके सामने आएगा कि दरअसल इस प्रकार के पति का अपना वजूद होता ही नहीं है इसलिए झूठा वर्चस्व कायम करने की होड़ में वे बेचारी पत्नी को हथियार बनाते हैं तो अवश्य ही उनके मानसिक स्तर में सुधार आएगा। अगले जन्म में पति बनने की तमन्ना इसलिए नहीं है कि इस जन्म के पतियों द्वारा किए जाने वाले वैधानिक, अवैधानिक कृत्यों से होने वाले आनंद की अनुभूति कर सकूं, बल्कि उद्देश्य है पतियों को यह अनुभूति कराना कि पत्नी को कैसा शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दंश झेलना पड़ता है।
इस जन्म में मैंने अधिकतर मामलों में पत्नियों को प्रताडि़त और उपेक्षित होते ही देखा है। पत्नी चाहे गृहिणी हो या कामकाजी, पति ने उसे कमतर ही समझा है। अब पत्नियों के कार्यक्षेत्र और उत्तरदायित्वों में वृद्धि हुई है, ऐसी स्थिति में जहां उन्हें पति का प्यार, सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए, वहां उन्हें अपमान, उपेक्षा और प्रताडऩा मिलती है।
मैं पति बनकर अपनी पत्नी को इस जन्म में झेली गई त्रासदी से मुक्त कर आश्वस्त कर दूंगी कि वह कमजोर नहीं, शक्तिशाली है और पुरुषों से किसी भी दृष्टि से कमतर नहीं है। पत्नी के रूप में वह मेरी दोस्त, सहगामिनी और सहयोगी होगी तथा मैं स्वयं पति के रूप में उसे पूर्ण सहयोग, प्यार, सम्मान और प्रोत्साहन देकर उसका प्रगति पथ प्रशस्त करूंगी। उसके वर्चस्व को आज के पतियों की तरह मिटाऊंगी नहीं, बल्कि उसके स्वतंत्र अस्तित्व और वर्चस्व को सहर्ष स्वीकार करूंगी।
कुछ समझे कि नहीं आज के पतियों? पति-पत्नी के रूप में मैने अब तक जिन्हें देखा है, उनमें अपवाद स्वरूप ही कुछ ऐसे दम्पति हैं जो अपने वैवाहिक जीवन से पूर्णत: संतुष्ट हैं, विशेषकर पत्नियां तो किसी न किसी रूप में अवश्य ही असंतुष्ट है। यद्यपि यहां आपसी समझ और सामंजस्य का अभाव ही असंतुष्टि का मूल कारण है, तथापि पति का अहंकार और अति महत्वाकांक्षा भी दांपत्य में तनाव उत्पन्न करती है। अगले जन्म में जब मैं पति बनूंगी तब स्वयं ऐसी स्थितियां निर्मित नहीं होने दूंगी, जो तनाव का कारण बनें। अगले जन्म में पति बनकर मैं वे सारे सुख मय ब्याज के लौटाना चाहूंगी, जो इस जन्म में बेचारी पत्नियों से लूटे गए हैं।
इसीलिए मैं चाहती हूं कि हे ईश्वर! अगले जन्म में मुझे पति बनने का सौभाग्य अवश्य देना ताकि मैं पत्नी का दुर्भाग्य न बनूं और मेरी पत्नी को यह कामना न करनी पड़े कि अगले जन्म में वह पति बने। तथास्तु।
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